Thursday, September 8, 2011

आतंकियों की नई पौध देशभर में फैली


नई दिल्ली देश में आतंकियों की एक नई पौध उभरने लगी है। पिछले चार महीने में मुंबई व दिल्ली में हुए तीन धमाकों के बाद देसी आतंकी मॉड्यूल्स की पुन: सक्रियता इसी की ओर इशारा करती है। इन सभी आतंकी हमलों में देसी आतंकियों का हाथ रहा है। यह भी साबित हो चुका है कि सितंबर 2008 में बाटला हाउस इनकाउंटर और उसके बाद चले अभियान में इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सका था। पिछले एक साल में देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकियों की धरपकड़ और सक्रियता ने यह प्रमाणित किया है कि आतंक की पौध उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल में भी अपनी जड़े जमा चुकी है। उत्तर प्रदेश में मॉड्यूल सक्रिय : पिछले तीन वर्षो में आजमगढ़ से शहजाद, सिद्धार्थनगर से सलमान, लखनऊ से अबू बशर सहित कई आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है। लखनऊ, वाराणसी, दिल्ली, जयपुर अहमदाबाद और मुंबई को दहलाने वाले बम धमाकों वाले पिछले कई आतंकी हमलों के तार भी यूपी के आजमगढ़ मॉड्यूल से जुड़े रहे हैं। बंगाल बना नया गढ़ : वर्ष 2000 से जुलाई 2011 तक हुए एक दर्जन से अधिक धमाकों में बंगाल का मॉड्यूल सक्रिय रहा है। जांच एजेंसियां 13 जुलाई को मुंबई धमाके के मामले में कोलकाता के पार्क सर्कस में रहने वाले अब्दुल्लाह उर्फ नाटा को तलाश रही हैं। कोलकाता से लश्कर के खूंखार आतंकी तारिक अख्तर सहित हिजबुल व हूजी के एक दर्जन से अधिक आतंकी पकड़े जा चुके हैं। जमशेदपुर से नूर हमद और वाराणसी से अब्दुल जुबेर, कोलकाता से पाक सेना के हवलदार शहबाज इस्माइल, हूजी व लश्कर के लिए काम करने अब्दुल्ला वांकी, अब्दुर रहमान और मोहम्मद ताहिदूर की गिरफ्तारी हुई थी। 2005 को मुंबई के झावेरी बाजार, अयोध्या और श्रमजीवी एक्सप्रेस में हुए धमाको की जांच बंगाल तक पहुंची और 2005 में दिल्ली के पहाड़गंज, सरोजनी नगर और गोविंदपुरी में हुए धमाके में मालदा से दो लोगों को गिरफ्तार किया था। वर्ष 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए विस्फोट में कोलकाता के राजाबाजार से एक व्यवसायी को गिरफ्तार किया था। झारखंड भी सक्रिय : आइएम आतंकी मंजर इमाम और दानिश के बाद झारखंड देसी आतंक के नक्शे पर उभरा है। यह आतंकी दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद जैसे कई आतंकी हमलों का आरोपी है, लेकिन अब तक पकड़ा नहीं जा सका है। बिहार के रास्ते : बिहार आतंकियों के लिए नेपाल और बांग्लादेश आने-जाने के सुरक्षित गलियारे के रूप में उभरा है। जनवरी में पूर्णिया से अलकायदा आतंकी मिर्जा खान और पिछले माह किशनगंज से हूजी आतंकी रियाजुल खान को गिरफ्तार किया गया। ये दोनों बांग्लादेश जाने की कोशिश कर रहे थे। लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी मुहम्मद उमर मदनी भी मधुबनी का रहने वाला है। उत्तराखंड में आश्रय : पिछले साल गणतंत्र दिवस परेड के पहले रुड़की से आइएसआइ एजेंट आबिद अली उर्फ असद और दिसंबर में हूजी आतंकी गुलाम नबी शेख और तनवीर अहमद मीर को गिरफ्तार किया गया था। मध्य प्रदेश भी पनाहगाह : आतंकियों को नेटवर्क उपलब्ध करने वाले सिमी की जड़ें मध्य प्रदेश में सबसे गहरी हैं। पिछले तीन वर्षो में अहमदाबाद और जयपुर में हुए बम धमाकों के आरोपियों को यहीं से पकड़ा गया है। (दिखावटी सुरक्षा के दुष्परिणाम- सी उदयभास्कर, पेज-8) (आतंकवाद के खिलाफ लफ्फाजी- एस शंकर, पेज-8) (संबंधित खबरें पेज-2, 3 पर भी देखें)




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