Saturday, September 10, 2011

सीमापार नहीं, देश में बैठे चरमपंथियों पर ध्यान

 नई दिल्ली हालिया बम विस्फोटों के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम देश में मौजूद चरमपंथियों को जिम्मेदार मानते हैं। बीबीसी को दिए साक्षात्कार में उनका कहना है कि हाल की घटनाएं दर्शाती हैं कि भारत को देश में बसे चरमपंथियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के स्त्रोत के लिए सीमापार आतंकवाद की ओर इशारा नहीं किया जा सकता। गृह मंत्री का कहना है कि आंतकवाद का केंद्र माने जाने वाले अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में चरमपंथियों का सामना करने वाली ताकतें नहीं रहेंगी तो वे भारत की ओर ध्यान केंद्रित करेंगे और कई लोग हैं जो उनका समर्थन कर सकते हैं। उन्होंने ये भी कहा भारत अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और मध्य पूर्व के देशों से खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान करता है लेकिन हम उस स्थिति में नहीं पहुंचे हैं कि खुफिया जानकारियां पाकिस्तान के साथ बांटें या फिर पाकिस्तान हमारे साथ खुफिया जानकारियां बांटे। चिदंबरम ने ये भी कहा कि जब से पाकिस्तान-अमेरिका के रिश्तों में तल्खी आई है, तब से भारत-पाक सीमा पर हालात उतने शांत नहीं रहे, जितने कुछ महीने पहले थे। चरमपंथी गतिविधियों पर खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान पर भारत-पाकिस्तान सहयोग के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में चिदंबरम ने कहा, पाकिस्तान से जानकारी न बांट पाने का कारण साफ है। पाकिस्तान या फिर पाकिस्तानी सरकार में मौजूद लोग अब भी नॉन स्टेट एक्टर्स (सरकार की जानकारी के बिना सक्रिय चरमपंथी) को समर्थन दे रहे हैं। मैंने पहले भी इसे खारिज किया है। यदि ऐसा है तब भी पाकिस्तान सरकार में मौजूद लोग इन लोगों को समर्थन देते हैं। ऐसे में हम पाकिस्तान के साथ खुफिया जानकारी कैसे बांट सकते हैं या फिर पाकिस्तान से भरोसेमंद, सही वक्त पर मिलने वाली जानकारी की कैसे उम्मीद कर सकते हैं? भारतीय गृह मंत्री का कहना था कि हाल में भारत में तीन बडे़ हमले हुए हैं और एक 25 मई (दिल्ली हाईकोर्ट के पास) वाला असफल प्रयास रहा है। उन्होंने कहा, पुणे और मुंबई के हमलों के बारे में हमें लगभग यकीन है कि ये भारत में आधार रखने वाले या भारतीय चरमपंथियों का काम था। दिल्ली में मई में हुआ प्रयास और दिल्ली में हुए धमाके के मामले में शक की सुई भारतीय चरमपंथियों की ओर है। आपको पता है हूजी और इंडियन मुजाहिद्दीन ने इसे अंजाम देने का दावा किया है और हम इसकी पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं। चिदंबरम ने इससे निष्कर्ष निकालते हुए कहा, हमें इससे ये पता चलता है कि हम अब आतंकवाद के स्त्रोत के लिए सीमापार से आतंकवाद की ओर इशारा नहीं कर सकते। वो खतरा बना हुआ है लेकिन हमें भारतीय और भारत में आधारित चरमपंथियों के मॉड्यूल्स पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सबसे बड़ी चिंता : पाकिस्तान के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, हमें अपने दोस्तों पर दबाव बनाना होगा जो पाकिस्तान पर दबाव बनाएं ताकि वो वहां सक्रिय लोगों का सामना करे। लेकिन अब क्योंकि भारतीय चरमपंथी सक्रिय हुए हैं तो हमें आतंकवाद निरोधक क्षमता बनानी होगी और इन मॉड्यूल्स को खत्म करना होगा। चिदंबरम ने कहा, मेरी सबसे बड़ी चिंता है कि जब हम सब मानते हैं कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान आतंकवाद का केंद्र है, तो यदि वहां इनका सामना करने वाली ताकतें न रहीं तो क्या उनके हौसले नहीं बढें़गे, वे और उग्र नहीं होंगे? ये गुट अपना ध्यान बहुत जल्दी भारत पर केंद्रित कर सकते हैं। भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान में लोग हैं जो इस मुद्दे पर हाथ मिलाकर चल सकते हैं। युवाओं का उग्रवाद की ओर झुकाव उनकी दूसरी चिंता है युवाओं के उग्रवादी विचारधारा की ओर बढ़ते झुकाव को कैसे रोकें। यह सुरक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा है। क्योंकि पूरे विश्र्व में युवा उग्रवादी विचारधारा की ओर झुक रहे हैं और इसे रोकना केवल पुलिस के बस की बात नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि वह भारतीयों को कैसे ये समझाएं कि भारत में कानून व्यवस्था कायम रखना आसान काम नहीं है और सरकार क्षमता बढ़ा सकती है, लेकिन ऐसे मौके भी आएंगे जब चरमपंथियों का दांव लग सकता है। भारतीय खुफिया एजेंसियों की कारगुजारी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, जिस तरह की खुफिया जानकारी आ रही है, मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं। भारत बड़ा देश है, जहां विभिन्न संस्कृतियों वाले लोग हैं और शहरों में इतने भिन्न किस्म के लोग बसे हैं कि वहां खुफिया जानकारी जुटाना बहुत मुश्किल है। मुझे भरोसा नहीं कि हर तरह के गुट के बारे में हमारे पास पर्याप्त जानकारी है। ये राज्यों का काम है और केंद्र की राज्यों में मौजूदगी तो होती है लेकिन खुफिया जानकारियां जुटाना राज्य सरकारों का काम है और वे अपनी क्षमताएं बढ़ा रहे हैं। चिदंबरम ने कहा कि ओसामा के मारे जाने का मतलब ये नहीं कि कोई और नेता नहीं आ सकता। उनका मानना है कि यदि संगठन का तंत्र बरकरार है तो इस बात से सब्र नहीं किया जा सकता कि नंबर 1 मारा गया है। उन्होंने इलियास कश्मीरी का जिक्र करते हुए कहा कि ये तो अस्थायी धक्का है

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