नई दिल्ली राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी की सजा पर शुरू हुई सियासत को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने और हवा दे दी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के तीनों हत्यारों की फांसी को निरस्त करने वाले तमिलनाडु विस के प्रस्ताव के बहाने संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु का मुद्दा उछाल दिया। इससे असहज कांग्रेस ने तो घटनाक्रम से दूरी बना ली, लेकिन मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तत्काल हमला बोल दिया। दरअसल, उमर ने ट्विटर पर तमिलनाडु के घटनाक्रम पर पूरे देश की हल्की प्रतिक्रिया पर हैरानी जताते मामले की तुलना अफजल से कर दी। उन्होंने ट्वीट किया कि यदि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अफजल गुरु के लिए तमिलनाडु जैसा प्रस्ताव पारित होता तो क्या इसी प्रकार की मूक प्रतिक्रिया होती। मुझे लगता है कि नहीं। उमर की इस टिप्पणी पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने संप्रग सरकार को ही निशाने पर ले लिया। भाजपा महासचिव रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोर्ट के फैसलों पर इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। वह चाहे तमिलनाडु हो या फिर जम्मू-कश्मीर, सभी जगह दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए। इसमें धर्म और क्षेत्र से कोई लेना देना नहीं। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि अगर हुर्रियत के नेता ऐसी टिप्पणी करते तो समझा जा सकता था, पर एक जिम्मेदार मुख्यमंत्री को ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। इससे असहज कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हमें नहीं लगता कि किसी पुराने मुद्दे, मृत्युदंड और फंासी पर चढ़ाए जाने जैसे मामलों पर कोई प्रतिक्रिया दी जाए। हम कई बार कह चुके हैं कि इसमें एक संवैधानिक प्रक्रिया, एक कानूनी वैधानिक प्रक्रिया और एक प्रशासनिक प्रक्रिया शामिल होती है। हालांकि प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने पूरे प्रकरण से दूरी बनाते हुए कहा, लोकतंत्र में लोग सामूहिक या व्यक्तिगत तौर पर अपनी राय रख सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें अटकलें लगानी चाहिए
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