नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में हुए बम धमाके ने अदालतों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एचएस कपाडि़या ने विस्फोट की सूचना मिलने के बाद हाईकोर्ट समेत दिल्ली के स्थानीय अदालतों की सुरक्षा की समीक्षा की। वहीं हमले से सकते में आए गृह मंत्रालय ने पूरे देश में अलर्ट जारी कर दिया। इसे देखते हुए लगभग सभी राज्यों में गृह मंत्रियों ने आला अधिकारियों के साथ बैठक कर संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा की नए सिरे से समीक्षा की। हाईकोर्ट पर आतंकी हमले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कपाडि़या ने खुद विस्फोट स्थल का मुआयना किया। यही नहीं, उन्होंने अदालती सुनवाई बीच में रोककर सालीसिटर जनरल रोहिंगटन नरिमन और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा पर अपने विचार देने को कहा है। वहीं हमले के बाद गृह मंत्रालय में पूरे दिन बैठकों को सिलसिला चलता रहा। सबेरे 10:15 बजे विस्फोट के तत्काल बाद गृह सचिव ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से टेलीफोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली और एनआइए व एनएसजी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। इसके बात 11:30 बजे एनआइए महानिदेशक एससी सिन्हा, आइबी निदेशक एनएस संधू, आंतरिक सुरक्षा सचिव यूके बंसल के साथ गृह सचिव की बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े दूसरे आला अधिकारी भी मौजूद थे। इसी बैठक में एससी सिन्हा ने पूरी जांच एनआइए को सौंपे जाने की मांग की। चिदंबरम की हरी झंडी और दिल्ली पुलिस आयुक्त की रजामंदी के बाद दोपहर तक जांच एनआइए को सौंपे जाने का फैसला कर लिया गया। लोकसभा और राज्यसभा में चिदंबरम के बयान के बाद 2:30 बजे गृहमंत्री ने एक बार फिर आला अधिकारियों की बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद एससी सिन्हा ने घटना की जांच के लिए 20 सदस्यीय टीम के गठन की घोषणा। इसके तत्काल बाद हमले की जिम्मेदारी लेने संबंधी हरकत उल जेहादी का मेल आ गया। इस मेल के आलोक में गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों की 4:30 बजे फिर से बैठक हुई। इसी बैठक के बाद यूके बंसल ने इस ईमेल पर संदेह जताते हुए इसकी पड़ताल की जरूरत पर बल लिया। देर शाम तक बैठकों का यह सिलसिला जारी रहा।
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