Thursday, September 8, 2011

हेडली के प्रत्यर्पण पर गंभीर नहीं थी सरकार


: मुंबई पर आतंकी हमले के आरोपी डेविड कोलमैन हेडली के प्रत्यर्पण को लेकर मनमोहन सिंह सरकार कभी गंभीर नहीं थी। गोपनीय दस्तावेजों के रहस्योद्घाटन के कारण चर्चा में आई वेबसाइट विकिलीक्स के एक केबल में यह जानकारी दी गई है। इसके अनुसार तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने 2009 में अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोएमर को बताया था कि हेडली के प्रत्यर्पण की मांग देश की जनता को भ्रमित करने के लिए की गई थी। विकिलीक्स ने जिस केबल के आधार पर यह जानकारी दी है, उसे रोएमर ने 17 दिसंबर, 2009 को भेजा था। इससे पहले 16 दिसंबर, 2009 को रोएमर ने नारायणन से टेलीफोन पर बातचीत में उनसे आग्रह किया था कि भारत सरकार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हेडली के प्रत्यर्पण के लिए दबाव न डाले क्योंकि इसके बाद हेडली से सच उगलवाना अमेरिकी जांचकर्ताओं के लिए मुश्किल हो जाएगा। इस पर नारायणन का कहना था कि इस मुद्दे पर कुछ नहीं करने से भारत सरकार की छवि खराब होगी। सरकार हेडली के प्रत्यर्पण के मसले पर हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए नहीं दिखना चाहती है। लेकिन रोएमर ने नारायणन को समझाया कि अगर अमेरिकी न्यायिक व्यवस्था के तहत हेडली की जांच की गई तो उसके खिलाफ सुबूत हासिल हो सकेंगे। भारत हेडली के प्रत्यर्पण कराने के प्रति गंभीर था। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम उसके प्रत्यर्पण के प्रति गंभीर रहे हैं। हम उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने को इच्छुक हैं। -पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन


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