नई दिल्ली हाई कोर्ट बम ब्लास्ट में घायल लोगों के इलाज में लापरवाही शुरू हो गई है! अपनों के घायल होने का दर्द झेल रहे परिजनों के अनुसार नर्सिग केयर में लगा स्टाफ काम में लापरवाही कर रहा है। घायलों को न ही समय पर दवाएं मिल रही हैं और न ही मरहम-पट्टी समय पर हो रही है। बम ब्लास्ट में घायल होने वाले 11 लोग आरएमएल अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से एक ही हालत गंभीर है और वह पुरानी बिल्डिंग के आइसीयू में हंै। छह मरीज रिकवरी रूम तथा चार ऑथोपेडिक वार्ड में हैं। अब तक इस बम ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। एक पैर गवां चुके 55 वर्षीय मदन मोहन शर्मा आइसीयू में हैं। उनकी पत्नी रेखा शर्मा कहती हैं कि डॉक्टर तो अच्छा इलाज कर रहे हैं, लेकिन नर्सिग केयर अच्छी तरह से नहीं मिल रहा है। हम काफी परेशान हैं और डर सता रहा है कि कहीं फिर से संक्रमण न हो जाए। संक्रमण के चलते ही मदन मोहन का एक पैर काटा जा चुका है। बाएं पैर में भी चोट पहुंची है और कमर का हिस्सा जल गया है। इसलिए हम चाहते हैं कि हमारे मरीज को भी आरएमएल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती किया जाए। डॉक्टरों के अनुसार मदन मोहन के ब्लड में संक्रमण का डर बना हुआ है। हालांकि कई अन्य लोग भी स्टाफ के व्यवहार से परेशान हैं। मगर परेशानी कहीं और न बढ़ जाए इसलिए सामने आकर बोलने को तैयार नहीं हैं। जिन मरीजों की स्थिति में सुधार हो रहा है उनमें तेजेंद्र सिंह, राधेश्याम, के पी शर्मा, मुकेश अरोड़ा, हरीश, राशिद अली हैं। इन्हें रिकवरी रूम में रखा गया है। तरुण यादव, किशन कुमार अरोड़ा, नितिन और प्रमोद अभी भी ऑर्थोपेडिक वार्ड में हैं। 1अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर सुनील सक्सेना के अनुसार सभी की स्थिति नियंत्रण में है। साफ्टवेयर इंजीनियर नितिन के शरीर में एक हजार से अधिक छर्रे लगे हैं। कई निकाले जा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत सारे छर्रे उनके शरीर में रह जाएंगे हालांकि इनसे उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी
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