Thursday, September 15, 2011

पाक में भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क को हल्के में न ले अमेरिका

 अमेरिका को पाकिस्तान में मौजूद भारत विरोधी नेटवर्क पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए। अमेरिका के हेरीटेज रिसर्च फाउंडेशन की वरिष्ठ शोधार्थी लीजा कर्टिस ने अमेरिकी कांग्रेस की समिति के समक्ष यह बात कही। लीजा ने स्पष्ट कहा, अमेरिका को यह संदेश नहीं देना चाहिए कि वह पाकिस्तान में मौजूद पश्चिम विरोधी आतंकी नेटवर्क और भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क के बीच फर्क करता है। हमारी नीति से ऐसा आभास होता है कि हम पाक में मौजूद भारत विरोध संगठनों को कमजोर मानते हैं। यह गलत नीति है, क्योंकि भारत विरोधी आतंकी संगठन भी अलकायदा और उसके सहयोगी संगठनों की तरह पश्चिम विरोधी हैं और अलकायदा के मददगार भी। लीजा ने कहा, यह बेहद जरूरी है कि अमेरिका पाकिस्तान से आतंकवाद के संपूर्ण ढांचे को नष्ट करने की ओर कदम बढ़ाए। वहां मौजूद हर प्रकार का आतंकी नेटवर्क परास्त होना चाहिए। लीजा ने समिति को यह भी सलाह दी कि अमेरिका को भारत-पाक के बीच वार्ता को प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद, परमाणु अप्रसार और व्यापार से संबद्ध संसद की विदेशी मामलों की उपसमिति में अमेरिका-भारत आतंकवाद निरोधी सहयोग : गहराती सहभागिता विषय पर विचार रखते हुए ये बातें कहीं। इस दौरान लीजा ने अमेरिका को चेतावनी भी दी कि पाकिस्तान के साथ राजनीतिक संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए उसे आतंकवाद से लड़ने में भारत के साथ सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता कभी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, इसके बजाय अमेरिका को पाकिस्तान को स्पष्ट तौर पर बता देना चाहिए कि आतंकवादी संगठनों की सहायता या उनके साथ नरम रवैया अख्तियार करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह अलग-थलग पड़ जाएगा और इस क्षेत्र स्थिति भी कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षो के दौरान भारत में हुए आतंकवादी हमलों की सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठनों के साथ भारतीयों के भी मिलकर काम करने से भारत में लगातार आतंकवाद बढ़ रहा है

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