Tuesday, August 30, 2011

राजीव के हत्यारों को बचाने के लिए हाय-तौबाचेन्नई


: राजीव गांधी के कातिलों को 11 दिन बाद दी जाने वाली फांसी रद कराने को लेकर तमिलनाडु में सियासी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही प्रदर्शन तेज हो गए हैं। विपक्षी दल द्रमुक,पीएमके, एमडीएमके के साथ ही सरकार समर्थन डीएमडीके ने दया याचिका पर पुनर्विचार की मांग की है। श्रीलंकाई तमिल सांसद सुरेश प्रेमचंद्रन ने भी राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखा है। राजनीतिक प्रयासों के बीच पुलिस ने सोमवार को ट्रेन रोकने और प्रदर्शन करने के आरोप में 350 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं,मुख्यमंत्री जयललिता ने यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप से इंकार किया है कि उनके पास राष्ट्रपति के आदेश को बदलने की शक्ति नहीं है। जनता पार्टी के मुखिया सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी कहा है कि फांसी केमामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 में श्रीपेरंबदूर में हत्या के मामले के दोषियों मुरुगन, पेरारिवलन व संतन की फांसी रुकवाने के लिए कोयंबटूर में सोमवार को एमडीएम, पीएमके,वीसीके, एनटीके समेत विभिन्न दलों के कार्यकर्ता व छात्र शहर के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकने की कोशिश की। विधि महाविद्यालय के छात्रों ने पासपोर्ट व आयकर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। त्रिरुपुर में भी ट्रेन रोकने का प्रयास हुआ। हत्यारों की ओर से राष्ट्रपति के आदेश की पुनरीक्षा के लिए मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। प्रख्यात अधिवक्ता और सांसद रामजेठमलानी ने सजा कम करने के प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा, किसी भी व्यक्ति को तब तक दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कानून उसे इसकी इजाजत देता है। वहीं, मुख्यमंत्री जयललिता ने विस में कहा, विपक्षी दल उसने इस मामले में दखल की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने के बाद मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर सकता। गृह मंत्रालय 1991 में स्पष्ट कर चुका है कि दया याचिका खारिज किए जाने के बाद राज्य सरकारें सजा घटाने के लिए धारा 161 का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए पीएमके संस्थापक एस रामदास ने कहा अगर वह इच्छा शक्ति दिखाएं तो तीन जिंदगियां बच सकती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कहा, कातिलों ने 20 साल जेल में काट लिए हैं। इसलिए उनकी फांसी रद होनी चाहिए। ऐसा हुआ तो पूरी तमिल जाति इस मानवीय कृत्य की सराहना करेगी व खुश होगी। यदि राजीव जीवित होते तो वह तीनों दोषियों की जान बचाने को निश्चित तौर पर आगे आते।


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