, नई दिल्ली भारत की पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी हमले की रणनीति खोखली साबित हुई है। मुंबई आतंकी हमले के बाद भारतीय रवैये ने अमेरिका का यह भरोसा बढ़ा दिया कि पाक को सबक सिखाने के लिए भारत कोल्ड स्टार्ट (त्वरित व सीमित आक्रामक कार्रवाई) जैसी नीति का कभी इस्तेमाल नहीं करेगा। यहां तक की अमेरिका ने भारतीय सेना के इस रणनीतिक पैंतरे को आधी-हकीकत और आधा फसाना मान लिया है। ताजा विकिलीक्स दस्तावेजों में नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से 16 फरवरी 2010 को भेजे केबल संदेश में कहा गया है कि संसाधनों की गंभीर कमी के कारण भारत ने न तो अब तक इसका इस्तेमाल किया है और न ही युद्धक्षेत्र में कभी इसका इस्तेमाल करेगा। हालांकि पूर्व राजदूत टिमोथी रोएमर द्वारा भेजे इस संदेश में यह जरूर माना गया है कि कोल्ड स्टार्ट भारतीय सेना की एक ऐसी रणनीति है जिसे 72 घंटों में क्रियान्वित किया जा सकता है। केबल संदेश में है कि कोल्ड स्टार्ट रणनीति सीमित समय और सीमा में आक्रमण कर पाकिस्तान को पाक संचालित किसी आतंकी हमले की सूरत में सजा देने की बात करती है। वाशिंगटन को भेजे अपने इस गोपनीय संदेश में रोएमर ने कहा, 2008 में मुंबई के दु:साहसी आतंकी हमले के बाद भी भारत जिस तरह कोल्ड स्टार्ट के किसी भी स्वरूप पर अमल में नाकाम रहा वो इस रणनीति को लेकर सरकार की इच्छाशक्ति पर सवाल उठाता है। हालांकि इस रणनीति का वजूद जहां भारत के लोगों के लिए एक भरोसे का काम करता है वहीं पाकिस्तान पर भी कुछ हद तक दबाव बनाता है। रोएमर के शब्दों में भारत सरकार के लिए कोल्ड स्टार्ट रणनीति का महत्व वास्तविक क्रियान्वयन की बजाए केवल योजना के तौर पर है। मालूम हो कि अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई वाली राजग सरकार के जमाने में बनी कोल्ड स्टार्ट रणनीति पर मनमोहन सरकार ने कभी खुलकर कुछ नहीं कहा। वहीं हाल के कुछ वर्षो में सैन्य नेतृत्व की ओर से आए बयानों में इसे, रणनीति की बजाय अपनी वृहत आपात योजनाओं में एक करार दिया। वर्ष 2001 में संसद पर आतंकी हमले और उसके नतीजे में ऑपरेशन पराक्रम के बाद भारतीय सेना ने कोल्ड स्टार्ट रणनीति तैयार की थी जिससे पाकिस्तान से संचालित किसी आतंकी हमले की सूरत में सीमित आक्रामक अभियान चलाया जा सके। इस रणनीति को आदेश मिलने के 72 घंटे के भीतर क्रियान्वित करना संभव है। (संबंधित खबरें पेज-3 पर)
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