नई दिल्ली सन 2008 में दिल्ली में हुए पांच सीरियल बम धमाके की सुनवाई जल्दी पूरा करने के लिए तीस हजारी कोर्ट गंभीर हो गई है। कोर्ट ने एक अभियोजन पक्ष को निर्देश जारी कर कहा है कि बम ब्लास्ट मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए और हर तारीख पर 15 गवाहों की गवाही सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने कहा कि बम धमाके लोकतांत्रिक व विकासशील देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। आतंकी बार-बार ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। तीस हजारी कोर्ट की विशेष जज संतोष स्नेही मान की अदालत ने मामले की जल्दी सुनवाई की बात कहते हुए कहा कि इन धमाकों में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और सौ से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इन पीडि़तों को समय से इंसाफ मिले इसके लिए अहम कदम उठाया जाना जरूरी है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिए हैं कि अब प्रत्येक सप्ताह बुधवार को मामले की सुनवाई होगी और प्रत्येक सुनवाई पर कम से कम 15 गवाहों को समन किया जाना चाहिए। अदालत ने माना कि यदि इसी गति से मामले की सुनवाई की जाएगी, तो फैसले में करीब छह साल का समय लगेगा। जो कि बेहद लंबा समय होगा। इसलिए मामले की सुनवाई महीने में चार दिन किया जाना सही होगा। इतना ही नहीं सरकारी गवाहों को सुरक्षा दिया जाना भी महत्वपूर्ण विषय है। जिसपर अभियोजन को ध्यान देना होगा। यदि किसी गवाह को धमकी मिलती है, तो पुलिस कमिश्नर स्वयं ऐसे मामलों की निगरानी करें। इसी बीच अदालत में इस मामले के गवाह चार डॉक्टरों ने अपने बयान दर्ज कराए। उल्लेखनीय हैं कि 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में पांच स्थानों पर बम ब्लास्ट हुए थे और एक जगह पर जिंदा बम बरामद हुआ था
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