Monday, September 26, 2011

अमेरिका के सख्त तेवर देख पाकिस्तान के होश उड़े

अमेरिका- पाकिस्तान के बीच चल रही तकरार अब टकराव का रूप लेती जा रही है। अफगान तालिबान के सबसे सशक्त गुट हक्कानी नेटवर्क को आइएसआइ का हिस्सा बताने के बाद अमेरिका ने कहा कि उसने सभी विकल्प खुले रखे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रबानी खार ने पलटवार करते हुए कहा कि हक्कानी गुट को पैदा करने वाला अमेरिका है, इसलिए वह दूसरों पर जिम्मेदारी न थोपे। इससे पहले पाकिस्तानी सेना के कोर कमांडर ग्रुप की बैठक हुई जिसमें हक्कानी गुट पर कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया गया। सेनाध्यक्ष अश्फाक परवेज कयानी के नेतृत्व में हुई बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि हक्कानी गुट पर कार्रवाई के लिए अमेरिकी दबाव का वह खुलकर विरोध करेंगे। जानकारों ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका के तेवरों से इस बार पाकिस्तान के होश गुम हैं। आइएसआइ के निदेशक अहमद शुजा पाशा का सऊदी अरब रवाना होना और पाक सेनाप्रमुख कयानी का ब्रिटेन दौरा रद होना इसी ओर इशारा करते हैं। समझा जा रहा है कि हक्कानी नेटवर्क को आइएसआइ की मदद संबंधी अमेरिकी आरोपों से पैदा हुए टकराव को दूर करने के लिए शुजा पाशा सऊदी अरब गए हैं। सऊदी अरब अमेरिका-पाकिस्तान के बीच पुल की तरह है। वह दोनों देशों का अभिन्न मित्र है और पहले भी कई मामालों की मध्यस्थता कर चुका है। इससे पहले अल जजीरा के साथ साक्षात्कार में विदेश मंत्री खार ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि अफगानिस्तान के काबुल में अमेरिकी दूतावास और वदाक प्रांत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर इस महीने हुए हमले में पाकिस्तान की आइएसआइ ने हक्कानी नेटवर्क को मदद दी थी। खार ने दो टूक कहा, यदि हम संपर्को की बात करते हैं तो मैं आश्वस्त हूं कि दुनियाभर में सीआइए भी कई आतंकवादी संगठनों से संपर्क हैं। जिस नेटवर्क की अमेरिका इन दिनों बात कर रहा है, वह कई सालों तक सीआइए का दुलारा बना हुआ था। कयानी के नेतृत्व में छह घंटे हुई कमांडरों की बैठक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से लिखा कि कमांडरों ने उत्तर वजीरिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की अमेरिकी मांग का विरोध करने का निर्णय किया है। बैठक में अमेरिका द्वारा पाकिस्तानी सीमा में एकतरफा कार्रवाई के संभावित परिणाम पर भी चर्चा की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस निर्णय से दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो सकते हैं। पाक सैन्य अधिकारी ने कहा, अमेरिका को पहले ही बताया जा चुका है कि पाकिस्तान जो कुछ कर चुका है, उसके दायरे से और आगे वह नहीं जा सकता। हालांकि समाचारपत्र डॉन ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कोर कमांडरों की बैठक सबसे पहले रविवार को हुई जिसमें परिस्थिति पर काबू पाने की जरूरत पर सहमति जताई गई। एक सूत्र के हवाले से अखबार ने लिखा कि यह बैठक छुट्टी के दिन हुई जिससे पता चलता है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लगातार आरोप लगाने से उत्पन्न संकट की गंभीरता कितनी है। सूत्र ने कहा, तनाव में वृद्धि हानिकारक है। लागत लाभ विश्लेषण के लिहाज से लगता है कि मुकाबले से कोई लाभ नहीं है। डॉन ने लिखा है, ऐसा नहीं लगता कि अमेरिकी दबाव में सेना हक्कानी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई पर सहमत हो गई है। रविवार को छह घंटे चली बैठक के बारे में सेना की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हिना को वापस बुलाने के बाद गिलानी का यू-टर्न आतंकी नेटवर्क के सफाए पर अमेरिकी चेतावनी से झल्लाने के बाद विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार को न्यूयॉर्क से वापस बुलाने की घोषणा करने वाले प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने यू-टर्न ले लिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 66वें अधिवेशन में हिस्सा लेने गई रब्बानी अब दौरा पूरा करने के बाद ही पाकिस्तान लौटेंगीं। प्रधानमंत्री आवास के अधिकारियों ने इससे पहले बताया था कि विदेश मंत्री तत्काल लौट आएंगी। विदेश विभाग के अधिकारियों ने बाद में साफ किया कि हिना महासभा में भाषण देने के बाद वापस आएंगी। पाकिस्तान को अब एक विकल्प चुनना होगा अमेरिका के प्रमुख सीनेटरों में लिंडसे ग्राहम ने फॉक्स न्यूज से कहा, यदि पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय नीति के तहत आतंकवाद को समर्थन बरकरार रखता है तो हमारे पास सभी विकल्प खुले हैं। पाक को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह वक्त उसके लिए विकल्प चुनने का है। उन्होंने कहा कि रक्षामंत्री लियोन पेनेटा और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ्स के चेयरमैन एडमिरल माइक मुलेन सहित पेंटागन के शीर्ष रक्षा अधिकारी सही कह रहे हैं कि आइएसआइ-हक्कानी गुट को मदद दे रहा है। सर्वदलीय बैठक में पाक सेना व धर्मगुरु भी होंगे हक्कानी गुट पर कार्रवाई को लेकर इस्लामाबाद-वाशिंगटन के बिगड़ते रिश्तों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में पाकिस्तानी की सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा बैठक में विभिन्न धार्मिक समूहों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। न्यूयॉर्क में यूएन सम्मेलन से लौट रहीं विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार सर्वदलीय बैठक में वाशिंगटन-इस्लामाबाद संबंधों पर जानकारी देंगी। अमेरिका ने अफगानिस्तान में 13 सितंबर को हुए आतंकवादी हमले के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आइएसआइ) और हक्कानी नेटवर्क के गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका के उक्त आरोपों के मद्देनजर गिलानी ने सर्वदलीय बैठक के मद्देनजर अवामी मुस्लिम लीग के शेख राशिद, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कैद के चौधरी शुजात हुसैन, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नवाज शरीफ और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के अल्ताफ हुसैन से बातचीत की है। अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ्स के चेयरमैन एडमिरल माइक मुलेन ने पाकिस्तान पर हक्कानी नेटवर्क को समर्थन देने का आरोप लगाया। हक्कानी नेटवर्क को आईएसआई का वास्तविक हथियार बताते हुए उन्होंने अफगानिस्तान में 11 अगस्त को ट्रक बम हमले और 13 अगस्त को काबुल में अमेरिकी दूतावास के बाहर हुए हमले के लिए हक्कानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उसे आइएसआइ ने मदद दी। वाशिंगटन-इस्लामाबाद के संबंध दो मई को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिका द्वारा अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के बाद से ही तनावपूर्ण हैं। दूसरी बार पाक राष्ट्रपति बनने की तैयारी में जरदारी पाकिस्तान में 2013 के आम चुनावों में सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) बहुमत हासिल नहीं भी कर पाए, तो भी आसिफ अली जरदारी के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं प्रबल दिख रही हैं। समाचार पत्र एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने जरदारी के करीबी सूत्र के हवाले से लिखा है, उन्हें हालांकि सुनिश्चित करना होगा कि एक सौ सदस्यीय उच्च सदन सीनेट के आधे से अधिक सीटों के चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगले साल मार्च में हो जाएं। सूत्रों का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव होते हैं तो जरदारी को एक और कार्यकाल मिल सकता है। अफगानिस्तान ने पाक सेना को चेतावनी दी काबुल : अफगानिस्तान के रक्षा अधिकारियों ने पाकिस्तान को देश के पूर्वोत्तर में रॉकेट दागने और भारी गोलाबारी नहीं रोकने पर जवाबी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है। अफगान रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी सेना पर पिछले पांच दिनों में 300 से अधिक गोला और रॉकेट कुनार एवं नूरिस्तान प्रांतों में दागने का आरोप लगाया। यह इलाका कट्टरपंथी संगठनों के लिए पनाहगाह है। अमेरिका नीत गठबंधन सेना का इस क्षेत्र में कम प्रभाव है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी सरजमीं से हो रहे गोलाबारी से अनगिनत संख्या में अफगान मारे गए हैं। कई मकान और मस्जिद नष्ट हो गए हैं तथा सैकड़ों लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। बहरहाल, पाकिस्तान की ओर से इस पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है

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