Thursday, September 8, 2011

जनहित याचिका के दिन खौफ का साया


नई दिल्ली इस ब्लास्ट से एक बात तो साफ हो गई कि आतंकियों का मकसद बड़े स्तर पर लोगों को निशाना बनाना था। चूंकि एक बार फिर से इस काम के लिए जनहित याचिका के मामलों की सुनवाई के लिए तय किया गया दिन ही चुना गया है। इसी साल 25 मई को जब हाईकोर्ट के गेट नंबर सात के पास गाड़ी में ब्लास्ट हुआ था तो उस दिन भी बुधवार ही थी और इस दिन हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई होती है। ऐसे में इस दिन सामान्य से ज्यादा भीड़ हो जाती है। 25 मई को दोपहर का समय चुना गया था और ठीक कांच की बनी कैंटीन के पीछे की जगह। अगर उस दिन भी गाड़ी में ब्लास्ट ठीक से हो जाता तो कैंटीन के अंदर लोगों को काफी चोट आती क्योंकि लंच के समय कैंटीन में काफी भीड़ होती है। उस दिन मकसद कामयाब नहीं हुआ तो एक बार फिर बुधवार के दिन को चुना गया।अबकी बार उस जगह को चुना जहां आम जनता अपने मामलों की सुनवाई के लिए अंदर जाने के लिए पास बनवाती है। इन काउंटर पर अक्सर भीड़ होती परंतु बुधवार वाले दिन ज्यादा भीड़ होती है। समय भी सुबह का चुना गया क्योंकि साढ़े दस बजे कोर्ट शुरू होती है तो ऐसे में जाहिर है लोग सुबह दस बजे ही पास बनवाने केलिए लाइन में लग जाते है। इसलिए घटना के समय ज्यादा भीड़ थी और दो सौ से ज्यादा लोग वहां मौजूद थे।




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