Thursday, September 8, 2011

दिल्ली को दर्द दे गया आतंकी हमलi


नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर हुए दिल दहला देने वाला बम धमाका एक बार फिर राजधानी को गहरा दर्द दे गया। पिछले साढ़े तीन महीने में हाईकोर्ट में हुए दूसरे हमले ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। लेकिन इस लापरवाही ने कई जानें ले लीं और दर्जनों लोगों को गहरे जख्म दिए। अदालत परिसर में सुबह दस बजे के बाद एक काली बीएमडब्लू कार के पास रखे एक सूटकेस में हुए बम धमाके ने वहां खड़े सैकड़ों लोगों के होश उड़ा दिए। यह धमाका अदालत के गेट नंबर पांच पर हुआ। घटना के समय करीब दो सौ लोग प्रवेश पास पाने के लिए अपनी बारी के इंतजार में कतार बांधे खड़े थे और बड़ी संख्या में वकील भी मौजूद थे। धमाके के बाद परिसर में खून से सने कपड़ों में वकील और वादी बचने के लिए इधर-उधर भागते देखे गए। प्रवेश पास बांटने के लिए बनी खिड़की बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। विस्फोट में अपनी एक टांग गंवा चुका एक बुरी तरह जख्मी व्यक्ति वहां से दूर जाने की कोशिश में छटपटा रहा था और हर तरफ हताहतों के मांस के लोथड़े गाडि़यों के टूटे शीशों के साथ जमीन पर बिखरे पड़े थे। धमाके की प्रत्यक्षदर्शी महिला इस कदर खौफजदा थीं कि कुछ बोल नहीं पा रही थीं। घटना के वक्त उनका रिश्तेदार राहुल गुप्ता धमाके से करीब 10 मीटर की दूरी पर था और अब उसे सुनने में परेशानी हो रही है। वह राहुल की जमानत करवाने आई थीं। अदालत के बाहर एक निर्माणाधीन स्थल के सुरक्षाकर्मी नरेन्द्र कुमार सिंह का कहना है, मैंने धमाके की तेज आवाज सुनी और धुएं का गुबार देखा। एक महिला वकील ने बताया कि उन्होंने अदालत की ओर जाते समय तेज धमाका सुना। उन्होंने अपनी पहचान बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, जब तक मैं वहां पहुंचती पुलिस ने रास्ते बंद कर दिए थे और लोगों को अस्पताल ले जाया जा रहा था। मैंने अपनी कार पार्किंग में खड़ी की और दरवाजे के पास गई। मैं वाकई डर गई थी। वहां मौजूद एक अन्य वकील ने बताया कि जहां धमाका हुआ है वह अदालत के सबसे भीड़भाड़ वाले दारवाजों में से एक है। यह काम का समय था जिसके कारण भीड़ और भी ज्यादा थी। उन्होंने कहा, यही वह समय होता है जब सैकड़ों की संख्या में लोग अदालत के भीतर जाने के लिए प्रवेश कार्ड बनवाने आते हैं। मैं धमाके की जगह से करीब 200 मीटर की दूरी पर था। धमाके के प्रत्यक्षदर्शी और पेशे से वकील अजय अग्रवाल का कहना है, मैंने कान को बहरा कर देने वाली एक आवाज सुनी, उसके बाद जो हुआ वह स्तब्ध कर देने वाला था। घायलों को वहां से निकालने में पुलिस की मदद करने वाले एक अन्य वकील पी.एम. लूथरा ने वहां के दृश्य को वीभत्स बताया। लूथरा ने कहा, जब मैंने धमाके की आवाज सुनी मैं अपने मुवकिलों को प्रवेश कार्ड दे रहा था ताकि वह अदालत की कार्रवाई में भाग ले सकें। जहां धमाका हुआ वहां वरिष्ठ नागरिकों को प्रवेश कार्ड दिए जा रहे थे। विस्फोट के बाद वहां चारों ओर उनके चश्मे, चप्पल और कागजात आदि बिखरे पडे़ थे। दिल्ली हाईकोर्ट से पटियाला हाउस कोर्ट की दूरी करीब आधा किलोमीटर है लेकिन बम धमाके की तेज आवाज ने पटियाला हाउस में हलचल मचा दी। जो लोग तारीख पर आए थे और जो कैदी पेश होने के लिए तिहाड़ जेल से आए थे, सभी इतने घबरा गए थे कि वकीलों को उन्हें बताना पड़ा कि ब्लास्ट यहां नहीं हुआ है। पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद मनीष प्रताप सिंह चौहान बताते हैं कि तेज धमाका सुन कर दहशत का माहौल कायम हो गया था। वकीलों के घरों से फोन आने शुरू हो गए सभी सलामती की बात सुनकर राहत की सांस ली।

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