दिल्ली विस्फोट मामले में कई राज्यों में जांच के बीच जांच अधिकारी इंडियन मुजाहिदीन के 11 फरार सदस्यों की भूमिका से इंकार नहीं कर रहे हैं। इस बीच, ऐसे संकेत हैं कि संगठन तीन साल के बाद फिर से सक्रिय हो रहा है। वरिष्ठ पुलिस सूत्रों ने बताया कि विभिन्न राज्यों के आतंकवाद निरोधी दस्ते मामले की जांच में लगे हुए हैं लेकिन उनमें किसी को भी अब तक महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिला है। जांच अधिकारी बुधवार के आतंकी हमले में इंडियन मुजाहिदीन के 11 फरार सदस्यों में कुछ की भूमिका से इंकार नहीं कर रहे हैं जो कथित तौर पर 2008 में दिल्ली में हुए सिलसिलेवार हमलों में शामिल थे। एक अन्य सूत्र ने बताया कि पूर्व के मामलों में आतंकवाद निरोधी दस्तों के पास ऐसे सबूत थे, जिसके आधार पर इंडियन मुजाहिदीन मॉडयूल का पता लगाया जा सकता था। लेकिन इस बार हमलावरों का कोई ब्योरा नहीं है। उन्होंने कहा कि विभिन्न टीमें जांच कर रही हैं लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा है। जांच को उलझा रहे हैं ईमेल दिल्ली विस्फोट के बाद प्रतिदिन मिलने वाले ईमेल के कारण मामले की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियां पसोपेश में हैं। उन्हें यह समझने में दिक्कत हो रही है कि ये ईमेल मजाक में भेजे जा रहे हैं या फिर यह सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने वाली आतंकवादियों की किसी कार्य-प्रणाली का हिस्सा है। बीती रात दिल्ली पुलिस मुख्यालय को जो ई-मेल प्राप्त हुआ उसे लेकर यह दावा किया गया कि यह कई स्थानों से भेजा गया, जिसका सर्वर मास्को में था। इसे देखते हुए जांच एजेंसियां अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद का रास्ता तलाश रही हैं ताकि मेल भेजने वाले संचालनकर्ता तक पहुंचा जा सके। यह मेल किलइंडिया एट याहू डॉट कॉम से प्राप्त हुआ था। इसके अलावा पहला मेल विस्फोट के ठीक दो घंटे बाद मिला था, जिसका स्रोत जम्मू-कश्मीर का किश्तवाड़ जिला था। दूसरा मेल कोलकाता से भेजा गया था, जिसमें आइएम ने हमले की जिम्मेदारी ली थी
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