Saturday, September 17, 2011

आतंकियों को नहीं रोक पा रहीं सुरक्षा एजेंसियां

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति को अनिश्चिततापूर्ण बताने के साथ ही गृहमंत्री पी.चिदंबरम की बात दोहराई है कि सुरक्षा एजेंसियों के पास नक्सलियों-आतंकियों से निपटने की क्षमता नहीं है। दिल्ली और मुंबई के ताजा हमलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी करार देते हुए प्रधानमंत्री ने आतंकियों की सुरागकशी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए हल्का सिपाही (बीट कांस्टेबल) प्रणाली की मजबूती पर बल दिया। मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशकों को संबोधित करते हुए कहा, देश में सुरक्षा का माहौल अनिश्चित बना हुआ है। न तो नक्सली हमलों में कमी आ रही और न ही सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों को रोकने में सफल हो पाई हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर में इस बार गर्मियां शांति से गुजर गईं, लेकिन खतरा बरकरार है। पाक में भारत विरोधी आतंकी प्रशिक्षण शिविर फिर शुरू हो गए हैं और आतंकियों की भारत में घुसपैठ के प्रयास हो रहे हैं। शांति प्रयासों को पटरी से उतारने की कोशिश हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियां इनसे दृढ़ता से निपटें। जम्मू-कश्मीर में सरकार के शांति प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने राज्य में सुरक्षा बलों की कमी की संभावना से इंकार किया। नक्सली हिंसा में कमी न आने पर चिंता जताते हुए पीएम ने कहा, सरकार प्रभावित जिलों में विकास योजनाओं के सहारे नक्सलियों को अलग-थलग करने का प्रयास कर रही है। इंडिया रिजर्व बटालियन नामक विशेष बल गठित किया जा रहा है। नया बल बनने के बाद विकास योजनाएं पूरी होंगी और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव दिखेगा। मनमोहन ने जांच व सुरक्षा एजेंसियों की अल्पसंख्यकों के प्रति पूर्वाग्रह दूर करने की जरूरत पर बल देते हुए पुलिस महानिदेशकों से कहा, इस सामान्य धारणा से पुलिस की छवि को झटका लगता है। उन्होंने साफ कहा, यह धारणा चाहे जिन भी कारणों से बनी हो, उन्हें दूर करने के जरूरी उपाय किए जाएं, क्योंकि बेहतर पुलिस साबित होने के लिए समाज के सभी वर्गो का विश्वास जीतना जरूरी है। ताजा आतंकी हमलों को रोकने और हमलावरों की गिरफ्तारी में सुरक्षा एजेंसियों की विफलता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने पुलिस महानिदेशकों से बीट कांस्टेबल प्रणाली दुरुस्त करने को कहा। इससे मानव आधारित असली खुफिया जानकारी जुटाने में सफलता मिलेगी। पूरे पुलिस बल में 87 फीसदी कांस्टेबलों की संख्या बताते हुए उन्होंने कहा, दुरूह और खतरों से भरा काम करने के बावजूद सिपाही आधारभूत सुविधाओं से वंचित हैं। प्रधानमंत्री ने कांस्टेबलों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत पर बल दिया

No comments:

Post a Comment