प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार सुबह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह आतंकवाद, आर्थिक मंदी, पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में अस्थिरता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर जोर देंगे। प्रधानमंत्री महासभा के अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार को न्यूयार्क पहुंचे। प्रधानमंत्री की पांच दिनों की यात्रा में उनके साथ विदेश मंत्री एसएम कृष्णा, उनके प्रधान सचिव टीकेए नायर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और विदेश सचिव रंजन मथाई भी हैं। संयुक्त राष्ट्र की बैठक से इतर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईरान, दक्षिणी सूडान और श्रीलंका के राष्ट्रपतियों एवं जापान तथा नेपाल के प्रधानमंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे। मनमोहन सिंह अपने सम्बोधन में संयुक्त राष्ट्र में सुधार का मुद्दा भी उठाएंगे। इस दौरान वह 19 वर्षो के अंतराल पर भारत को सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुने जाने के बाद से अपने देश की भूमिका के बारे में भी बताएंगे। संयुक्त राष्ट्र के लिए रवाना होने से पहले नई दिल्ली में अपनी पांच दिवसीय यात्रा के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा, सभी देशों के लिए यह पहले से कहीं ज्यादा आवश्यक है कि वे इन चुनौतियों से निपटने के लिए कदम उठाएं। यह समय संयुक्त राष्ट्र के लिए अपनी वैश्विक भूमिका निभाने का है। उन्होंने कहा, इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा का अधिवेशन ऐसे वक्त में हो रहा है जब दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर है। पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका तथा खाड़ी देशों में अस्थिरता है। फलस्तीन का मुद्दा अब भी अनसुलझा है। साथ ही आतंकवाद और समुद्री लुटेरे भी विभिन्न देशों के समक्ष मुश्किलें पैदा कर रहे हैं
No comments:
Post a Comment