इंडियन मुजाहिदीन के अमेरिका की प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल होना भारत के लिए सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से अहम है। इससे उसके आतंकी मंसूबों को कुचलने में कोई सफलता नहीं मिलेगी। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इंडियन मुजाहिदीन पर अमेरिकी प्रतिबंध से उसके आतंकी हमले करने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अमेरिकी प्रतिबंध के बाद कोई भी संगठन अमेरिका में कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता है। उसके बैंक खाते सील कर दिए जाते हैं और उससे जुड़े लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाता है। पर उक्त संगठन पहले ही ऐसा कुछ भी नहीं कर रहा है। पूरी तरह भारत में पनपे आतंकियों के एक ढीले-ढाले संगठन के रूप में इंडियन मुजाहिदीन का लश्कर-ए-तैयबा से संबंध जरूर है। लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि लश्कर पहले से ही अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित है। एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन को आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए अधिक पैसे की जरूरत भी नहीं है। उसने बहुत कम संसाधनों का इस्तेमाल कर अब तक के सभी आतंकी हमलों को सफलता से अंजाम दिया है। यह धन उसे भारत में आइएसआइ के नकली नोटों के सप्लाई नेटवर्क से आसानी से मिल जाता है। उनके अनुसार पूरी तरह भारत की धरती पर पनपे इस आतंकी संगठन से हमें खुद ही निपटना होगा
No comments:
Post a Comment