Tuesday, September 20, 2011

फोरेंसिक लैब नहीं पहुंचे विस्फोट सैंपल

आगरा यह पुलिस का दोष है, या फोरेंसिक लैब का या फिर सिस्टम का? बम विस्फोट के 48 घंटे बाद भी पुलिस की ओर से जांच के लिए भेजे जाने वाले सैंपल फोरेंसिक लैब नहीं पहुंचे हैं। प्रदेश में बम विस्फोट जांचने वाली आगरा की एक मात्र फोरेंसिक लैब अब तक कॉटन स्वॉब से लिए गए सैंपल की ही जांच कर सकी है। इसी आधार पर बम धमाके में देसी सामग्री का प्रयोग घोषित कर दिया गया। बाइपास स्थित जय हास्पिटल में शनिवार शाम 5:32 बजे जोरदार धमाका हुआ था। मौके पर पहुंचे फोरेंसिक लैब के डिप्टी डायरेक्टर एक्सप्लोसिव डॉ. संतोष कुमार के नेतृत्व में टीम रुई में विस्फोट के सैंपल ले गई थी। अगले दिन रविवार को लैब बंद थी। मगर डीजीपी और डीजी स्पेशल का दौरा तय हो गया। दोपहर 12:00 बजे तक आनन-फानन में कॉटन स्वॉब के सैंपल के प्राथमिक रासायनिक परीक्षण हुए। इसके आधार पर पुलिस ने फाइनल खुलासा कर दिया कि बम देसी मैटेरियल से बनाया गया था। यानी यह धमाका उसी तरह के बम से था, जो कि त्योहार के लिए बनाए जाते हैं। रविवार दोपहर लगभग 1:00 बजे एनएसजी और एनआइए की टीम की जांच खत्म होने के बाद आगरा की फील्ड यूनिट घटनास्थल के सैंपल लेकर चली गई थी। इसके बाद उन्हें अब तक परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया। तो दोगुना क्यों हुआ इनाम? एक तरफ सरकार की रिपोर्ट कहती है कि अस्पताल में धमाका आपसी प्रतिद्वंद्विता के चलते हुआ। वहीं फोरेंसिक रिपोर्ट में बम की सामग्री देसी निकली। रविवार दोपहर को डीजी स्पेशल ने खुलासे के बाद अचानक बम धमाका करने वाले के सुराग देने वाले को इनाम की रकम 50 हजार से बढ़ाकर सीधे एक लाख कर दी। जब बम धमाका साधारण था तो अचानक इनाम क्यों बढ़ाया गया? बाकी है अभी बहुत परीक्षण : जानकारों के मुताबिक धमाके के सैंपल के फिजिकल और केमिकल एनालिसिस की कई प्रक्रियाएं होती हैं। आशंका यह भी है कि विस्फोट में नाइट्रेट भी पाया जा सकता है, जो गंभीर विस्फोटक की श्रेणी में आता है। यह रिपोर्ट कब तक तैयार होगी, यह कोई नहीं बता पा रहा है

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