आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क पर अमेरिका व पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के बीच तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। दोनों एक के बाद एक अपना पक्ष रख रहे हैं। अब अमेरिका ने दावा किया है कि आइएसआइ के तार हक्कानी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप निराधार नहीं हैं, बल्कि इस बात के उसके पास ठोस प्रमाण हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि उनके पास पुख्ता सुबूत हैं कि आइएसआइ हक्कानी और मंुबई हमलों के जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन को मदद देती है। नाम न प्रकाशित करने की की शर्त पर पेंटागन के अधिकारी ने बताया, आइएसआइ आतंकी संगठनों को धन मुहैया कराती है। तकनीकी सहयोग देती है। पाकिस्तानी अधिकारी खूंखार आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध करवा रहे हैं। अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का एबटाबाद में पाया जाना इस बात का पुख्ता सुबूत है। एबटाबाद में पाकिस्तानी सेना व आइएसआइ के अधिकारियों के सरकारी आवास हैं। रक्षा मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने बताया, पेंटागन पाकिस्तान को लंबे समय से सबूत उपलब्ध करा रहा है। उसके बावजूद उसने आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया, लेकिन काबुल में हाल में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के बाद पानी सिर से ऊपर चला गया है। अब हमने इन साक्ष्यों को सार्वजनिक करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने सबूतों के बारे में विस्तृत जानकारी देने से इंकार कर दिया। इन्हीं सुबूतों के आधार पर पिछले हफ्ते ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ माइक मुलेन ने कांग्रेस की एक कमेटी को बताया था कि हक्कानी आइएसआइ का अभिन्न हिस्सा है। अमेरिका-पाकिस्तान के बीच तीसरे देश की जरूरत नहीं अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाने के लिए किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से साफ इंकार किया है। विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नुलैंड ने यह बात उन मीडिया रिपोर्टो को लेकर कही, जिनमें दोनों देशों के संबंध सुधारने के लिए किसी तीसरे देश की जरूरत के बारे में लिखा गया था। उन्होंने कहा, दोनों देश सीधे तौर पर बात करके आपकी मसलों को सुलझा सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के समक्ष पाकिस्तानी आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के मुद्दे को उठाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की सैन्य सहायता में कमी की गई है जबकि असैन्य सहायता जारी है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान के सहयोग की समीक्षा करने के बाद सैन्य सहायता को लेकर पुनर्विचार किया जाएगा। पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका का रुख और सख्त हुआ एक समय पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन अब पाकिस्तान के खिलाफ हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका जल्द ही पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने जा रहा है। मुलेन ने वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए साक्षात्कार में पाकिस्तान के प्रति कड़वाहट जताई है। उन्होंने कहा, मेरे देश के निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं। मैं यह सब चुपचाप नहीं देख सकता। यह और बात है कि मैं पाकिस्तान का अच्छा मित्र रह चुका हूं, लेकिन मैं अपने लोगों को ऐसे मरते नहीं देख सकता। मुलेन इस महीने के अंत में पद से विदा लेने जा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रति अपने रुख में बदलाव के बारे में उनका कहना है कि वह इस्लामाबाद के साथ साझेदारी को लेकर अभी तक वकालत करते थे, लेकिन उसकी तरफ से सहयोग नहीं मिला। अब दोबारा वैसी राय बना पाना मुश्किल होगा। अपने कार्यकाल में मुलेन पाकिस्तानी सेना प्रमुख अश्फाक परवेज कयानी से 30 बार मिले और उनके साथ हुई अनगिनत बैठकों में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में सहयोग की मांग की। दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कयानी के साथ उनकी गहरी दोस्ती थी। शीर्ष अमेरिकी कमांडर ने कहा कि उत्तर वजीरिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तानी आक्रमण की एक बड़ी योजना के सफल नहीं हो पाने से उन्हें गहरी निराशा हुई है। जीत रहा है अल कायदा रोम : यदि अमेरिका को लगता है कि वह कुख्यात आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के बाद आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में जीत रहा है, तो वह गलत है। यह दावा है अमेरिकी विशेषज्ञ दावीद गारटेनस्टेन रॉस का। रॉस ने बिन लादेंस लेगसी पुस्तक लिखी है। अमेरिकी पत्रिका अटलांटा में लिखे आलेख में उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन अल कायदा अपने सरगना के मारे जाने के बाद भी कमजोर नहीं हुआ है। उल्टे वह इस लड़ाई में जीत रहा है। रॉस ने दुश्मन को हराने के लिए अमेरिका के अत्यधिक खर्च और अनथक प्रयास किए जाने पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ओसामा यही चाहता रहा है। रॉस के अनुसार, मैंने अपनी हालिया किताब में 9/11 हमले के बाद सुरक्षा पर लगातार किए जा रहे अत्यधिक खर्च पर चर्चा की है। यह खर्च अमेरिका की एक बड़ी गलती है। उन्होंने कहा कि कई विश्लेषकों ने अलकायदा के खतरे को गलत आंका है। इस कारण गलत नीतियां लागू हुईं और चीजें बदतर हुई। रॉस का कहना है कि अफगानिस्तान और इराक में युद्ध पर खरबों डॉलर रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अमेरिका पर 14 खरब डॉलर (लगभग 685 खरब रुपये) का कर्ज है। उन्होंने कहा 9/11 अमेरिकी हमले के बाद अमेरिका ने सुरक्षा के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया, जिसने उसे आर्थिक स्तर पर कमजोर कर दिया है। रॉस का तर्क है कि आतंकवादी संगठन हारा नहीं है। इसे रोकना मुश्किल हो रहा है क्योंकि अमेरिका अपनी शक्ति और संसाधन बर्बाद कर रहा है। हालांकि आतंकियों पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ संसाधन उपलब्ध हैं, पर खतरा बढ़ता जा रहा है और उसे काबू में करने की क्षमता कम हो रही है।
Thursday, September 29, 2011
Monday, September 26, 2011
धमकी के बाद छावनी में बदला चारबाग रेलवे स्टेशन
सोमवार दोपहर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चारबाग स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 4, 5, 6 और 7 को उड़ाने की धमकी के बाद पुलिस व प्रशासन की नींद उड़ गई। आनन-फानन में स्टेशन पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कुछ देर में अपर पुलिस महानिदेशक (रेलवे) एके जैन भी स्टेशन पहुंच गए। एडीजी की मौजूदगी में सभी प्लेटफार्मो व पार्सल घर की सघन जांच की गई। स्टेशन उड़ाने की धमकी सोमवार को एक निजी चैनल को ई-मेल पर दी गई। चैनल ने इसकी जानकारी एडीजी रेलवे को दी जिसके बाद रेलवे पुलिस (जीआरपी) व रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने चारबाग स्टेशन की जांच शुरू कर दी। जांच में बम निरोधी और डॉग स्क्वायड भी शामिल था। पार्सल घर से लेकर प्लेटफार्म 4,5,6,7 व सब-वे सहित सभी ट्रेनों की जांच की गई। एडीजी एके जैन ने बताया कि धमकी मिलने के बाद चारबाग स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। स्टेशन पर सतर्कता वैसे ही रहती है लेकिन धमकी के मद्देनजर विशेष रूप से जांच की गई। इस दौरान स्टेशन पर आने वाले संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई। वेंडर-कुलियों को भी सतर्क कर दिया गया और संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखने पर उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है। जांच में एसपी जीआरपी, कमांडेंट आरपीएफ सहित भारी संख्या में पुलिस बल के जवान शामिल थे। लखनऊ से ही भेजा गया ई-मेल विशेष पुलिस महानिदेशक बृजलाल के मुताबिक धमकी भरा ई-मेल भेजने वाली तलाश में एटीएस को लगाया गया है। जांच में सामने आया है कि ई-मेल लखनऊ के ही एक संस्थान से भेजा गया था। जल्द ही ई-मेल भेजने वाले को पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके पहले ऊंचाहार स्टेशन को उड़ाने की धमकी भी मेल के जरिये दी गई थी। वहां पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था
भुल्लर पर अकाली दल लाएगा माफी प्रस्ताव
विधानसभा चुनाव की दस्तक के बीच खालिस्तानी आतंकी प्रो. देविंदर पाल सिंह भुल्लर को फांसी की सजा से माफी फिर से एक चुनावी मुद्दा बन गई है और सत्तारूढ़ अकाली दल और कांग्रेस के बीच राजनीति तेज हो गई है। राष्ट्रपति की ओर से भुल्लर की दया याचिका भले ही खारिज हो चुकी हो, लेकिन राजनीति के लिए वह एक मोहरा बन गया है। चुनावी माहौल में राज्य सरकार ने विधानसभा के आगामी सत्र में भुल्लर की सजा माफी के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा और अकाली दल की नीयत पर सवाल खड़ा कर दिया है। मालूम हो कि इस मुद्दे पर अकाली दल को भाजपा से मदद नहीं मिलेगी। ऐसे में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कांग्रेस से मदद मांगने की बात कही थी। मगर कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी उलटी फांस लगा दी। कैप्टन ने आरोप लगाया कि अकाली-भाजपा सरकार ने अदालत में शपथ देकर भुल्लर को पक्का अपराधी और खतरनाक आतंकवादी बताया था। ऐसे में अकाली दल राजनीतिक स्टंट कर रहा है। दरअसल भुल्लर का जो भी हो, फिलहाल अकाली दल और कांग्रेस में यह होड़ मची है कि चुनाव के वक्त वह भुल्लर की ज्यादा हमदर्द दिखे। पंजाब विधानसभा में अकाली दल के 49 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 43 विधायक। 117 सदस्यीय विधानसभा में यह प्रस्ताव पारित कराने के लिए अकाली दल को 60 विधायकों की जरूरत होगी। यही वजह है कि भाजपा से मिले जवाब के बाद अकाली दल कांग्रेस से मदद की उम्मीद लगा रहा था
अमेरिका के सख्त तेवर देख पाकिस्तान के होश उड़े
अमेरिका- पाकिस्तान के बीच चल रही तकरार अब टकराव का रूप लेती जा रही है। अफगान तालिबान के सबसे सशक्त गुट हक्कानी नेटवर्क को आइएसआइ का हिस्सा बताने के बाद अमेरिका ने कहा कि उसने सभी विकल्प खुले रखे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रबानी खार ने पलटवार करते हुए कहा कि हक्कानी गुट को पैदा करने वाला अमेरिका है, इसलिए वह दूसरों पर जिम्मेदारी न थोपे। इससे पहले पाकिस्तानी सेना के कोर कमांडर ग्रुप की बैठक हुई जिसमें हक्कानी गुट पर कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया गया। सेनाध्यक्ष अश्फाक परवेज कयानी के नेतृत्व में हुई बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि हक्कानी गुट पर कार्रवाई के लिए अमेरिकी दबाव का वह खुलकर विरोध करेंगे। जानकारों ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका के तेवरों से इस बार पाकिस्तान के होश गुम हैं। आइएसआइ के निदेशक अहमद शुजा पाशा का सऊदी अरब रवाना होना और पाक सेनाप्रमुख कयानी का ब्रिटेन दौरा रद होना इसी ओर इशारा करते हैं। समझा जा रहा है कि हक्कानी नेटवर्क को आइएसआइ की मदद संबंधी अमेरिकी आरोपों से पैदा हुए टकराव को दूर करने के लिए शुजा पाशा सऊदी अरब गए हैं। सऊदी अरब अमेरिका-पाकिस्तान के बीच पुल की तरह है। वह दोनों देशों का अभिन्न मित्र है और पहले भी कई मामालों की मध्यस्थता कर चुका है। इससे पहले अल जजीरा के साथ साक्षात्कार में विदेश मंत्री खार ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि अफगानिस्तान के काबुल में अमेरिकी दूतावास और वदाक प्रांत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर इस महीने हुए हमले में पाकिस्तान की आइएसआइ ने हक्कानी नेटवर्क को मदद दी थी। खार ने दो टूक कहा, यदि हम संपर्को की बात करते हैं तो मैं आश्वस्त हूं कि दुनियाभर में सीआइए भी कई आतंकवादी संगठनों से संपर्क हैं। जिस नेटवर्क की अमेरिका इन दिनों बात कर रहा है, वह कई सालों तक सीआइए का दुलारा बना हुआ था। कयानी के नेतृत्व में छह घंटे हुई कमांडरों की बैठक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से लिखा कि कमांडरों ने उत्तर वजीरिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की अमेरिकी मांग का विरोध करने का निर्णय किया है। बैठक में अमेरिका द्वारा पाकिस्तानी सीमा में एकतरफा कार्रवाई के संभावित परिणाम पर भी चर्चा की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस निर्णय से दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो सकते हैं। पाक सैन्य अधिकारी ने कहा, अमेरिका को पहले ही बताया जा चुका है कि पाकिस्तान जो कुछ कर चुका है, उसके दायरे से और आगे वह नहीं जा सकता। हालांकि समाचारपत्र डॉन ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कोर कमांडरों की बैठक सबसे पहले रविवार को हुई जिसमें परिस्थिति पर काबू पाने की जरूरत पर सहमति जताई गई। एक सूत्र के हवाले से अखबार ने लिखा कि यह बैठक छुट्टी के दिन हुई जिससे पता चलता है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लगातार आरोप लगाने से उत्पन्न संकट की गंभीरता कितनी है। सूत्र ने कहा, तनाव में वृद्धि हानिकारक है। लागत लाभ विश्लेषण के लिहाज से लगता है कि मुकाबले से कोई लाभ नहीं है। डॉन ने लिखा है, ऐसा नहीं लगता कि अमेरिकी दबाव में सेना हक्कानी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई पर सहमत हो गई है। रविवार को छह घंटे चली बैठक के बारे में सेना की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हिना को वापस बुलाने के बाद गिलानी का यू-टर्न आतंकी नेटवर्क के सफाए पर अमेरिकी चेतावनी से झल्लाने के बाद विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार को न्यूयॉर्क से वापस बुलाने की घोषणा करने वाले प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने यू-टर्न ले लिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 66वें अधिवेशन में हिस्सा लेने गई रब्बानी अब दौरा पूरा करने के बाद ही पाकिस्तान लौटेंगीं। प्रधानमंत्री आवास के अधिकारियों ने इससे पहले बताया था कि विदेश मंत्री तत्काल लौट आएंगी। विदेश विभाग के अधिकारियों ने बाद में साफ किया कि हिना महासभा में भाषण देने के बाद वापस आएंगी। पाकिस्तान को अब एक विकल्प चुनना होगा अमेरिका के प्रमुख सीनेटरों में लिंडसे ग्राहम ने फॉक्स न्यूज से कहा, यदि पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय नीति के तहत आतंकवाद को समर्थन बरकरार रखता है तो हमारे पास सभी विकल्प खुले हैं। पाक को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह वक्त उसके लिए विकल्प चुनने का है। उन्होंने कहा कि रक्षामंत्री लियोन पेनेटा और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ्स के चेयरमैन एडमिरल माइक मुलेन सहित पेंटागन के शीर्ष रक्षा अधिकारी सही कह रहे हैं कि आइएसआइ-हक्कानी गुट को मदद दे रहा है। सर्वदलीय बैठक में पाक सेना व धर्मगुरु भी होंगे हक्कानी गुट पर कार्रवाई को लेकर इस्लामाबाद-वाशिंगटन के बिगड़ते रिश्तों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में पाकिस्तानी की सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा बैठक में विभिन्न धार्मिक समूहों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। न्यूयॉर्क में यूएन सम्मेलन से लौट रहीं विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार सर्वदलीय बैठक में वाशिंगटन-इस्लामाबाद संबंधों पर जानकारी देंगी। अमेरिका ने अफगानिस्तान में 13 सितंबर को हुए आतंकवादी हमले के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आइएसआइ) और हक्कानी नेटवर्क के गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका के उक्त आरोपों के मद्देनजर गिलानी ने सर्वदलीय बैठक के मद्देनजर अवामी मुस्लिम लीग के शेख राशिद, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कैद के चौधरी शुजात हुसैन, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नवाज शरीफ और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के अल्ताफ हुसैन से बातचीत की है। अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ्स के चेयरमैन एडमिरल माइक मुलेन ने पाकिस्तान पर हक्कानी नेटवर्क को समर्थन देने का आरोप लगाया। हक्कानी नेटवर्क को आईएसआई का वास्तविक हथियार बताते हुए उन्होंने अफगानिस्तान में 11 अगस्त को ट्रक बम हमले और 13 अगस्त को काबुल में अमेरिकी दूतावास के बाहर हुए हमले के लिए हक्कानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उसे आइएसआइ ने मदद दी। वाशिंगटन-इस्लामाबाद के संबंध दो मई को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिका द्वारा अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के बाद से ही तनावपूर्ण हैं। दूसरी बार पाक राष्ट्रपति बनने की तैयारी में जरदारी पाकिस्तान में 2013 के आम चुनावों में सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) बहुमत हासिल नहीं भी कर पाए, तो भी आसिफ अली जरदारी के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं प्रबल दिख रही हैं। समाचार पत्र एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने जरदारी के करीबी सूत्र के हवाले से लिखा है, उन्हें हालांकि सुनिश्चित करना होगा कि एक सौ सदस्यीय उच्च सदन सीनेट के आधे से अधिक सीटों के चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगले साल मार्च में हो जाएं। सूत्रों का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव होते हैं तो जरदारी को एक और कार्यकाल मिल सकता है। अफगानिस्तान ने पाक सेना को चेतावनी दी काबुल : अफगानिस्तान के रक्षा अधिकारियों ने पाकिस्तान को देश के पूर्वोत्तर में रॉकेट दागने और भारी गोलाबारी नहीं रोकने पर जवाबी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है। अफगान रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी सेना पर पिछले पांच दिनों में 300 से अधिक गोला और रॉकेट कुनार एवं नूरिस्तान प्रांतों में दागने का आरोप लगाया। यह इलाका कट्टरपंथी संगठनों के लिए पनाहगाह है। अमेरिका नीत गठबंधन सेना का इस क्षेत्र में कम प्रभाव है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी सरजमीं से हो रहे गोलाबारी से अनगिनत संख्या में अफगान मारे गए हैं। कई मकान और मस्जिद नष्ट हो गए हैं तथा सैकड़ों लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। बहरहाल, पाकिस्तान की ओर से इस पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है
Friday, September 23, 2011
कल भाषण देंगे मनमोहन, आतंकवाद पर रहेगा जोर
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार सुबह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह आतंकवाद, आर्थिक मंदी, पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में अस्थिरता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर जोर देंगे। प्रधानमंत्री महासभा के अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार को न्यूयार्क पहुंचे। प्रधानमंत्री की पांच दिनों की यात्रा में उनके साथ विदेश मंत्री एसएम कृष्णा, उनके प्रधान सचिव टीकेए नायर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और विदेश सचिव रंजन मथाई भी हैं। संयुक्त राष्ट्र की बैठक से इतर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईरान, दक्षिणी सूडान और श्रीलंका के राष्ट्रपतियों एवं जापान तथा नेपाल के प्रधानमंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे। मनमोहन सिंह अपने सम्बोधन में संयुक्त राष्ट्र में सुधार का मुद्दा भी उठाएंगे। इस दौरान वह 19 वर्षो के अंतराल पर भारत को सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुने जाने के बाद से अपने देश की भूमिका के बारे में भी बताएंगे। संयुक्त राष्ट्र के लिए रवाना होने से पहले नई दिल्ली में अपनी पांच दिवसीय यात्रा के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा, सभी देशों के लिए यह पहले से कहीं ज्यादा आवश्यक है कि वे इन चुनौतियों से निपटने के लिए कदम उठाएं। यह समय संयुक्त राष्ट्र के लिए अपनी वैश्विक भूमिका निभाने का है। उन्होंने कहा, इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा का अधिवेशन ऐसे वक्त में हो रहा है जब दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर है। पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका तथा खाड़ी देशों में अस्थिरता है। फलस्तीन का मुद्दा अब भी अनसुलझा है। साथ ही आतंकवाद और समुद्री लुटेरे भी विभिन्न देशों के समक्ष मुश्किलें पैदा कर रहे हैं
Wednesday, September 21, 2011
आतंकवाद वैश्विक समुदाय के खिलाफ युद्ध के समान
आतंकवाद को वैश्रि्वक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि हरदीप पुरी ने कहा है कि आतंकवादियों और उनके नेटवर्क को उजागर करने के लिए प्रयास तेज किए जाने चाहिए। साथ ही उन्हें पनाह देने वाले सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करना चाहिए। पुरी संयुक्त राष्ट्र की काउंटर टेरोरिज्म कमेटी के भी अध्यक्ष हैं। उन्होंने इसी कमेटी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कही। उन्होंने कहा, आतंकवादी आज न सिर्फ पुरी दुनिया में फैल चुके हैं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के खिलाफ एक युद्ध की तरह हैं। आतंकवादियों की भर्ती दुनिया के किसी एक देश में होती है, धन किसी दूसरे देश में एकत्र किया जाता है और वे तीसरे देश में जाकर हमलों की साजिश रचते हैं। उन्होंने कहा,आतंकवादियों के पास वैश्विक स्तर के साजो-सामान हैं और उन्होंने दुनिया भर में वित्तीय लेन-देन की व्यवस्था विकसित कर ली है। वे ताजा और अत्याधुनिक तकनीकों को इस्तेमाल करते हैं। वे एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में अपनी गतिविधियां संचालित करने में सक्षम हैं
आइएम के संदिग्ध आतंकी की पुलिस हिरासत बढ़ी
मुंबई की एक अदालत ने जाली मुद्रा मामले में गिरफ्तार इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के संदिग्ध सदस्य असरार अहमद अब्दुल हामिद टेलर की पुलिस हिरासत 23 सितंबर तक बढ़ा दी। उसकी हिरासत तब बढ़ाई गई जब एटीएस ने कहा कि वह उसके संदिग्ध आतंकी संबंधों की जांच करना चाहती है। जांच एजेंसी ने कहा कि वह टेलर से पूछताछ करना चाहती है कि क्या उसके पास से मिला धन आतंकवादी हमले के लिए था। एटीएस ने जब उसे गिरफ्तार किया था तो उसके पास से एक-एक हजार रुपये के 30 जाली नोट बरामद किए थे। एटीएस ने मंगलवार को टेलर को मडगांव की मजिस्ट्रेट अदालत के न्यायाधीश एम पी बागे के समक्ष पेश किया, जिन्होंने उसे 23 सितंबर तक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले, टेलर के साथी हारून राशिद अब्दुल हामिद नाइक को अदालत ने इसी मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा था। नाइक भी इंडियन मुजाहिदीन का संदिग्ध सदस्य है।
आरोपी जावेद अहमद खान का बयान है अहम सबूत
नई दिल्ली पंद्रह साल पहले लाजपत नगर मार्केट में किए गए धमाकों के मामले में सजा पाए आरोपियों की तरफ से हाई कोर्ट में दायर अपील पर मंगलवार से अंतिम जिरह शुरू हो गई। बुधवार को भी जिरह जारी रहेगी। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति जीपी मित्तल की अदालत में सरकारी वकील पवन शर्मा ने एक आरोपी जावेद अहमद खान के बयान को आधार बनाते हुए कहा कि सभी आरोपियों को ठीक सजा दी गई है और अभियोजन पक्ष अपना आरोप साबित करने में कामयाब रहा है। पवन शर्मा ने कहा कि जावेद को अहमदाबाद के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे एक ब्लास्ट के मामले में जयपुर लाया गया। वहां मजिस्ट्रेट के सामने उसने स्वीकार किया था कि उन्होंने लाजपत नगर ब्लास्ट किया है। इसी बयान को निचली अदालत ने भी फैसले का आधार बनाया है। इतना ही नहीं ब्लास्ट के प्रयोग की गई कार निजामुद्दीन से चोरी की गई थी और आरोपी घटना से दो दिन पूर्व भी लाजपत नगर मार्केट में ब्लास्ट के इरादे से गए थे, परंतु कामयाब नहीं हो पाए। फांसी की सजा पाए तीनों आरोपियों को एक दुकानदार ने पहचाना था और बताया था कि यही दो दिन पहले गाड़ी खड़ी करने आए थे। इतना ही नहीं जिन फोन नंबरों से मीडिया को फोन करके ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली गई थी, वे फोन आरोपी फारूक अहमद खान व फरीदा डार प्रयोग कर रहे थे। इसी के जरिए इस मामले का खुलासा हुआ था
Tuesday, September 20, 2011
फोरेंसिक लैब नहीं पहुंचे विस्फोट सैंपल
आगरा यह पुलिस का दोष है, या फोरेंसिक लैब का या फिर सिस्टम का? बम विस्फोट के 48 घंटे बाद भी पुलिस की ओर से जांच के लिए भेजे जाने वाले सैंपल फोरेंसिक लैब नहीं पहुंचे हैं। प्रदेश में बम विस्फोट जांचने वाली आगरा की एक मात्र फोरेंसिक लैब अब तक कॉटन स्वॉब से लिए गए सैंपल की ही जांच कर सकी है। इसी आधार पर बम धमाके में देसी सामग्री का प्रयोग घोषित कर दिया गया। बाइपास स्थित जय हास्पिटल में शनिवार शाम 5:32 बजे जोरदार धमाका हुआ था। मौके पर पहुंचे फोरेंसिक लैब के डिप्टी डायरेक्टर एक्सप्लोसिव डॉ. संतोष कुमार के नेतृत्व में टीम रुई में विस्फोट के सैंपल ले गई थी। अगले दिन रविवार को लैब बंद थी। मगर डीजीपी और डीजी स्पेशल का दौरा तय हो गया। दोपहर 12:00 बजे तक आनन-फानन में कॉटन स्वॉब के सैंपल के प्राथमिक रासायनिक परीक्षण हुए। इसके आधार पर पुलिस ने फाइनल खुलासा कर दिया कि बम देसी मैटेरियल से बनाया गया था। यानी यह धमाका उसी तरह के बम से था, जो कि त्योहार के लिए बनाए जाते हैं। रविवार दोपहर लगभग 1:00 बजे एनएसजी और एनआइए की टीम की जांच खत्म होने के बाद आगरा की फील्ड यूनिट घटनास्थल के सैंपल लेकर चली गई थी। इसके बाद उन्हें अब तक परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया। तो दोगुना क्यों हुआ इनाम? एक तरफ सरकार की रिपोर्ट कहती है कि अस्पताल में धमाका आपसी प्रतिद्वंद्विता के चलते हुआ। वहीं फोरेंसिक रिपोर्ट में बम की सामग्री देसी निकली। रविवार दोपहर को डीजी स्पेशल ने खुलासे के बाद अचानक बम धमाका करने वाले के सुराग देने वाले को इनाम की रकम 50 हजार से बढ़ाकर सीधे एक लाख कर दी। जब बम धमाका साधारण था तो अचानक इनाम क्यों बढ़ाया गया? बाकी है अभी बहुत परीक्षण : जानकारों के मुताबिक धमाके के सैंपल के फिजिकल और केमिकल एनालिसिस की कई प्रक्रियाएं होती हैं। आशंका यह भी है कि विस्फोट में नाइट्रेट भी पाया जा सकता है, जो गंभीर विस्फोटक की श्रेणी में आता है। यह रिपोर्ट कब तक तैयार होगी, यह कोई नहीं बता पा रहा है
मच्छर की तरह होते हैं आतंकी
महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि आतंकवादी मच्छर की तरह हैं, जिन्हें मारना या नियंत्रित करना कठिन है। शहरी आतंकवाद विषय पर राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों के एक सम्मेलन के दौरान महाराष्ट्र के अधिकारी ने यह टिप्पणी की। उनकी इस टिप्पणी ने सम्मेलन में आए सभी अधिकारियों को हंसने पर मजबूर कर दिया। उक्त अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, सात शेरों को मारना आसान है, लेकिन आतंकियों को मारना या पकड़ना मच्छर से निपटने जैसा है, जहां सफलता दर बहुत कम है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन इंटेलीजेंस ब्यूरो ने किया था। अधिकारी ने खुफिया एजेंसियों के हालिया अलर्ट का जिक्र करते हुए कहा, हमें दस आतंकियों के मुंबई में घुसने की सूचना मिली थी, लेकिन उन्हें खोज निकालना घास के ढेर में सुई ढूंढने जैसा है। आतंकियों की तुलना
Monday, September 19, 2011
कश्मीरी नेताओं का मिजाज
एक सप्ताह के अंतराल में नेशनल कांफ्रेंस के सबसे महत्वपूर्ण नेता ने दो बयान दिए। पहला बयान संसद पर आतंकी हमले के दोषी मोहम्मद अफजल के प्रति नरमी बरतने की मांग और इसके लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा प्रस्ताव पास करने की कल्पना पर था। इससे प्रेरित होकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में एक विधायक वैसा प्रस्ताव ला भी चुका है। दूसरे बयान में दिल्ली हाईकोर्ट विस्फोट का दोषी सुरक्षा एजेंसियों को ठहराया गया है कि उनकी लापरवाही से यह हुआ। इन बयानों से कश्मीरी मुस्लिम नेताओं की मानसिकता स्पष्ट हो जाती है। जिस मोहम्मद अफजल के पक्ष में कश्मीरी नेता सुरक्षा बलों के विरुद्ध बंद, जुलूस आयोजित करते रहते हैं वह एक दोषसिद्ध आतंकवादी है। वह यहां तक कह चुका है कि उसे अपने किए का कोई पछतावा नहीं और मौका मिला तो वह फिर यही करेगा। इन दो बयानों का अर्थ यह है कि मुस्लिमों, विशेषकर कश्मीरी मुस्लिमों के जघन्य से जघन्य अपराध का कोई नोटिस न लिया जाए। यह है कश्मीरी मुस्लिम मानसिकता, क्योंकि नेशनल कांफ्रेंस उसी की उदार प्रतिनिधि है। यदि उदार चिंतन ऐसा है तो बाकी कश्मीरी नेताओं के मिजाज का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। इस विशेषाधिकारी मानसिकता को समझे बिना कश्मीर पर सम्यक नीति नहीं बन सकती। विस्थापित कश्मीरी कवि कुंदनलाल चौधरी की एक कविता माई क्लीनिक एट छोटा बाजार में इस मानसिकता की झलक मिलती है कि कैसे 1980 के दशक के अंत में कश्मीर से हिंदुओं को मार भगाने की नीति सफल हुई। तब राज्य प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए पीडि़त हिंदुओं की ओर से ही माफी मांगने की नीति पर चल रहा था। भारत के जो नीति-निर्माता, पत्रकार और बुद्धिजीवी कश्मीरी जनता की उचित शिकायतों का रोना रोते या विकास आदि की चिंता करते हैं उनके लिए इस प्रसंग में गहरी सीख है। कश्मीरी मुस्लिमों को किसी विकास से मतलब नहीं है। इसी बड़े नेता ने कुछ महीने पहले ही यह बयान भी दिया था कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षा केवल विकास, अच्छा प्रशासन और आर्थिक लाभों से नहीं संतुष्ट हो सकती। उसे एक राजनीतिक समाधान चाहिए। अत: कश्मीरियों को आर्थिक, प्रशासनिक गड़बड़ी आदि की समस्या नहीं है। लंबे समय से शेष भारत द्वारा उन्हें निरंतर दिया जा रहा अति-उदार आर्थिक अनुदान और विविध विशेष सुविधाओं का पूरा ढेर उनके लिए पर्याप्त नहीं है। तब उन्हें क्या चाहिए? इसका जवाब है-अधिक स्वायत्तता। जान पड़ता है कि उन्हें कितना भी विशेष अधिकार दे दिया जाए, वे हमेशा यही कहेंगे कि उन्हें इच्छित स्वायत्तता हासिल नहीं है। यद्यपि वे कभी नहीं बताते कि भारतीय संविधान की किस धारा से उनकी किसी भी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक या राजनीतिक इच्छा पर बाधा आती है? तब और स्वायत्तता के लिए उन्हें क्या चाहिए? इसका संकेत देते हुए उक्त नेता ने अपने उसी बयान में आगे कहा था, मैं स्वायत्तता से भी आगे बढ़ने से नहीं कतराता, यदि कोई और समाधान भारत और पाकिस्तान, दोनों को मंजूर हो तथा जम्मू और कश्मीर के लोगों की आकांक्षा के अनुरूप हो। यह कुछ विचित्र है। इसमें एक असंभव बात रखी गई है। पाकिस्तान कश्मीर को हड़पना चाहता है। क्या यही कश्मीरियों की आकांक्षा है? बिलकुल नहीं! वे पाकिस्तान का अंग होने का अर्थ अच्छी तरह जानते हैं। पिछले दो-तीन दशक के पाकिस्तान-अफगानिस्तान के जिहादी अनुभव से स्पष्ट है कि पाकिस्तान का अंग बनते ही कश्मीर को कंधार की तरह उजाड़ होने में अधिक देर नहीं लगेगी। इसीलिए यूरोपीय एजेंसियों द्वारा कराए गए विभिन्न जनमत-संग्रहों में यह बात सामने आई है कि कश्मीरी जनता पाकिस्तान में मिलना नहीं चाहती। हुर्रियत तथा आतंकवादी गिरोहों से जुड़े कुछ कश्मीरी ही पाकिस्तान से मिलना चाहते हैं। चाहे कश्मीरी मुसलमान पाकिस्तान के साथ मिलना नहीं चाहते, पर वे भारत पर धौंस जमाना चाहते हैं कि उनके पास विकल्प है। इस प्रकार, एक स्थायी शिकायती मुद्रा अपना कर वे भारत का अधिकाधिक दोहन करते रहना चाहते हैं। इसी कारण जब कश्मीर में अधिक समय तक शांति रहती है तो स्वयं कश्मीरी नेताओं को चिंता होने लगती है! किसी न किसी बहाने वे माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। नेशनल कांफ्रेंस या पीडीपी के बयानों, क्रियाकलापों को इस रूप में भी देखना चाहिए। और स्वायत्तता, जनमत-संग्रह या दोहरी संप्रभुता जैसे शिगूफे इसीलिए छोड़े जाते हैं। अभी अफजल को सजामुक्त करने का शिगूफा उसी की नई कड़ी है। संभवत: कश्मीर में थोड़ी-बहुत अशांति बने रहना कश्मीरी मुस्लिम नेताओं को अपनी राजनीतिक जरूरत लगती है। ताकि वे सुरक्षा बलों पर आरोप लगाते रह सकें, ताकि वे नई दिल्ली से मनमानी मांग कर सकें, ताकि स्वयं उनसे कोई किसी बात का हिसाब न मांगे-न स्थानीय जनता, न शेष भारत। जम्मू और लद्दाख कश्मीरी मुसलमानों की अहंमन्यता और शोषण का शिकार रहे हैं। ये भारत का पूर्ण अंग बन कर रहना चाहते हैं। अत: इन क्षेत्रों को स्वायत्त क्षेत्र या केंद्र शासित प्रदेश बनाकर कश्मीर में एक बड़े वर्ग द्वारा दिखाई जा रही अहंमन्यता और लूट पर लगाम लगाई जा सकती है। (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं
ड्रोन का मलबा लेकर भागे आतंकियों की पाक के सुरक्षाबलों से मुठभेड़
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का दावा आतंकियों ने मार गिराया ड्रोन इस्लामाबाद, एजेंसी : पाकिस्तान के दक्षिण वजीरिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए उड़ा अमेरिका का चालक रहित खुफिया विमान ड्रोन रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दूसरी ओर तालिबान ने दावा किया है कि ड्रोन विमान दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ है बल्कि उसने इसे मार गिराया है। हालांकि इस बात की पुष्टि अमेरिकी अधिकारियों की ओर से नहीं की गई है। समाचार पत्र द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त ड्रोन विमान का मलबा जैसे ही जमीन पर गिरा वहां पर तालिबान लड़ाकों का जमावड़ा लग गया। इसके बाद आतंकी विमान का मलबा लेकर जाने लगे, लेकिन पाक सुरक्षाबलों ने तेजी दिखाते हुए तत्काल एक टुकड़ी घटनास्थल भेजी और मलबा हासिल करने के लिए अभियान शुरू किया। दोनों ओर से हुई फायरिंग में दो आतंकियों की मौत हो गई और दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। सैन्य प्रवक्ता हालांकि यह बात कह रहे हैं कि उन्होंने मलबा हासिल कर लिया है, लेकिन इस बारे में अभी अधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की गई है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआइए) द्वारा संचालित ड्रोन विमान दक्षिण वजीरिस्तान के जंगारा गांव में दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। इस इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) लंबे वक्त से सक्रिय हैं। टीटीपी के प्रवक्ता एहसानुल्ला अहसान ने दावा किया कि इस विमान को उनके लड़ाकों ने मार गिराया है। दूसरी ओर सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन तकनीकी खराबी की वजह से हादसे का शिकार हो गया है। विमान का मलबा सुरक्षाबलों ने बरामद किया है। अमेरिकी ड्रोन उत्तर और दक्षिण वजीरिस्तान के कबाइली इलाकों में नियमित उड़ान भरते हैं। बीते चार वर्षो में ड्रोन ने सैकड़ों मिसाइलें दागी हैं। पाकिस्तान इन हमलों का विरोध करता रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञ चिंतित दो मई को एबटाबाद में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिकी नेवी सील्स कमांडोज ने जब कार्रवाई की थी उस दौरान अमेरिका का अति आधुनिक हेलीकॉप्टर स्टील्थ दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हेलीकॉप्टर का मलबा अमेरिकी कमांडोज वहीं पर छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद द न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी कि पाकिस्तान ने चीन को स्टील्थ हेलीकॉप्टर का मलबा भेजा जिससे उसे इसकी तकनीक समझने में मदद मिली। अब ड्रोन का मलबा पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के हाथ लग गया है। पाक सरकार लंबे समय से अमेरिका से ड्रोन की मांग कर रही है। दूसरी ओर चीन सहित दुनियाभर के देश ड्रोन जैसा विमान बनाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। विशेष तौर पर चीन की सेना इसे हासिल करने के लिए दिन-रात एक किए हुए है। परेशानी की बात यह भी है कि अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते भी इन दिनों पटरी से उतरे हुए हैं। अब ड्रोन का मलबा अमेरिका को कितने दिनों में हासिल होगा यह देखने वाली बात होगी
अफजल अब भी हैरान क्यों नहीं फटा कार बम
संसद हमले में फांसी की सजा पाए कश्मीरी आतंकी मोहम्मद अफजल को यह सवाल आज भी हैरान करता है कि 13 दिसंबर 2001 को संसद हमले में प्रयुक्त कार में रखे बम में धमाका क्यों नहीं हुआ। तिहाड़ जेल नंबर 3 के अधीक्षक मनोज द्विवेदी ने 180 पन्नों के अपने दस्तावेज में यह खुलासा किया है। द्विवेदी के मुताबिक, अफजल ने उन्हें कथित तौर पर बताया था, उन्होंने बमों-विस्फोटकों से लदी कार को हमले की पूर्ववर्ती रात पुलिस के सामने इस डर से खड़ा किया कि इसे चोरी किया जा सकता है। हैरानी की बात है कि किसी पुलिसकर्मी ने इसकी जांच नहीं की। उन्हें (आतंकियों) पूरा भरोसा था कि जिस कार में आईईडी लगाया गया है, उसमें धमाका होगा। अफजल का कहना था कि हमले में सफलता मिल जाती तो वे जम्मू कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाते और सरकार से बातचीत करते। द्विवेदी के मुताबिक, उन्होंने छह अध्याय वाला यह दस्तावेज मार्च 2009 से दिसंबर 2010 के बीच अफजल के साथ हुई 200 घंटे की बातचीत के बाद तैयार किया है। पहला अध्याय हमले की सारी बातें बयां करता है। कैसे साजिश रची गई, विस्फोटक, आरडीएक्स, ग्रेनेड तथा चीनी पिस्तौल और अन्य चीजें जुटाईं। किस तरह संसद के मुआयने के लिए उन आतंकियों के दिल्ली में रहने का बंदोबस्त किया जो हिंदुस्तानी नहीं थे और भारतीय भाषाएं नहीं समझते थे। दस्तावेज में अफजल के बचपन व उसके पाक पहुंचने और आतंकी प्रशिक्षण लेने की वजहों का भी जिक्र है। द्विवेदी के मुताबिक, अफजल का कहना था कि भारत लौटने के बाद उसे लगा कि उसे इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए वह सामान्य जीवन जीने लगा। एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई के साथ ही अफजल ने आइएएस परीक्षा की भी तैयारी की। किताब में अफजल के फिर से राष्ट्र विरोधी तत्वों की ओर लौटने के कारण भी गिनाए गए हैं। इसमें लिखा है कि अफजल की काफी पीढि़यों पहले उसका परिवार ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखता था जिसने इस्लाम अपनाया था। द्विवेदी को तिहाड़ के अधिकारियों ने यह दस्तावेज पुस्तक के तौर पर प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी
बटला हाउस एनकाउंटर के तीन साल पूरे, पुलिस चौकस
नई दिल्ली जामिया नगर के बटला हाउस इलाके में आतंकियों के साथ हुए पुलिस मुठभेड़ को सोमवार को तीन साल पूरे हो जाएंगे। आज भी वहां के लोग उस दिन की घटना को भूल नहीं पाए हैं। उस घटना को लेकर राजधानी में पुलिस चौकसी बढ़ा दी गई है। सभी महत्वपूर्ण स्थानों खासतौर पर बटला हाउस इलाके पर पुलिस की खासी नजर है। पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता कई दिनों से जिले में घूम-घूम कर पुलिस को सजग व चौकस रहने के निर्देश दे रहे हैं। घटना के तीन साल बीत जाने के बावजूद वहां के लोग इससे उबर नहीं पाए हैं। लोगों में इस बात का खासा रोष है कि उन्हें भी शक की नजरों से देखा जाने लगा है। इस मसले पर एल-18 में रहने वाले लोग तो कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। ज्ञात रहे राजधानी में 13 सितंबर 2008 को करोलबाग, बाराखंभा रोड समेत पांच स्थानों पर हुए बम धमाकों के छह दिन बाद 19 सितंबर को स्पेशल सेल की आतंकियों के साथ यहीं पर मुठभेड़ हुई थी। सेल को सूचना मिली थी कि सीरियल ब्लास्ट के आतंकी एल-18 में ठहरे हुए हैं। सूचना के आधार पर जांच के लिए स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की देखरेख में पुलिस एल-18 बाटला हाउस में पहुंची थी। आतंकियों ने माजरा भांप फ्लैट के अंदर से पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इसमें इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे। पुलिस की तरफ से चली गोलियों से आतंकी मो. आतिफ अमीन तथा साजिद मौके पर ही मार दिए गए थे
ब्लास्ट पीडि़तों के इलाज में लापरवाही, संक्रमण का खतरा
नई दिल्ली हाई कोर्ट बम ब्लास्ट में घायल लोगों के इलाज में लापरवाही शुरू हो गई है! अपनों के घायल होने का दर्द झेल रहे परिजनों के अनुसार नर्सिग केयर में लगा स्टाफ काम में लापरवाही कर रहा है। घायलों को न ही समय पर दवाएं मिल रही हैं और न ही मरहम-पट्टी समय पर हो रही है। बम ब्लास्ट में घायल होने वाले 11 लोग आरएमएल अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से एक ही हालत गंभीर है और वह पुरानी बिल्डिंग के आइसीयू में हंै। छह मरीज रिकवरी रूम तथा चार ऑथोपेडिक वार्ड में हैं। अब तक इस बम ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। एक पैर गवां चुके 55 वर्षीय मदन मोहन शर्मा आइसीयू में हैं। उनकी पत्नी रेखा शर्मा कहती हैं कि डॉक्टर तो अच्छा इलाज कर रहे हैं, लेकिन नर्सिग केयर अच्छी तरह से नहीं मिल रहा है। हम काफी परेशान हैं और डर सता रहा है कि कहीं फिर से संक्रमण न हो जाए। संक्रमण के चलते ही मदन मोहन का एक पैर काटा जा चुका है। बाएं पैर में भी चोट पहुंची है और कमर का हिस्सा जल गया है। इसलिए हम चाहते हैं कि हमारे मरीज को भी आरएमएल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती किया जाए। डॉक्टरों के अनुसार मदन मोहन के ब्लड में संक्रमण का डर बना हुआ है। हालांकि कई अन्य लोग भी स्टाफ के व्यवहार से परेशान हैं। मगर परेशानी कहीं और न बढ़ जाए इसलिए सामने आकर बोलने को तैयार नहीं हैं। जिन मरीजों की स्थिति में सुधार हो रहा है उनमें तेजेंद्र सिंह, राधेश्याम, के पी शर्मा, मुकेश अरोड़ा, हरीश, राशिद अली हैं। इन्हें रिकवरी रूम में रखा गया है। तरुण यादव, किशन कुमार अरोड़ा, नितिन और प्रमोद अभी भी ऑर्थोपेडिक वार्ड में हैं। 1अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर सुनील सक्सेना के अनुसार सभी की स्थिति नियंत्रण में है। साफ्टवेयर इंजीनियर नितिन के शरीर में एक हजार से अधिक छर्रे लगे हैं। कई निकाले जा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत सारे छर्रे उनके शरीर में रह जाएंगे हालांकि इनसे उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी
अफजल को माफी के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होने देगी भाजपा
अफजल की फांसी माफी के प्रस्ताव पर विधानसभा में चर्चा को मंजूरी मिलने से भड़की भाजपा ने चेतावनी दी है कि पार्टी इस मुद्दे पर बहस नहीं होने देगी। पार्टी ने कहा है कि इस मुद्दे पर यदि हालात बिगड़े तो पूरी जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर होगी। दरअसल पार्टी इस वजह से ज्यादो खफा है कि अफजल के प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकृति मिल गई लेकिन गुलाम कश्मीर पर भाजपा के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। पार्टी मुख्यालय में रविवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भाजपा के चीफ व्हिप अशोक खजुरिया व मुख्य प्रवक्ता डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पार्टी उन कांग्रेस के मंत्रियों का पर्दाफाश करेगी जो इस मुद्दे पर चुप हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि अफजल की फांसी के मुद्दे पर कांग्रेस के मंत्री नेशनल कांफ्रेंस से मिले हुए हैं, इसीलिए निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद के विवादस्पद प्रस्ताव को विधानसभा में बहस के लिए लाने को मंजूरी मिली है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह आतंकवादी की फांसी को माफ करने के प्रस्ताव के समर्थन में हैं, या इसके खिलाफ हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार हर कीमत पर अलगाववादियों को खुश देखना चाहती है इसीलिए राज्य में भाजपा के उस प्रस्ताव को अस्वीकार किया गया है, जो 1994 में संसद में पारित हो चुका है
नाकामी की स्वीकारोक्ति
गृहमंत्री पी. चिदड्डबरम की यह स्वीकारोक्ति कि आतड्डकवाद को नियंत्रित करने के लिए सरकार उतना काम नहीं कर पाई जितना उसे करना चाहिए था, चिड्डतित और साथ ही सवाल खड़े करने वाली है। पहला सवाल यही उठेगा कि जब उनके साथ-साथ प्रधानमड्डत्री भी यह मान रहे हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा को आतड्डकवाद की चुनौती मिल रही है तब फिर उससे निपटने के लिए निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं? इसके पहले गृहमड्डत्री ने नक्सलियों को सबसे खतरनाक मानते हुए कहा था कि वे देश की अस्मिता के लिए खतरा बन गए हैं और उनकी हिंसा में कोई कमी नहीं आई है। बावजूद इसके उनका यह भी कहना था कि नक्सलवाद से निपटने की जिम्मेदारी मूलत: राज्यों की है। इस सबसे यही स्पष्ट होता है कि केंद्र और राज्य सरकारें न तो आतंकवाद से निपटने के लिए तैयार हैं और न ही नक्सलवाद से। इससे बड़ी शर्म की बात और कोई हो नहीं सकती कि इन दोनों खतरों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के स्थान पर मजबूरियों का रोना रोया जा रहा है। इसी कारण आतड्डकवाद के साथ-साथ नक्सलवाद भी बेकाबू हो रहा है। यह अच्छी बात है कि नक्सलवाद और आतड्डकवाद पर प्रधानमड्डत्री और गृहमड्डत्री एक स्वर में बात कर रहे हैं, लेकिन आखिर उनके वक्तव्यों में नया क्या है? ये दोनों खतरे नए नहीं हैं, लेकिन उन पर चिड्डता इस तरह जताई जा रही है जैसे उनके बारे में कुछ नए खुलासे अभी हुए हों? कहीं इसका कारण जनता का ध्यान महड्डगाई और भ्रष्टाचार से हटाना तो नहीं है? यह सड्डदेह इसलिए, क्योंकि सरकार महड्डगाई और भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रही है। यह जगजाहिर है कि नक्सलवाद ने देश के लगभग पूरे खनिज बहुल इलाकों को चपेट में ले लिया है। भारतीय गणतंत्र के खिलाफ विद्रोह पर उतारू नक्सली अपनी उस विचारधारा से पूरी तरह भटक चुके हैं जो आदिवासियों को न्याय दिलाने के नाम पर शुरू की गई थी। आज नक्सली सड्डगठन वन एवड्ड खनिज सड्डपदा पर कब्जा करने वाले माफिया बन गए हैं। नक्सलियों के इरादों से परिचित होते हुए भी राज्य सरकारें उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए तैयार नहीं और अब केंद्र सरकार उनके समक्ष खुद को असहाय सा दिखा रही है। नक्सली अपनी पैठ लगातार मजबूत करते जा रहे हैं। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने ऐसे कोई कानून नहीं बनाए हैं जिनसे उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जा सके। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनजातियों के विकास के लिए जो तमाम योजनाएं बनाई गई हैं वे नक्सलवाद की कमर नहीं तोड़ पा रही हैं। केंद्र के पास इस सवाल का जवाब नहीं कि पाबड्डदी के बावजूद नक्सली संगठन क्यों ताकतवर होते जा रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं नक्सली संगठन राजनीतिक दलों से मिलकर अपने को और मजबूत कर रहे हैं? यह आशड्डका इसलिए, क्योंकि दशकों के प्रयास के बावजूद नक्सली संगठनों का दबदबा कम होने का नाम नहीं ले रहा। चुनावों के समय नक्सली क्षेत्रों में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक दल अपने जो उम्मीदवार खड़े करते हैं उनमें से अनेक नक्सलियों का समर्थन पाने की कोशिश में रहते हैं। तमाम स्थानीय राजनेता तो नक्सलियों से गुपचुप गठजोड़ भी कर लेते हैं। इस सबसे शीर्ष पर बैठे राजनेता अनजान नहीं हो सकते, लेकिन वे आंखें बंद किए हुए हैं। यह ठीक नहीं कि जो स्थानीय राजनेता नक्सलियों से नरमी बरत रहे हैं उनसे ही यह कहा जाए कि वे नक्सली क्षेत्रों की जनता का दिलोदिमाग जीतने की कोशिश करें। इस तरह के सुझावों से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं, क्योंकि उन पर अमल की सड्डभावना नहीं दिखती। ऐसे सुझाव तो नक्सलियों के दुस्साहस को और बढ़ाएड्डगे ही। आड्डतरिक सुरक्षा के समक्ष मौजूद दूसरे सबसे बड़े खतरे अर्थात आतड्डकवाद के मामले में भी यह स्पष्ट है कि राज्य और केंद्र अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए तैयार नहीं। मुड्डबई और फिर दिल्ली में आतड्डकी हमले से यह स्पष्ट है कि घरेलू आतड्डकी सड्डगठनों ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। पिछले दिनों ऐसे ही एक सड्डगठन इड्डडियन मुजाहिदीन को अमेरिका ने वैश्विक आतड्डकी सड्डगठन का हिस्सा मानते हुए उस पर प्रतिबड्डध लगाया और यह भी कहा कि उसके सड्डबड्डध पाकिस्तान से हैं। अमेरिका की मानें तो इड्डडियन मुजाहिदीन ने 2008 में मुड्डबई में हुए आतड्डकी हमले के दौरान लश्करे तैयबा को मदद दी थी। भारत सरकार ऐसा मानने से इड्डकार करती रही है। अमेरिकी प्रशासन का यह भी निष्कर्ष है कि लश्करे तैयबा, जैशे मुहम्मद, हुजी की तरह इड्डडियन मुजाहिदीन का भी मकसद गैर मुसलमानों पर हमले कर दहशत फैलाना और दक्षिण एशिया में एक कट्टर इस्लामी राष्ट्र का निर्माण करना है। जब यह स्पष्ट है कि इड्डडियन मुजाहिदीन का मकसद वही है जो दक्षिण एशिया और विशेष रूप से पाकिस्तान के जेहादी सड्डगठनों का है तब फिर इस धारणा का कोई मतलब नहीं कि यह देसी आतड्डकी संगठन अपनी गतिविधियों के जरिये मुसलमानों के साथ हो रहे कथित अन्याय का बदला ले रहा है अथवा उसका उद्देश्य हिड्डदुओं-मुसलमानों के बीच बैर बढ़ाना भर है। फिलहाल यह सामने आना शेष है कि अमेरिका की तरह भारत सरकार भी इड्डडियन मुजाहिदीन को लश्कर, जैश और हुजी जैसा खतरनाक सड्डगठन मानने के लिए तैयार है या नहीं? भारत सरकार इड्डडियन मुजाहिदीन को चाहे जिस नजर से देखे, यह ठीक नहीं कि दिल्ली विस्फोट के बाद जब अमेरिका ने इड्डडियन मुजाहिदीन और लश्कर की साठगाड्डठ उजागर की तब प्रधानमड्डत्री ने यह स्वीकारा कि सीमा पार आतड्डकी सड्डगठन फिर सक्रिय हो रहे हैं और हमारी सुरक्षा एजेंसियाड्ड पर्याप्त सक्षम नहीं। केंद्र सरकार ने यकायक जिस तरह आतड्डकवाद और नक्सलवाद के बेकाबू होते जाने के कारण गिनाने शुरू कर दिए हैं वह कुछ वैसा ही है जैसे महड्डगाई और भ्रष्टाचार को लेकर यह कहा जाने लगता है कि इनसे निपटने के लिए उसके पास जादू की छड़ी नहीं। यह निराशाजनक है कि केंद्र सरकार न केवल शुतरमुर्गी रवैया अपना रही है, बल्कि अपनी असफलता छिपाने के लिए आम जनता का ध्यान भटकाने का भी काम कर रही है। यदि आतड्डकवाद और नक्सलवाद पर काबू पाना है तो केंद्र और राज्यों को वोट बैंक की राजनीति से परे हटकर कुछ कठोर निर्णय लेने होंगे। वोट बैंक की राजनीति को आगे रखकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं हो सकती। यह वोट बैंक की राजनीति ही है जिसके चलते आतड्डकवाद और नक्सलवाद से निपटने के तरीकों पर आम सहमति कायम नहीं हो पा रही है। यदि आतड्डकवाद और नक्सलवाद पर काबू नहीं पाया जा सका तो आड्डतरिक सुरक्षा का परिदृश्य बिगड़ने के साथ ही देश की अड्डतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित होगी। इस सबका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा और विदेशी पूड्डजी निवेश पर भी। आड्डतरिक सुरक्षा पर ढिलाई बरतने से भारत का हाल वैसा ही हो सकता है जैसा पाकिस्तान का वहाड्ड के आतड्डकी सड्डगठनों ने कर रखा है।
विस्फोट की जांच के लिए एनएसजी टीम आगरा रवाना
: आगरा के अस्पताल में हुए बम धमाके को केंद्रीय गृह मंत्रालय ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहा है और उत्तर प्रदेश के आतंकरोधी दस्ते (एटीएस) को मामले की जांच करने को कह दिया गया है। वैसे धमाके में प्रयोग किए विस्फोटक और उसके तरीके की पड़ताल के लिए एनएसजी की एक टीम को आगरा भेज दिया गया है। फिलहाल एनआइए की टीम को घटनास्थल पर भेजे जाने की कोई सूचना नहीं है। गृह सचिव आरके सिंह ने स्वीकार किया कि प्रारंभिक जांच में विस्फोट में आइईडी (परिष्कृत विस्फोटक) के इस्तेमाल की सूचना है। उनके अनुसार घटनास्थल से बैटरी और तार के टुकड़े भी मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि धमाके के लिए टाइमर या फिर रिमोट का इस्तेमाल किया गया होगा। पर विस्फोट के तरीके और उसमें इस्तेमाल किए गए विस्फोटक के बारे एनएसजी की फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा। आतंकी कार्रवाई नहीं : बृजलाल लखनऊ, जागरण ब्यूरो : उत्तर प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) बृजलाल ने कहा कि आगरा के निजी अस्पताल में हुआ विस्फोट आतंकी कार्रवाई नहीं है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि अभी तक की पड़ताल में ऐसा कुछ भी नहीं मिला है, जिससे धमाके में आतंकियों का हाथ होने की बात कही जा सके। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि वहां पर इसे किसने रखा था। मौके से टिफिन के टुकड़े, बैटरी और तार बरामद हुए हैं। टाइमर के जरिये यह विस्फोट तो नहीं किया गया, इसकी पड़ताल की जा रही है। पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर पुलिस सक्रियता बढ़ा दी गई है। सभी पुलिस कप्तानों को कहा गया कि वह वाहनों की चेकिंग कराने के साथ मॉल, सिनेमाहॉल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड तथा जिले के महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करें। पर्यटन पर ग्रहण : आगरा में अस्पताल में हुए बम धमाके ने ताजनगरी के पर्यटन उद्योग को भी डरा दिया है। मुंबई बम धमाके के बाद धीमी पड़ी पैकेज टूर बुकिंग की रफ्तार हाल में ही सामान्य हो पाई थी। अब धमाके के बाद पूरा सीजन बर्बाद होने की आशंका खड़ी हो गई है। ताजनगरी में टूरिस्ट सीजन अक्टूबर से लेकर मार्च तक माना जाता है। अधिकांश विदेशी सैलानी अपने पैकेज टूर जुलाई से सितंबर तक बुक करा लेते हैं। परंतु धमाकों के बाद अब सीजन के लिए होने वाली बुकिंग न होने का खतरा खड़ा हो गया है
दिल्ली विस्फोट का सूत्रधार पकड़ से बाहर
जागरण संवाददाता दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर 7 सितंबर को हुए बम विस्फोट का सूत्रधार अभी भी पुलिस व एनआइए टीम की पकड़ से बाहर है। हालांकि, गिरफ्तार किए गए तीनों विद्यार्थियों से पूछताछ अभी भी जारी है। विस्फोट के बाद किश्तवाड़ के ग्लोबल साइबर कैफे से हुजी के नाम से विस्फोट की जिम्मेदारी लेने वाला ईमेल भेजने के आरोपी दो विद्यार्थियों के साथ तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कहा जा रहा है कि आमिर अब्बास देव ने दोनों विद्यार्थियों को ईमेल करने के लिए मैटर उपलब्ध कराया था। एनआइए तथा पुलिस ने ग्लोबल साइबर कैफे से मेल भेजने के आरोप में शारिक अहमद व आबिद हुसैन नामक दो विद्यार्थियों को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के बाद आमिर अब्बास को गिरफ्तार किया गया था। आमिर ने पुलिस को जो सूचनाएं दीं वह पुलिस तथा एनआइए तक ही महफूज है। जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार, पुलिस मुख्यालय में शारीक, आबीद और आमिर से एनआइए तथा पुलिस के आला अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। बताते हैं कि पूछताछ का सिलसिला देर रात 3:00 बजे तक चलता रहता है। लेकिन, इन तीनों के सिवाय न ही कोई और गिरफ्तारी हुई है और न ही इस मामले में किसी तरह की कोई महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी मिल रही है। हालांकि, इस मामले की जांच कर रही एनआइए टीम के मुखिया डीआइजी मुकेश सिंह, एसएसपी रैंक का एक अधिकारी और इनकी टीम के कुछ और सदस्य अभी भी किश्तवाड़ में डेरा डाले हुए हैं। डोडा, रामबन, किश्तवाड़ रेंज के डीआइजी मनीष कुमार सिन्हा भी पिछले दस दिनों से किश्तवाड़ में ही कैंप कर रहे हैं। पहले यह कहा जा रहा था कि ई-मेल करने वाले का पता चलने पर बम ब्लास्ट की गुत्थी आसानी से सुलझ जाएगी, लेकिन अभी तक बम विस्फोट करने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है
आतंकियों ने अपहरण कर सीआरपीएफ जवान का गला काटा
पुलवामा में आतंकियों ने सीआरपीएफ में भर्ती हुए अपने एक पुराने साथी का अपहरण कर गला काटकर उसकी हत्या कर दी। वहीं, कुपवाड़ा जिले के रंगवार इलाके में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के हथियारों का जखीरा बरामद किया है। शनिवार सुबह पुलवामा जिले के नांबलन जंगल में स्थानीय लोगों ने एक युवक का गला कटा शव देखने पर पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया। शव की पहचान की गई तो वह निकटवर्ती गांव के नजीर अहमद के बेटे इरशाद अहमद कूल्ले की थी। आतंकियों ने तीन दिन पहले ही उसे अपने घर की तरफ जाते हुए अगवा किया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इरशाद अहमद पहले एक सक्रिय आतंकी था। बंदूक और आतंकवाद से मोह भंग होने पर उसने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद वह एक विशेष भर्ती अभियान के तहत सीआरपीएफ में भर्ती हो गया और 181वीं वाहिनी का हिस्सा बना
हाई कोर्ट विस्फोट में 15वीं मौत
नई दिल्ली रतन लाल की मौत के साथ ही सात सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर हुए बम धमाके में मरने वालों की संख्या 15 हो गई है। मॉडल टाउन में रहने वाले रतन लाल (64) ने शनिवार सुबह करीब आठ बजे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ दिया। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दस दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ते हुए आखिर शनिवार को वह जिंदगी से हार गए। दस दिन तक अस्पताल में रहे रतन लाल के शरीर में लगातार संक्रमण फैल रहा था जिसके कारण उन्होंने शनिवार को दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु की सूचना मिलते ही मॉडल टाउन के महेंद्रू एंक्लेव स्थित सी-38 गली नंबर-तीन में मातम फैल गया। कपड़े के कमीशन एजेंट रतनलाल सराफ पिछले कुछ माह से महेंद्रू एंक्लेव में परिवार सहित रहते थे। उनकी पत्नी दीपा, तीन पुत्रियां सुमन, संगीता और रचना हैं। तीनों शादीशुदा हैं। 22 वर्षीय पुत्र दीपक कुरूक्षेत्र विश्र्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन फाइनल इयर में बीटेक कर रहा है। शनिवार दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर जैसे ही उनके शव को उनके निवास स्थान पर लाया गया पूरी गली में मातम छा गया। पड़ोसियों को विश्र्वास ही नहीं हो रहा था कि हरदम खुशमिजाज और हंसमुख रतनलाल अब उनके बीच नहीं रहे
अफजल की माफी के प्रस्ताव पर होगी चर्चा
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में संसद हमले के दोषी अफजल की फांसी की माफी के प्रस्ताव पर चर्चा को हरी झंडी मिल गई है। इसका फैसला शनिवार सुबह 11 बजे सचिवालय में निकाले गए लॉटरी ड्रॉ से तय हुआ है। विधानसभा की नियमावली के नियम 26 व 28 के अनुरूप विधानसभा में तैनात सफाईकर्मियों ने संबंधित प्रस्तावों की लॉटरी निकाली गई। लॉटरी के आधार पर सात प्रस्तावों का चयन हुआ। 26 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले सत्र में अफजल के प्रस्ताव पर 28 सितंबर को चर्चा होगी। कुल 21 प्रस्तावों में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के अलावा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, भाजपा, पैंथर्स पार्टी का एक-एक और निर्दलीय विधायकों के दो प्रस्ताव आगामी सत्र की कार्यवाही में लाए जाएंगे। अलबत्ता, माकपा का एक भी प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ है। राज्य विधानसभा सचिव मुहम्मद रमजान ने दैनिक जागरण को बताया कि लंगेट के निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद का अफजल की फांसी की सजा माफी का प्रस्ताव विधानसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष मुहम्मद अकबर लोन द्वारा गुलाम कश्मीर के प्रस्ताव पर चर्चा की मंजूरी नहीं देने से भाजपा को करारा झटका लगा है। भाजपा ने गुलाम कश्मीर को पाक के कब्जे से मुक्त कराकर दोबारा राज्य का हिस्सा बनाने और इसके लिए केंद्र पर दबाव बनाने के प्रस्ताव पर विधानसभा सत्र में चर्चा की मांग की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के इस प्रस्ताव को विधानसभा की नियमावली के नियम 179 के तहत खारिज कर दिया है। यह प्रस्ताव भाजपा विधायक अशोक खजूरिया ने 9 सितंबर को दाखिल किया था। खजूरिया ने बताया कि उन्हें इस संदर्भ में विधानसभा सचिवालय से लिखित सूचना मिली है
आगरा के अस्पताल में विस्फोट, छह घायल
आगरा आगरा मथुरा हाइवे स्थित जय हॉस्पिटल में शनिवार शाम हुए बम विस्फोट से शहर में दहशत फैल गई। धमाका इतना जबर्दस्त था कि अस्पताल की लोहे की बेंच उखड़ गई। खिड़कियों के शीशे कई फीट दूर गिरे। चारों ओर काला धुआं फैल गया। ब्लास्ट में एक डॉक्टर समेत आधा दर्जन से अधिक तीमारदार घायल हुए हैं। एटीएस और बम डिस्पोजल स्क्वायड द्वारा मौके से नौ बोल्ट की बैटरी व सर्किट बरामद किए जाने से आतंकी वारदात की आशंका पुख्ता हो गई है। शहर में अलर्ट जारी करके के साथ ही रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, सिनेमाघरों और सार्वजनिक स्थलों पर चेकिंग शुरू हो गई है। घटना शाम लगभग 5.32 मिनट की है। अस्पताल में प्रतीक्षालय में अचानक जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद चीख-पुकार के बीच भगदड़ मच गई और कुछ ही क्षणों में अस्पताल खाली हो गया। आसपास की कॉलोनियों के लोग भी धमाके की आवाज सुनकर घरों से बाहर निकल आए। सड़क पर लोगों की भीड़ जमा हो जाने से यातायात थम सा गया। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन के आला अफसर मिलिट्री इंटेलीजेंस और बम डिस्पोजल स्क्वायड टीम के साथ अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल की खिड़की पर स्टील के दो टिफिन मिले। इसके चलते आशंका जताई जा रही थी कि बम टिफिन बॉक्स में रखा गया होगा। डीआइजी असीम अरुण ने बताया कि जांच एजेंसियां काम कर रही हैं। विस्फोटक गंभीर प्रकृति का था। शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। इस घटना के बाद सैन्य क्षेत्रों और उनके नजदीक सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। सैन्य परिसरों के नजदीक अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। मथुरा रिफाइनरी पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री कुंवर जितेंद्र सिंह रविवार को विस्फोट स्थल का दौरा करेंगे। (पेज-5 भी देखें
Saturday, September 17, 2011
आतंक का नया ठिकाना कराची
पाकिस्तान के हालात 100 प्रतिशत सही होने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं देती। आत्मघाती हमलों की खबरें पहले फलस्तीन और श्रीलंका से आती थीं। तब यह सोचा जाता था कि कैसे लोग दूसरों को मारने के लिए अपनी जान भी गंवा देते हैं। अब आत्मघाती हमले पाकिस्तान में आम बात हो चुके हैं। पाकिस्तान के हालात ऐसे बिगड़े कि लोगों की सोच भी बदल गई और जो बात वे किसी अन्य से समझना चाहते थे वह खुद ही समझ गए। जनता आत्मघाती हमलों की आदी हो चुकी है। अब तो बात इन आत्मघाती हमलों से काफी आगे निकल चुकी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कोई कभी भी किसी की जान ले सकता है। जब चाहे किसी को पकड़ो, अपहरण करो और गला काटकर शव को बोरे में बंद कर किसी वीरान जगह पर छोड़ दो। पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर कराची गुजरे दो दशकों से बोरे में बंद लाशों के शहर से जाना जाता है। शहर में कोई नागरिक ग़ायब हो जाता है तो लोग रास्ते पर बोरा तलाश करते हैं कि शव इसमें से ही मिलना है। इस वक्त टारगेटेड मर्डर का दौर है। कोई इन घटनाओं को पूछने वाला नहीं है। अगर कोई रंगे हाथों पकड़ा भी गया तो वह भी छूट जाता है। पाकिस्तान के कानून में हत्यारे को रिहाई दिलाने की पूरी व्यवस्था है। कई हत्यारे अदालतों से आजाद हुए और उन्होंने फिर दर्जनों खून किए। सरकार इन हत्यारों के पीछे खड़ी होती है और यह सब कई सालों से होता चला आ रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर में हजारों आतंकवादी और हत्यारे इस तरह रिहाई पा चुके हैं। पाकिस्तान के प्रांत सिंध की राजधानी कराची में 1977 की तानाशाही के बाद कभी भी हालात अच्छे नहीं रहे। वहां बढ़ते आतंकवाद और टारगेटेड मर्डर को बंद करने की कोशिश ही नहीं की जाती। हिंसा की वजह से गृहमंत्री रहमान मलिक पर देश दुश्मनी का आरोप भी लग चुका है। यह आरोप किसी और ने नहीं, सिंध के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ नेता ज़ुल्फिकार मिर्जा ने लगाया है। पाकिस्तान में जिन मुद्दों पर चर्चा है उनमें कराची का आतंकवाद, सिंध में आई बरसात की तबाही, ज़ुल्फिकार मिर्जा का उपरोक्त बयान शामिल है। कराची को देश का आर्थिक केंद्र भी कहा जाता है। इस शहर में कई सालों से जो हिंसा जारी है उसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। पाकिस्तान की सबसे बड़े अदालत में कराची में जारी आतंकवाद और लक्षित हत्याओं का मुकदमा भी चल रहा है। सरकार की ओर से दी गई रिपोर्ट में अदालत को बताया गया है कि केवल एक महीने में देश के सबसे बड़े शहर में 600 लोगों की हत्या की जा चुकी है, जिसमें 500 लोगों की घात लगाकर हत्या की गई है। यह भी सरकारी रिपोर्ट है कि कराची में कई क्षेत्रों को निषिद्ध क्षेत्र बनाया गया है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को भी जाने की अनुमति नहीं। कराची में जितने गैर कानूनी हथियार हैं उतने बाकी पूरे देश में नहीं होंगे। 20 लाख लोगों का मुकाबला करने के लिए 3 लाख लोगों को एक साल के अंदर हथियारों के लाइसेंस दिए गए हैं। कराची पर माफिया का राज है। अब तो लोग इस शहर को दूसरा दुबई कहते हैं और सारी दुनिया में यहां से आपरेशन चलता रहा है। सच तो ये है कि पाकिस्तान की सरकार माफिया तत्वों के आगे बंधक बन कर रह गई है। कराची में माफिया तत्व एक तानाशाह की मेहरबानी से पले-बढ़े। यह सैनिक तानाशाह जनरल जिया अल हक का 1980 का दौर था जब उन्होंने अपने खिलाफ़ सिंध प्रांत में चलते आंदोलन को रोकने के लिए प्रांत में रहने वाले लोगों का न केवल बंटवारा कर दिया, बल्कि एक ऐसा समूह खड़ा कर दिया जिसके कारण आज हालात बिगड़े हुए हैं। पाकिस्तान में एक बात हमेशा कही जाती है कि देश की कोई भी सियासी पार्टी ऐसी नहीं जिसका संबंध सेना से जुड़ा न हो। देश की कई सियासी पार्टियां ऐसी हैं जिनको सेना के केंद्रों अथवा मुख्यालय में बनाया गया है। एक तानाशाह जब अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है तो उसको वह काम करने से भी कोई नहीं रोक सकता जिससे देश की जड़ें खोखली होकर रह जाएं और पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर को जिस पार्टी ने बंधक बना रखा है वह भी जनरल जिया ने बनाई। फिर जनरल मुशर्रफ ने उसका इतना समर्थन किया कि आज किसी के नियंत्रण में कुछ नहीं रहा। अब तो हालत यह है कि देश के सैनिक प्रमुख खुद आकर कराची में बैठक लगाते हैं, लेकिन हालात कंट्रोल नहीं होते। पाकिस्तान का सबसे बड़ा बंदरगाह कराची में है। अब यह सामने आया है कि उस बंदरगाह से करीब 40 हजार कंटेनर गायब हो चुके हैं। आरोप है कि हथियार और दूसरी चीजों से भरे ये कंटेनर चोरी करवाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में बताया गया है कि करीब इतने कंटेनर पोर्ट से निकले, लेकिन वे अफगान सीमा पर पहुंचने से पहले गायब हो गए हैं। कराची की बिगड़ती हालत पर पाकिस्तान की सेना को भी चिंता है, सेना बार-बार बैठकें कर यह चेतावनी दे चुकी है कि सरकार हालत बेहतर करे, लेकिन इसी सेना के पूर्व प्रमुख मुशर्रफ की मेहरबानी से कराची के हालात हाथ से निकलते जा रहे हैं। इसलिए अगर कल सेना कराची में आई तो फिर उसको कोई निकाल नहीं सकता। यही कारण है कि सरकार में बैठी पार्टी का विचार है कि कोई और राह निकाली जाए ताकि सेना पाकिस्तान के बड़े शहर में न आ सके। (लेखक पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हैं
प्रतिबंधित सूची में डालने से नहीं रुकेगा आतंक
इंडियन मुजाहिदीन के अमेरिका की प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल होना भारत के लिए सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से अहम है। इससे उसके आतंकी मंसूबों को कुचलने में कोई सफलता नहीं मिलेगी। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इंडियन मुजाहिदीन पर अमेरिकी प्रतिबंध से उसके आतंकी हमले करने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अमेरिकी प्रतिबंध के बाद कोई भी संगठन अमेरिका में कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता है। उसके बैंक खाते सील कर दिए जाते हैं और उससे जुड़े लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाता है। पर उक्त संगठन पहले ही ऐसा कुछ भी नहीं कर रहा है। पूरी तरह भारत में पनपे आतंकियों के एक ढीले-ढाले संगठन के रूप में इंडियन मुजाहिदीन का लश्कर-ए-तैयबा से संबंध जरूर है। लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि लश्कर पहले से ही अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित है। एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन को आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए अधिक पैसे की जरूरत भी नहीं है। उसने बहुत कम संसाधनों का इस्तेमाल कर अब तक के सभी आतंकी हमलों को सफलता से अंजाम दिया है। यह धन उसे भारत में आइएसआइ के नकली नोटों के सप्लाई नेटवर्क से आसानी से मिल जाता है। उनके अनुसार पूरी तरह भारत की धरती पर पनपे इस आतंकी संगठन से हमें खुद ही निपटना होगा
आइएम की औकात आंक रहीं खुफिया एजेंसियां
लखनऊ अमेरिका द्वारा इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) को आतंकी संगठन करार दिए जाने के बाद खुफिया एजेंसियां उसकी हैसियत आंकने में जुट गई हैं। पूर्व की घटनाओं को ध्यान में रखकर एटीएस और आइबी की टीमें सभी संदिग्ध ठिकानों पर निगाह लगाये हैं और निरंतर जांच-पड़ताल जारी है। सिमी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसके मुखौटे के तौर पर आइएम का नाम उभरा। जांच एजेंसियों की मानें तो पूरे देश में इस संगठन के सदस्यों ने अपनी करतूतों के निशान छोड़े हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आइएम की तस्वीर 2008 के जयपुर, अहमदाबाद और दिल्ली धमाकों के बाद उभरी, लेकिन सूबे में 2007 में ही आइएम के सदस्य अपनी करतूत दिखा चुके थे। 22 मई 2007 को गोरखपुर का सीरियल ब्लास्ट और फिर 23 नवंबर 2007 को वाराणसी, फैजाबाद और लखनऊ की कचहरियों में हुए ब्लास्ट का आरोप आइएम पर है। विभिन्न धमाकों में गिरफ्तार अबू बशर, शहजाद, सलमान उर्फ छोटू, आरिफ, सैफ, तारिक समेत कई ऐसे नाम हैं, जिन पर जयपुर, अहमदाबाद और दिल्ली के विस्फोट के साथ यूपी की कचहरियों में विस्फोट के आरोप हैं। जांच एजेंसी ने इन विस्फोटों का तार जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के सज्जादुर्रहमान से भी जोड़ा है, लेकिन लखनऊ विस्फोट के मामले में अदालत ने उसे बरी कर दिया। 19 दिसंबर 2008 को दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ कांड के बाद आजमगढ़ जिले के संजरपुर का नाम उभरा, जहां के आठ परिवारों के नौ लड़कों की भूमिका सामने आई। जयपुर, लखनऊ समेत कई जेलों में बंद आइएम के कई सदस्य इसी गांव के हैं। जहां तक सिमी के चेहरे पर आइएम के मुखौटे की बात है तो सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि सिमी की स्थापना में आजमगढ़ के शाहिद बद्र, मध्य प्रदेश के सफदर नागौरी और अजीज खान की प्रमुख भूमिका रही, इसलिए इन स्थानों के ज्यादातर लोग सिमी पर प्रतिबंध के बाद आइएम के बैनर तले सक्रिय हो गए। जांच एजेंसियां आइएम नेटवर्क में अहमदाबाद, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तर प्रदेश के तार जोड़ती हैं। आइएम के टारगेट के तहत अयोध्या फैसले के दौरान लखनऊ में जज और वकीलों की रेकी करने अहमदाबाद से शेख मुजीब और उज्जैन से मोहम्मद असलम आया था, जिसे मध्य प्रदेश में जून में गिरफ्तार किया गया। इनके अलावा सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद कार्रवाई के दौरान फरार बहराइच के खलीक और याहिया के महाराष्ट्र में सक्रिय होने की बात भी सामने आई, जिनसे दिल्ली में पूछताछ चल रही है। आइएम की सक्रियता से इतर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि सात दिसंबर 2010 को वाराणसी और 14 अक्टूबर 2010 के कानपुर विस्फोट का आज तक राजफाश नहीं हो सका है। अगर इसमें आइएम की भूमिका है तो उसके और किन सक्रिय सदस्यों ने इस घटना को अंजाम दिया और अगर आइएम सक्रिय नहीं है तो फिर सूबे में और कितने संगठन सक्रिय हैं? इस सवाल का भी किसी के पास जवाब नहीं है। सूबे के विशेष पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था बृजलाल का कहना है कि पूरे प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था चौकस है और देश के किसी भी विस्फोट का कोई कनेक्शन यूपी से नहीं है
हैदराबाद से भी जुड़े हैं दिल्ली धमाके के तार
नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट पर आतंकी हमले के तार अब हैदराबाद से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार हमले में शामिल कुछ आतंकियों के संबंध हैदराबाद से हैं। दूसरी ओर, किश्तवाड़ में हमले की जिम्मेदारी लेने वाले ईमेल का पेन ड्राइव दो स्कूली बच्चों को देने के आरोपी आमिर अब्बास देव को अदालत में सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मीडिया से संयम बरतने की अपील के दूसरे दिन एनआइए अधिकारी हाईकोर्ट हमले की जांच पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल इसकी गुत्थी सुलझाने के बावजूद एनआइए हाईकोर्ट में बम रखने वाले आतंकी तक पहुंचने से पहले इसका खुलासा नहीं करना चाहती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन आतंकियों की धरपकड़ के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरे देश में सक्रिय हैं। उनके अनुसार हमले की साजिश में शामिल कुछ आतंकियों के तार हैदराबाद से जुड़े होने के सबूत भी मिले हैं और एनआइए की टीम स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर उनकी तलाश कर रही है। वहीं जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में दो स्कूली बच्चों से ईमेल भिजवाने वाले आरोपी आमिर अब्बास देव को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। उससे पूछताछ में स्थानीय पुलिस की मदद के लिए एनआइए के डीआइजी स्तर के अधिकारी जम्मू-कश्मीर पहुंच गए हैं। इसे गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि हाईकोर्ट में बम विस्फोट के पहले ही इसने ईमेल तैयार कर लिया था और उसे दो स्कूली बच्चों को पेन ड्राइव में दे दिया था। विस्फोट के बाद इन बच्चों ने उसे दिल्ली स्थित मीडिया हाउस को ईमेल कर दिया था। ईमेल में हूजी की ओर से बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली गई थी
आतंकियों को नहीं रोक पा रहीं सुरक्षा एजेंसियां
नई दिल्ली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति को अनिश्चिततापूर्ण बताने के साथ ही गृहमंत्री पी.चिदंबरम की बात दोहराई है कि सुरक्षा एजेंसियों के पास नक्सलियों-आतंकियों से निपटने की क्षमता नहीं है। दिल्ली और मुंबई के ताजा हमलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी करार देते हुए प्रधानमंत्री ने आतंकियों की सुरागकशी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए हल्का सिपाही (बीट कांस्टेबल) प्रणाली की मजबूती पर बल दिया। मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशकों को संबोधित करते हुए कहा, देश में सुरक्षा का माहौल अनिश्चित बना हुआ है। न तो नक्सली हमलों में कमी आ रही और न ही सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों को रोकने में सफल हो पाई हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर में इस बार गर्मियां शांति से गुजर गईं, लेकिन खतरा बरकरार है। पाक में भारत विरोधी आतंकी प्रशिक्षण शिविर फिर शुरू हो गए हैं और आतंकियों की भारत में घुसपैठ के प्रयास हो रहे हैं। शांति प्रयासों को पटरी से उतारने की कोशिश हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियां इनसे दृढ़ता से निपटें। जम्मू-कश्मीर में सरकार के शांति प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने राज्य में सुरक्षा बलों की कमी की संभावना से इंकार किया। नक्सली हिंसा में कमी न आने पर चिंता जताते हुए पीएम ने कहा, सरकार प्रभावित जिलों में विकास योजनाओं के सहारे नक्सलियों को अलग-थलग करने का प्रयास कर रही है। इंडिया रिजर्व बटालियन नामक विशेष बल गठित किया जा रहा है। नया बल बनने के बाद विकास योजनाएं पूरी होंगी और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव दिखेगा। मनमोहन ने जांच व सुरक्षा एजेंसियों की अल्पसंख्यकों के प्रति पूर्वाग्रह दूर करने की जरूरत पर बल देते हुए पुलिस महानिदेशकों से कहा, इस सामान्य धारणा से पुलिस की छवि को झटका लगता है। उन्होंने साफ कहा, यह धारणा चाहे जिन भी कारणों से बनी हो, उन्हें दूर करने के जरूरी उपाय किए जाएं, क्योंकि बेहतर पुलिस साबित होने के लिए समाज के सभी वर्गो का विश्वास जीतना जरूरी है। ताजा आतंकी हमलों को रोकने और हमलावरों की गिरफ्तारी में सुरक्षा एजेंसियों की विफलता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने पुलिस महानिदेशकों से बीट कांस्टेबल प्रणाली दुरुस्त करने को कहा। इससे मानव आधारित असली खुफिया जानकारी जुटाने में सफलता मिलेगी। पूरे पुलिस बल में 87 फीसदी कांस्टेबलों की संख्या बताते हुए उन्होंने कहा, दुरूह और खतरों से भरा काम करने के बावजूद सिपाही आधारभूत सुविधाओं से वंचित हैं। प्रधानमंत्री ने कांस्टेबलों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत पर बल दिया
अफजल की सजा पर चर्चा का भविष्य तय करेगी लॉटरी
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पेश किए जाने वाले अफजल की माफी संबंधी प्रस्ताव व अन्य अहम बिलों पर बहस होगी या नहीं, यह सदन नहीं तय करेगा। शायद काफी कम लोगों को यह पता होगा कि विधायकों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर दाखिल किए गए प्रस्तावों और बिलों में से किस पर चर्चा होगी और किस पर नहीं, यह विधानसभा में लॉटरी निकालकर तय होता है और इसकी जिम्मेदारी किसी अशिक्षित कर्मी या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सौंपी जाती है। 26 सितंबर से शुरू हो रहे सत्र में अफजल के प्रस्ताव का भविष्य भी लॉटरी से तय होगा। इन प्रस्तावों में लंगेट के निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद द्वारा संसद हमले में फांसी की सजा पाए अफजल की माफी के प्रस्ताव से लेकर नेशनल कांफ्रेंस के विधायक मीर सैफुल्लाह द्वारा मारे गए आतंकियों के बच्चों के लिए आरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था का प्रस्ताव भी शामिल है। लेकिन सत्र में इन पर चर्चा लाटरी में इनके नाम निकलने पर ही होगी, अन्यथा नहीं। सत्र के लिए विभिन्न विधायकों द्वारा 39 प्रस्ताव भेजे गए थे। स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन ने सिर्फ 35 को ही स्वीकार किया है। पीडीपी महासचिव निजामदीन भट्ट ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। यह एक संवैधानिक प्रथा है, जो जम्मू-कश्मीर विधानसभा की नियमावली 26 और 28 के तहत चली आ रही है। उन्होंने कहा कि यह कोई तकनीकी काम नहीं है, सिर्फ पर्ची ही निकालनी है, इसलिए निम्न श्रेणी के कर्मचारी या किसी अशिक्षित कर्मी को यह जिम्मेदारी दी जाती है। वहीं लंगेट के विधायक इंजीनियर रशीद ने कहा कि लाटरी की प्रथा ठीक है। लेकिन अफजल का प्रस्ताव आम कश्मीरी अवाम की भावनाओं से जुड़ा है। उसकी सजा माफी कश्मीर में अमन बहाली की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है, इसलिए मेरे इस प्रस्ताव को लाटरी की प्रक्रिया से अलग रखते हुए सत्र की कार्रवाई में शामिल किया जाना चाहिए
Thursday, September 15, 2011
भारत के लिए इंडियन मुजाहिदीन बड़ा खतरा बनकर उभरा
मेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में ही सिर उठा रहा इस्लामी आतंकवाद भारत के लिए नया खतरा बन गया है। हालांकि नई दिल्ली इसे खुलेतौर स्वीकार करने में हिचकिचा रही है। सीआरएस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में इस तरह का प्रमुख संगठन इंडियन मुजाहिदीन है। इसमें कहा गया कि नई दिल्ली की इस तथ्य को खुले रूप से स्वीकार करने में अच्चि्छा के बावजूद भारत को भी अपने देश में पैदा इस्लामी आतंकवाद से खतरा है। सीआरएस ने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन के बारे में बड़े तौर पर माना जाता है कि यह स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) का नया रूप है और यह संगठन हाल में हुए कई विस्फोटों लिप्त पाया गया है जबकि सरकारी नेता इन घटनाओं के लिए लगातार पाकिस्तान को उकसाने वाला करार दे रहे हैं। रिपोर्ट में इंडियन मुजाहिदीन द्वारा कई धमाके किए जाने का जिक्र है। लेकिन धमाकों की जिम्मेदारी लेने के विश्वसनीय दावे नहीं मिले और भारतीय अधिकारियों ने संदिग्ध के तौर पर किसी विशेष विदेशी या घरेलू संगठन का नाम लेने से परहेज किया लेकिन ऐसा लगता है कि इस तरह के सुनियोजित विस्फोटों के लिए खास प्रशिक्षण की जरूरत रही होगी। रिपोर्ट में कहा गया कि शुरूआती संकेत ये हैं कि हमलावर पाकिस्तान स्थित संगठन के नहीं बल्कि भारत में ही स्थित हैं, शायद आइएम से जुड़े हैं। कुछ भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि आइएम के शीर्ष संचालक ज्यादातर सिमी से आए हैं और उन्हें पाकिस्तान में स्थित शिविरों में प्रशिक्षण मिलता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2008 में स्वीकार किया था कि आतंकवादी हमलों में स्थानीय तत्वों के शामिल होने से देश में ही पैदा आतंकवाद की समस्या में नया आयाम जुड़ गया है। सीआरएस ने कहा कि सिमी को अंतरराष्ट्रीय जेहादी आंदोलन के साथ जोड़कर देखा जा सकता है और यह संगठन अलकायदा के लक्ष्यों को अपनी मंजूरी देता है तथा इसके पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा, हरकत उल जेहादी इस्लामी जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से संपर्क हैं। इसमें कहा गया कि भारतीय मुस्लिम समुदाय लगातार सामाजिक भेदभाव का शिकार होता है और संभावना है कि इस समुदाय के कुछ सदस्य सिमी या आइएम में शामिल होने को लेकर संवेदनशील हों। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2008 में ही आतंकी घटनाओं में देसी तत्व होने की बात स्वीकार की थी। इसने देश में आतंकवाद की समस्या की ओर नया इशारा किया था
किश्तवाड़ में रची गई थी दिल्ली धमाके की साजिश!
किश्तवाड़ दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर हुए बम धमाके की जिम्मेदारी लेने के लिए हुजी के नाम से ईमेल भेजने वाले दो छात्रों को पुलिस ने किश्तवाड़ से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश करने के बाद पूछताछ के लिए सात दिन के रिमांड पर भी ले लिया है। जांच एजेंसियों ने पूरी संभावना जताई है कि दिल्ली धमाके की साजिश भी किश्तवाड़ में ही रची गई है। 7 सितंबर (बुधवार) को दिल्ली धमाके के बाद किश्तवाड़ के ग्लोबल साइबर कैफे से ईमेल करने वाले दो छात्रों शारीक अहमद भट पुत्र रफीक अहमद भट तथा आबिद हुसैन पुत्र अता उल्ला निवासी किश्तवाड़ को पुलिस ने दबोच लिया। बुधवार को जिला सेशन जज के कोर्ट में पेश कर दोनों को सात दिन की रिमांड पर भी ले लिया गया है। शारीक और आबिद ब्वायज हायर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ते हैं। दोनों को पुलिस ने दस सितंबर शनिवार शाम को हिरासत में लिया था। तभी से दोनों से पूछताछ चल रही थी। शारीक के पिता रफीक स्टेट फारेस्ट कॉरपोरेशन के मुलाजिम हैं। जबकि आबिद के पिता अता उल्ला डीसी दफ्तर में बतौर क्लर्क काम करते हैं। फिलहाल इस मामले में पुलिस कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। लेकिन सूत्रों के अनुसार इन दोनों के पीछे कोई शातिर दिमाग काम कर रहा है। उसी ने इन लड़कों को एक सीडी में मेल का कंटेंट देकर साइबर कैफे से मेल करने के लिए भेजा था। पुलिस ने कैफे के प्रबंधक अश्विनी की निशानदेही पर दोनों को गिरफ्तार किया। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने उक्त सीडी जब्त कर ली है और गत रविवार को उस सीडी को जांच के लिए कश्मीर भी भेजा गया था। जांच एजेंसियों ने यह संभावना भी जताई है कि दिल्ली धमाके की साजिश भी किश्तवाड़ में ही रची गई थी, जिसे इन दोनों आरोपियों के साथियों ने अंजाम दिया था। जानकारी यह भी मिली है कि ये लोग हुजी और इंडियन मुजाहिदीन के लिए काम करते थे। पूरी संभावना है कि दिल्ली से आई एनआइए की टीम इन दोनों लड़कों को किश्तवाड़ से अपने साथ ले जाए
आइएम ने दी फरीदाबाद में विस्फोट की धमकी
फरीदाबाद नगर निगम के आयुक्त कार्यालय में पहुंचे एक धमकी भरे पत्र में शहर के पांच प्रमुख स्थानों पर बम विस्फोट किए जाने की धमकी दी गई है। पत्र भेजने वाले ने अपनी पहचान आईएम के रूप में दर्शायी है। पत्र के अनुसार बीके अस्पताल, एस्कोटर्स अस्पताल, निगमायुक्त कार्यालय, जिला अदालत परिसर और ओल्ड रेलवे स्टेशन पर 15 सितंबर से 17 सितंबर तक सिलसिलेवार विस्फोट करने की धमकी दी गई है। पत्र के अनुसार नगर निगम भवन में 15 सितंबर, सेशन कोर्ट और ओल्ड रेलवे स्टेशन पर 16 सितंबर को जबकि बीके अस्पताल और एस्कोटर्स अस्पताल में 17 सितंबर को विस्फोट करने की धमकी दी है। पुलिस आयुक्त पीके अग्रवाल ने बताया कि यह धमकी भरा पत्र 13 सितंबर को नगर निगम आयुक्त कार्यालय में पहुंचा था। आयुक्त कार्यालय से उन्हें यह पत्र मिला है। इस पत्र को लिखने वाले ने अपनी पहचान आइएम के रूप में दर्शा रखी है। पत्र के मिलने के बाद मंगलवार देर शाम को ही सभी पुलिस अधिकारियों की बैठक ली गई थी। पुलिस अधिकारियों को पत्र से अवगत कराया गया और उपरोक्त पांचों स्थानों पर सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने की कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि पत्र में जिन स्थानों पर विस्फोट किए जाने की धमकी दी गई है, उनके विभागाध्यक्षों को इस संबंध में सूचना दे दी गई है। सुरक्षा के लिहाज से सभी स्थानों पर डाग स्कवायड, बम निरोधक दस्ते की टीम तैनात की गई है। ओल्ड रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा सिविल पुलिस भी तैनात की गई है। एस्कोटर्स अस्पताल में चप्पे पर नजर रखने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों को सतर्क रहने को कहा गया है। थाना कोतवाली प्रभारी और उनकी टीम सुरक्षा बिंदुओं का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। इसी तरह बादशाह खान अस्पताल, जिला अदालत परिसर और नगर निगम कार्यालय में भी सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए जा चुके हैं। पुलिस आयुक्त पीके अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले इस तरह के धमकी भरे पत्र मिले हैं। यह किसी सिरफिरे द्वारा की गई शरारत का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की अफवाहों से डरे नहीं लेकिन सतर्क जरूर रहें। प्रत्येक संदिग्ध वस्तु, व्यक्ति पर आम जनता स्वयं भी पैनी नजर रखें और संदेह होने पर तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दें। पुलिस की तरफ से सुरक्षा संबंधी सभी प्रकार के इंतजाम किए जा चुके हैं। श्री अग्रवाल ने बताया कि पत्र की विश्वसनीयता की जांच भी गहनता की जा रही है।
बम धमाकों से आजिज दिल्ली का दर्द समझे सरकार
नई दिल्ली बार-बार के बम धमाकों के बाद एक सप्ताह पहले दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर हुए ब्लास्ट के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार को कहा है कि पीडि़तों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए एक स्कीम बनाए। इस ब्लास्ट में 13 लोग मारे गए थे। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा व न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार से पूछा है कि वह बताए कि इन पीडि़तों के परिजनों को कितना मुआवजा दे रही है। इतना ही नहीं इस ब्लास्ट में घायल होने वाले के पुर्नवास के लिए क्या कदम उठाए जा रहे है। दोनों सरकार इस संबंध में अपना जवाब दायर करे। खंडपीठ ने कहा कि वह आशा करते है कि दोनों सरकार इस मामले पर मिलकर विचार करे और इसका हल निकालें। अदालत ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। इस याचिका में मांग की गई है कि दोनों सरकारों को निर्देश दिया जाए कि ब्लास्ट के पीडि़तों को उपयुक्त मुआवजा दिया जाए। साथ ही जो लोग घायल हुए है उनके इलाज का उचित खर्च दिया जाए। खंडपीठ ने कहा कि हमें पता है कि मृतकों के परिजनों को उनके जाने से जो परेशानी हुई है उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। परंतु उनके परिजन अच्छा जीवन जी पाए। दिल्ली सरकार को कहा है कि उन पीडि़तों की सूची सौंपी जाए जिनको मुआवजा दिया जा चुका है और जिनको अभी दिया जाना है। अदालत ने कहा कि सरकार को दिखाने के लिए ही संवेदनशील नहीं होना चाहिए बल्कि असल में संवेदनशीलता दिखानी भी चाहिए। इसलिए आशा करते है कि दोनों सरकार इस मामले में संवेदनशीलता से काम करेगी ताकि पीडि़तों के परिजनों को कुछ लाभ मिल सके। दिल्ली सरकार के वकील नजमी वजीरी ने बताया कि सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख व घायलों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए मुआवजा दे चुकी है। अदालत ने कहा कि वह इस संबंध में 21 सितंबर तक एक विस्तृत हलफनामा दायर करे। अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने यह याचिका दायर करते हुए कहा कि बार-बार ब्लास्ट की घटना होने के बावजूद भी सरकार इनको रोकने में असफल हो रही है। केंद्र सरकार,दिल्ली सरकार व उनके अधिकारियों की यह ड्यूटी बनती है कि आम आदमी को आतंकवादी हमलों से बचाए। इसलिए सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन सभी को सामाजिक सुरक्षा दी जाए जो इन ब्लास्ट में अपाहिज हो गए है। इंटेलिजेंस एजेंसियों से सूचना मिलने के बाद भी सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है और आम आदमी के प्रति अपनी ड्यूटी नहीं निभा पा रही है। हर ब्लास्ट के बाद सिर्फ आश्र्वासन दे दिए जाते है कि आगे से ऐसी घटनाओं को होने से रोका जाएगा
ब्लास्ट की सुनवाई में तेजी लाएं
नई दिल्ली सन 2008 में दिल्ली में हुए पांच सीरियल बम धमाके की सुनवाई जल्दी पूरा करने के लिए तीस हजारी कोर्ट गंभीर हो गई है। कोर्ट ने एक अभियोजन पक्ष को निर्देश जारी कर कहा है कि बम ब्लास्ट मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए और हर तारीख पर 15 गवाहों की गवाही सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने कहा कि बम धमाके लोकतांत्रिक व विकासशील देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। आतंकी बार-बार ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। तीस हजारी कोर्ट की विशेष जज संतोष स्नेही मान की अदालत ने मामले की जल्दी सुनवाई की बात कहते हुए कहा कि इन धमाकों में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और सौ से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इन पीडि़तों को समय से इंसाफ मिले इसके लिए अहम कदम उठाया जाना जरूरी है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिए हैं कि अब प्रत्येक सप्ताह बुधवार को मामले की सुनवाई होगी और प्रत्येक सुनवाई पर कम से कम 15 गवाहों को समन किया जाना चाहिए। अदालत ने माना कि यदि इसी गति से मामले की सुनवाई की जाएगी, तो फैसले में करीब छह साल का समय लगेगा। जो कि बेहद लंबा समय होगा। इसलिए मामले की सुनवाई महीने में चार दिन किया जाना सही होगा। इतना ही नहीं सरकारी गवाहों को सुरक्षा दिया जाना भी महत्वपूर्ण विषय है। जिसपर अभियोजन को ध्यान देना होगा। यदि किसी गवाह को धमकी मिलती है, तो पुलिस कमिश्नर स्वयं ऐसे मामलों की निगरानी करें। इसी बीच अदालत में इस मामले के गवाह चार डॉक्टरों ने अपने बयान दर्ज कराए। उल्लेखनीय हैं कि 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में पांच स्थानों पर बम ब्लास्ट हुए थे और एक जगह पर जिंदा बम बरामद हुआ था
पाक में बैठकर हमें निशाना बनाने वाले आतंकियों को छोड़ेंगे नहीं
अमेरिका के नवनियुक्त रक्षा मंत्री लियोन पेनेटा ने बुधवार को पाकिस्तान सरकार को साफ शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान से संचालित होने वाले हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों के हमले बर्दाश्त नहीं करेगा। ये आतंकी संगठन सीमा पार अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हमले करते रहते हैं। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मंगलवार को नाटो और अमेरिकी दूतावास पर हुए आतंकी हमले का हवाला देते हुए पेनेटा ने कहा कि अमेरिका ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि तालिबान और हक्कानी नेटवर्क अफगानिस्तान में हमले करके वापस पाकिस्तान भाग जाते हैं। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के साथ बैठक के लिए विमान से कैलिफोर्निया जाते समय पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने यह बातें कहीं। उनका कहना है कि आतंकियों को यह संदेश देना जरूरी है कि हम अपनी सेना की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं। यह पूछने पर कि क्या अमेरिका की कोई नई सैन्य कार्रवाई करने की योजना है? उन्होंने कहा, अमेरिका पाकिस्तान के सीमा क्षेत्र में ड्रोन हमले करेगा। पाकिस्तान के इस क्षेत्र में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। यहां खतरनाक आतंकी गुट हक्कानी का कब्जा है
अल कायदा का नया सरगना जवाहिरी भी पाकिस्तान में
ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के बाद अमेरिका आतंकी संगठन अल कायदा के नए सरगना अयमान अल जवाहिरी की तलाश में जुट गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि जवाहिरी पाकिस्तान में छुपा हुआ है। गत दो मई को अमेरिकी कमांडो द्वारा ओसामा को मार गिराने के बाद जून में संगठन की कमान जवाहिरी ने संभाली थी। पेंटागन प्रवक्ता जॉर्ज लिटिल ने कहा, हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है जिससे संकेत मिले कि वह पाकिस्तान के अलावा कहीं और है। उनका यह बयान जवाहिरी द्वारा 9/11 हमले की दसवीं बरसी पर एक जिहादी साइट पर सोमवार को पोस्ट किए गए वीडियो संदेश के बाद आया है। एक घंटे के इस वीडियो में जवाहिरी का आडियो और ओसामा की मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया वीडियो संदेश शामिल है। माना जा रहा है कि यह वही वीडियो है, जो ओसामा की मौत के बाद अमेरिकी सरकार ने जारी किया था। हालांकि इस वीडियो में ओसामा की आवाज सुनाई दे रही थी, जबकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने जो वीडियो जारी किया था, उसमें आवाज नहीं थी। जवाहिरी ने कहा कि 9/11 के बाद अमेरिका को अफगानिस्तान और इराक में शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इसमें हाल ही में अरब देशों में हुई क्रांति की प्रशंसा की है। संदेश में कहा गया है कि मिस्र, ट्यूनीशिया, और लीबिया की जनता भय और आतंक से मुक्त हो गई है
पाक में भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क को हल्के में न ले अमेरिका
अमेरिका को पाकिस्तान में मौजूद भारत विरोधी नेटवर्क पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए। अमेरिका के हेरीटेज रिसर्च फाउंडेशन की वरिष्ठ शोधार्थी लीजा कर्टिस ने अमेरिकी कांग्रेस की समिति के समक्ष यह बात कही। लीजा ने स्पष्ट कहा, अमेरिका को यह संदेश नहीं देना चाहिए कि वह पाकिस्तान में मौजूद पश्चिम विरोधी आतंकी नेटवर्क और भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क के बीच फर्क करता है। हमारी नीति से ऐसा आभास होता है कि हम पाक में मौजूद भारत विरोध संगठनों को कमजोर मानते हैं। यह गलत नीति है, क्योंकि भारत विरोधी आतंकी संगठन भी अलकायदा और उसके सहयोगी संगठनों की तरह पश्चिम विरोधी हैं और अलकायदा के मददगार भी। लीजा ने कहा, यह बेहद जरूरी है कि अमेरिका पाकिस्तान से आतंकवाद के संपूर्ण ढांचे को नष्ट करने की ओर कदम बढ़ाए। वहां मौजूद हर प्रकार का आतंकी नेटवर्क परास्त होना चाहिए। लीजा ने समिति को यह भी सलाह दी कि अमेरिका को भारत-पाक के बीच वार्ता को प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद, परमाणु अप्रसार और व्यापार से संबद्ध संसद की विदेशी मामलों की उपसमिति में अमेरिका-भारत आतंकवाद निरोधी सहयोग : गहराती सहभागिता विषय पर विचार रखते हुए ये बातें कहीं। इस दौरान लीजा ने अमेरिका को चेतावनी भी दी कि पाकिस्तान के साथ राजनीतिक संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए उसे आतंकवाद से लड़ने में भारत के साथ सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता कभी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, इसके बजाय अमेरिका को पाकिस्तान को स्पष्ट तौर पर बता देना चाहिए कि आतंकवादी संगठनों की सहायता या उनके साथ नरम रवैया अख्तियार करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह अलग-थलग पड़ जाएगा और इस क्षेत्र स्थिति भी कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षो के दौरान भारत में हुए आतंकवादी हमलों की सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठनों के साथ भारतीयों के भी मिलकर काम करने से भारत में लगातार आतंकवाद बढ़ रहा है
मुंबई में 13 जुलाई को हुए धमाकों में मरने वालों की संख्या 27 पहुंच गई है
मुंबई में 13 जुलाई को हुए धमाकों में मरने वालों की संख्या 27 पहुंच गई है। गुरुवार को स्थानीय अस्पताल में 34 वर्षीय घायल व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। जेजे अस्पताल के डीन टीपी लहाणे ने बताया कि झावेरी बाजार में हुए विस्फोट में प्रकाश जोशी बुरी तरह से घायल हो गए थे। गुरुवार को दोपहर 2:30 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि बम में प्रयुक्त तार उनके सिर में लग गई थी। उनका ऑपरेशन किया गया। इस दौरान उनके दाहिने हाथ की दो अंगुलियां काटनी पड़ी। कुछ दिनों की उनकी हालत काफी गंभीर बनी हुई थी। बता दें कि झावेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर इलाके में 13 जुलाई को हुए धमाके में 17 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। जबकि इलाज के दौरान अब तक 10 लोग दम तोड़ चुके हैं। लहाणे ने बताया कि अभी जेजे अस्पताल में तीन और घायलों का इलाज चल रहा है। गौरतलब है कि मुंबई धमाकों में तीन महीने बाद भी सुरक्षा एजेंसियां को अभी तक कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है। इस मामले की जांच में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के साथ एटीएस और एनआइए की टीमें भी लगी हुई हैं। इन धमाकों के पीछे भी इंडियन मुजाहिदीन का हाथ बताया जा रहा है। हालांकि किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है
घुसपैठ की ताक में बैठे हैं 300 आतंकी
सेना की 15वीं कोर के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने गुरुवार को एक बार फिर सीमा पार से आने वाले दिनों में बडे़ पैमाने पर घुसपैठ की आशंका जताई है। हालांकि उन्होंने कहा कि हमारे जवान किसी भी चुनौती से निपटने में पूरी तरह समर्थ हैं। उन्होंने कहा कि हमारे जवान किसी भी चुनौती से निपटने में पूरी तरह समर्थ हैं। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के अंतर्गत त्रेहगाम में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि 300 के करीब प्रशिक्षित आतंकी एलओसी के पार गुलाम कश्मीर में इस समय जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के लिए उचित मौके की तलाश में बैठे हुए हैं। चिनार कोर कमांडर ने कहा कि बीते तीन माह के दौरान आतंकियों ने कई बार घुसपैठ का प्रयास किया है, लेकिन उन्हें हर बार मुंह की खानी पड़ी है। ज्यादातर एलओसी पर घुसपैठ करते हुए मारे गए हैं और कइयों को वापस भागना पड़ा है। इस समय राज्य में सक्रिय आतंकी कैडर का मनोबल टूटा हुआ है। लगभग सभी प्रमुख आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं। इससे आतंकी व आका पूरी तरह हताश हो चुके हैं। इसलिए वह पहाड़ों पर बर्फ गिरने और दर्राें के बंद होने से पहले ज्यादा से ज्यादा संख्या में आतंकियों को इस तरफ घुसपैठ कराएंगे, लेकिन हमारे जवान पूरी तरह तैयार हैं। आतंकी एलओसी पर ही मारे जाएंगे
अमेरिका ने भी आइएम को प्रतिबंधित सूची में डाला
भारत में प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) पर अब अमेरिका ने प्रतिबंध लगाते हुए इसे विदेशी आतंकवादी गुट घोषित कर दिया है। अमेरिका ने कहा कि आइएम के लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तान आधारित गुटों के साथ संबंध हैं। इस घोषणा के परिणामस्वरूप संगठन को दिए जाने वाले भौतिक और संसाधन संबंधी सहयोग को प्रतिबंधित किया जा सकेगा। इससे संगठन की अमेरिका और अमेरिकी लोगों के नियंत्रण में आने वाली संपत्ति की जब्ती में भी मदद मिलेगी। आइएम पर प्रतिबंध लगाने का फैसला अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान आधारित लश्कर, जैश-ए-मुहम्मद और हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के साथ आइएम के संपर्क हैं। इसमें कहा गया है, आइएम का उद्देश्य गैर मुस्लिमों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना है। उसका अंतिम उद्देश्य पूरे दक्षिण एशिया में इस्लाम का शासन स्थापित करना है। आइएम 2005 के बाद से पूरे भारत में दर्जनों हमलों का जिम्मेदार है, जिसके चलते सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की जान गई है। विदेश विभाग के आतंकवाद रोधी मामलों के समन्वयक डेनियल बेंजामिन ने कहा, इस घोषणा से पता चलता है कि आइएम ने न केवल अमेरिका के लिए बल्कि उसके करीबी सहयोगी भारत के लिए भी बड़ा खतरा पैदा किया हुआ है। आज की यह कार्रवाई प्रदर्शित करती है कि हम भारत के साथ हैं। बेंजामिन ने कहा कि यह घोषणा आतंकवाद के खिलाफ हमारी जंग में काफी अहम कदम है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमले करने का आइएम का मुख्य तरीका भीड़ भरे इलाकों में आपस में समन्वय से कई स्थानों पर बम विस्फोट करना है, जिसमें आर्थिक और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया जाता है, ताकि हताहतों की संख्या ज्यादा से ज्यादा रहे। 2010 में आइएम ने पुणे में जर्मन बेकरी को निशाना बनाया था, जिसमें 17 लोग मारे गए थे। इसके पहले 2008 में दिल्ली में आइएम के हमले में 30 लोग मारे गए थे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आइएम ने 2008 के मुंबई हमलों में भी अहम भूमिका निभाई थी। लश्कर द्वारा किए गए इस हमले में 163 लोग मारे गए थे
हाई कोर्ट बम ब्लास्ट में एक और मौत
नई दिल्ली हाई कोर्ट बम ब्लास्ट में हुए घायलों में एक की और मौत हो गई। 7 सितंबर से आरएमएल अस्पताल के आइसीयू में भर्ती मृदुल बक्शी (34) ने गुरुवार तड़के 3:45 पर अंतिम सांस ली। एक अन्य घायल रतनलाल अभी भी आइसीयू में हंै। उनमें अभी भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। दूसरी ओर एक अन्य गंभीर तारसेन सिंह की तबियत में सुधार होने की वजह से उन्हें आइसीयू से बाहर निकाल दिया गया है। आरएमएल में गुरुवार तक 13 मरीज भर्ती हैं। इनमें एक को छोड़कर सभी की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। बता दें कि वारदात के दिन यहां कुल 55 लोग भर्ती हुए थे, जिनमें पांच लोगों की मौत हो गई। वारदात के दिन इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हुई थी। उसके बाद अब तक तीन मौतें हो चुकी हैं। अस्पताल में भर्ती घायलों के परिजन इलाज से प्रसन्न हैं। उनका कहना है कि डॉक्टरों की तरफ से कोई कमी नहीं की गई है। पैकेट रखने के एवज में 25 लाख का ऑफर : ग्रेटर नोएडा के जहांगीरपुर कस्बे में एक स्कूल क्लर्क के पास बुधवार विदेश से फोन आया। फोन करने वाले ने एक पैकेट रखने के एवज में 25 लाख रुपये का ऑफर दिया। उसने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस व स्थानीय खुफिया विभाग इसकी जांच करने में जुटा है। जहांगीरपुर कस्बे के रहने वाले फूलचंद भारद्वाज महाराजा अग्रसेन स्कूल में क्लर्क हैं। बुधवार दोपहर उनके मोबाइल पर 00923477747365 नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने सलाम किया और उससे कहा कि आज का दिन उसके लिए सबसे बेहतर होगा। हमारे कमांडर के मोबाइल पर बातचीत करें। फोन करने वाले ने कमांडर का मोबाइल नंबर 00923056238879 दिया। फूलचंद ने कमांडर का नंबर मिलाया तो उसने भी रुपयों का लालच दिया। उसने कहा कि 25 लाख रुपये मिल सकते हैं। इसके एवज में उसे एक पैकेट उसका आदमी देगा। जहां पर उसका आदमी पैकेट रखने के लिए कहेगा, वहां पैकेट रखते ही उसे 25 लाख रुपये तुरंत मिल जाएंगे। फूलचंद ने बताया कि कमांडर ने उसे धमकी दी कि अगर किसी को मेरा फोन नंबर बताया तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। उसने तुरंत जहांगीरपुर थाने में जाकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस नंबर लेकर मामले की जांच कर रही है
हमारे पास आतंकियों से लड़ने की क्षमता नहीं
नई दिल्ली पिछले तीस साल से आतंकवाद से जूझने के बावजूद भारत इससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। सरकार ने गुरुवार को स्वीकारा कि उसके पास आतंकियों से लड़ने की क्षमता नहीं है। दहशतगर्दो की नई रणनीति के आगे सारे सरकारी प्रयास बेकार हैं। हमले को अंजाम देकर साफ बचने वाली देशी आतंकियों की नई पौध के आगे सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां बेबस हैं। आतंकियों की गतिविधियों की जानकारी रखना तो दूर, वारदात के बाद भी एजेंसियां उन तक पहुंचने में सफल नहीं हो पा रही हैं। गृहमंत्री पी. चिदंबरम और खुफिया ब्यूरो (आइबी) के प्रमुख नेहचल संधु ने देश भर से आए पुलिस महानिदेशकों को संबोधित करते हुए यह बात कही। चिदंबरम ने मुंबई-दिल्ली में हुए ताजा हमलों को सरकार पर धब्बा बताया। साथ ही आतंक के खिलाफ अमेरिका व भारत की तैयारियों की तुलना करते हुए हमलों को रोकने में नाकामी पर सफाई दी। उन्होंने कहा, 9/11 के बाद अमेरिका ने अलकायदा के खिलाफ जंग का एलान करते हुए होमलैंड सिक्यूरिटी नामक नया विभाग बना दिया,जिसका काम सिर्फ आतंकी गतिविधियों पर नजर रखना था, लेकिन भारत में अभी तक आतंकियों से निपटने के लिए समर्पित विभाग नहीं बना है। चिदंबरम ने राष्ट्रीय आतंकरोधी केंद्र (नेशनल काउंटर टेरर सेंटर-एनसीटीसी) न बनाये जाने पर नाराजगी भी जताई। ध्यान देने की बात है कि 26/11 कांड के बाद से चिदंबरम एनसीटीसी बनाने पर जोर दे रहे हैं, पर विभिन्न मंत्रालयों में इसे लेकर गहरे मतभेद हैं। गृहमंत्री ने कहा,दो देशों पर हमला और अरबों डालर खर्च कर पूरी दुनिया में आतंकियों की तलाश के बाद भी अमेरिका खुद को सुरक्षित नहीं मान रहा है। वहीं कम संसाधन,पाकिस्तान जैसे आतंक के केंद्र के करीब होने के बावजूद भारत में आतंकियों से निपटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने,आंतरिक सुरक्षा पर बढ़े खतरे के बावजूद कम खर्च के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया और कहा,आतंरिक सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय को केवल 40 हजार करोड़ रुपये मिलते हैं। इसमें राज्य सरकारों के 60 हजार करोड़ के खर्च को भी जोड़ लें तो भी यह एक लाख करोड़ रुपये पहुंचता है। वहीं अकेले रक्षा मंत्रालय का बजट एक लाख 60 हजार करोड़ है। इस क्रम में चिदंबरम ने पुलिस सुधारों के अधूरे उपाय और बड़ी संख्या में पुलिस के खाली पदों का भी मुद्दा भी उठाया। आइबी प्रमुख नेहचल संधु ने कहा, आतंकियों की नई रणनीति के आगे सुरक्षा एजेंसियां बेबस हैं। आतंकियों ने काम करने का तरीका बदल लिया है। अब वे छोटे समूह में हमले करते हैं। वारदात की तैयारी के सिलसिले में वे संपर्क के लिए मोबाइल, लैपटाप या ईमेल का इस्तेमाल नहीं करते। वारदात के बाद जगह बदल देते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों तक पहुंचने के लिए पुराने तौर तरीके ही इस्तेमाल कर रही हैं। उनका इशारा पिछले सालों में आतंकी हमलों को सुलझाने में जांच एजेंसियों की विफलता की ओर था। बदले हालात में हमें काम का तौर-तरीका बदलना पड़ेगा
Wednesday, September 14, 2011
दिल्ली धमाके में बंगाल से दो गिरफ्तार
कोलकाता दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर विस्फोट मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मंगलवार को स्थानीय पुलिस ने महानगर से सटे हावड़ा जिले के बागनान इलाके से मो. अफजल तैयब नामक एक जख्मी युवक को गिरफ्तार किया है। डॉक्टरी जांच में पता चला है कि यह जख्म किसी बम विस्फोट की चपेट में आने के कारण है। वहीं, कोलकाता से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने छोटू नाम से ईमेल भेज कर धमाके की जिम्मेदारी लेने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मोहम्मद अफजल दिल्ली में धमाके के दो दिन बाद हावड़ा पहुंचा था। बागनान में वह कहां रहता था और उसके पास किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं अथवा नहीं? इसका खुलासा फिलहाल पुलिस नहीं कर रही है। उसके शरीर पर जख्म के निशान हैं, जबकि उसका हाथ भी उड़ा हुआ है। उसकी जब चिकित्सकों से जांच कराई गई तो पता चला कि वह बम से होने वाले घाव के निशान हैं। वह हिन्दी और उर्दू में बातचीत करता है। पूछताछ में कभी वह नेपाल का रहने वाला तो कभी कहीं और का रहने वाला बता रहा है। पुलिस का कहना है कि दिल्ली धमाके में जिन अभियुक्तों की स्केच जारी की गई थी, उनमें से एक का करीब 70 फीसदी हिस्सा उसके चेहरे से मैच करता है। उसके पास से एक सिम कार्ड भी बरामद हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। सूचना है कि जल्द ही एनआइए की टीम उससे पूछताछ करेगी। वहीं, एनआइए ने जिस मेल भेजने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, उसकी पहचान सनी शर्मा के रूप में हुई है। इसके जीमेल एकाउंट से दूसरा और चौथा ई-मेल भेजा गया था। इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के नाम से टीवी चैनलों को भेजे गए मेल का आइडी, छोटूमिनालियाउशमान एट जीमेल डाट काम था। दिल्ली धमाके के बाद चार ईमेल भेजे गए थे, जिसमें बांग्लादेश में सक्रिय हरकत-उल- जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) और इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) की ओर से विस्फोट की जिम्मेदारी का दावा किया गया था। गिरफ्तारी के बाद एनआइए की टीम सनी शर्मा को लेकर दिल्ली रवाना हो गई है। इससे पहले सोमवार को खबर थी कि दिल्ली विस्फोट सहित अन्य आतंकी हमले के बाद धमकी भरे ईमेल भेजने के मामले में एनआइए ने सिलीगुड़ी से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक वह आतंकी है, जो हमले के दौरान जख्मी हो गया था और अपना उपचार सिलीगुड़ी के एक निजी नर्सिग होम में करा रहा था। लेकिन बंगाल पुलिस और कोलकाता के एसटीएफ ने सिलीगुड़ी से किसी को गिरफ्तार किए जाने की सूचना से इनकार कर दिया था
कश्मीर में लश्कर का दुर्दात कमांडर मुठभेड़ में मारा गया
श्रीनगर कश्मीर में सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बना लश्कर-ए-तैयबा का दुर्दात डिवीजनल कमांडर अब्दुल्ला यूनी मंगलवार को सोपोर में अपनी माशूका से मिलने के चक्कर में मारा गया। इस दौरान एसपी सोपोर भी ग्रेनेड के छर्रे लगने से आंशिक रूप से जख्मी हो गए। यूनी करीब दो दर्जन से अधिक निर्दाेष नागरिकों की हत्या के अलावा सुरक्षाबलों पर कई हमलों में शामिल रहा है। एसपी सोपोर इम्तियाज हुसैन ने बताया कि अब्दुल्ला यूनी का असली नाम अजहर मलिक पुत्र रियाज मलिक है। वह पाकिस्तान के मुल्तान शहर का रहने वाला था। पुलिस को सूचना मिली कि यूनी रात को सोपोर के बागात-ए-बटपोरा इलाके में तबस्सुम नामक युवती के घर पर था। बताया जा रहा है कि यूनी ने तबस्सुम से शादी भी कर ली थी। दोपहर को जब सुरक्षाबलों ने घेराबंदी की तो वह मुगली नामक एक महिला के घर में छिप गया। इसके बाद सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने मिलकर अभियान आगे बढ़ाया। इस पर यूनी अपना ठिकाना बदलते हुए एक खाली मकान में घुस गया। यूनी के साथियों ने उसे निकालने के लिए कवर फायर भी दिया, लेकिन वह नाकाम रहे। यूनी को मार गिराने के बाद उसके दो साथियों को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने अभियान चला रखा है। मुठभेड़ के दौरान ग्रेनेड के छर्रे लगने से एसपी सोपोर भी जख्मी हो गए। उन्हें हाथ पर तीन टांके लगे हैं। बीते 2005 से कश्मीर में सक्रिय अब्दुल्ला यूनी ने ही अप्रैल में श्रीनगर में एक मस्जिद के बाहर बम धमाके में जमायत-ए-अहल-ए-हदीस के प्रमुख मौलाना शौकत की हत्या की साजिश रची थी। घुसपैठ का प्रयास नाकाम : घुसपैठ कराने के लिए छटपटा रहे पाकिस्तान ने सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा की नर्सरी पोस्ट पर गोलीबारी कर आतंकवादियों के एक दल को इस ओर धकेलने की कोशिश की। बीएसएफ की 59 बटालियन के सतर्क जवानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोमवार देर रात हुए इस प्रयास को नाकाम बना दिया। गांव बरोटा व कमौर कैंप की नर्सरी बार्डर आउट पोस्ट पर रात बारह बजे के करीब जवानों ने छह के करीब आतंकवादियों के एक दल को अंधेरे की आड़ में घुसपैठ के लिए तारबंदी के करीब आते देखा। हथियार बंद आतंकवादियों में से दो ने पीठ के पीछे भारी बैग भी उठा रखे थे। बीएसएफ ने इनको ललकारा और इससे पहले की वो पोजीशन लेते बीएसएफ के जवानों ने उन्हें निशाना बनाते हुए फायरिंग शुरू कर दी। आतंकवादियों को कवर फायर देने के लिए पाकिस्तानी रेंजरों ने भी न्यू टेंट पोस्ट से गोलीबारी शुरू कर दी। फायरिंग करीब 30 मिनट तक चली। इसमें किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है। मंगलवार सुबह जीरो लाइन पर बीएसएफ अधिकारियों ने पाक रेजरों से फ्लैग मीटिंग कर इस मामले में एतराज जताया
सिम कार्ड के क्लोन से भेजा गया ईमेल
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में हुए विस्फोट के बारे में सूचना देने वाले व्यक्ति को दी जाने वाली इनाम की राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की घोषणा की है। हालांकि जांचकर्ताओं को संदेह है कि पिछले सप्ताह हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले ईमेल को सिम कार्ड के क्लोन से भेजा गया है। सूत्रों ने कहा कि चार में से एक ईमेल का पता लगाने के दौरान जांचकर्ताओं ने पाया है कि इसे भेजने के लिए इंटरनेट कनेक्शन वाले मोबाइल फोन के सिम कार्ड के क्लोन का इस्तेमाल किया गया था जिसके कारण जांचकर्ताओं के लिए ईमेल को भेजने वाले व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। मामले की जटिलता का संकेत देते हुए एक सूत्र ने कहा, हमने पश्चिमी बंगाल में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है और उसे पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है लेकिन संभवत: इस ईमेल को भेजने वाला वास्तविक व्यक्ति वह नहीं है। सूत्रों ने कहा, कई पड़ोसी राज्यों की एटीएस और दिल्ली पुलिस के सुरक्षाकर्मियों की मदद के बावजूद इस मामले में धीमी प्रगति हो रही है लेकिन जांचकर्ताओं का मानना है कि अगले कुछ दिनों में निश्चित तौर पर कुछ प्रगति होगी। 21 लोग अस्पताल में : हाई कोर्ट बम ब्लास्ट के सात दिन बाद भी मृदुल बक्शी की स्थिति गंभीर बनी हुई है, वह अभी भी आईसीयू में है। वहीं दूसरी ओर ओर दोनों पैर गवां चुके रतन लाल की स्थिति में सुधार जारी है। उसे अगले एक दो दिन के अंदर आईसीयू से जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है। जबकि दूसरी ओर कुल 14 जख्मी अभी भी आरएमएल में है जिसमें से दो की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बता दें कि पिछले बुधवार को हुए बम ब्लास्ट में घायल कुल 56 लोगों को यहां भर्ती किया गया था, जिसमें चार लोगों की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई थी। इस घटना में कुल 13 लोगों की जान चली गई थी। आरएमएल में इलाज के लिए भर्ती 20 लोगों का मृत टिशू (उत्तक) सर्जरी कर हटाया गया। जबकि चार लोगों के पैर काटने की नौबत आई जिसमें एक एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती है
देश भर में आतंकियों की धरपकड़ तेज
नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर बम धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने देशी आतंकियों की खोज का देशव्यापी अभियान शुरू कर दिया है। एनआइए, खुफिया ब्यूरो और राज्यों के एटीएस द्वारा बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह मंत्रालय और एनआइए ने इस बारे में चुप्पी साध रखी है। हमला करने वाले आतंकियों की सूचना देने के लिए घोषित इनाम राशि को दोगुना कर पांच लाख से 10 लाख रुपये कर दी गई है। छोटे विमान का इस्तेमाल कर मुंबई एयरपोर्ट पर आतंकी हमले की आइबी की चेतावनी पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आतंकी हमले की साजिश के बारे में खुफिया सूचना के बाद नए सिरे अलर्ट जारी किया गया है। 9 सितंबर को भेजे गए अलर्ट के अनुसार आतंकी छोटे विमानों द्वारा हमला कर सकते हैं। इसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ-साथ आस-पास के राज्यों में मौजूद छोटे हवाई अड्डों पर सतर्कता बढ़ाई गई है। आशंका है कि आतंकी इन छोटे हवाई अड्डों का इस्तेमाल उड़ान भरने के लिए कर सकते हैं। छोटे विमानों को किराये पर देने वाली कंपनियों को भी सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है। पूरे देश से आ रही छिटपुट सूचना के मुताबिक मंगलवार को मुंबई एटीएस ने दो, गुजरात एटीएस ने एक और कोलकाता एटीएस एक संदिग्ध आतंकी से हिरासत में लेकर पूछताछ की है। कोलकाता में हिरासत में लिए गए व्यक्ति के शरीर पर जले और चोटों के निशान के कारण उसे दिल्ली बम विस्फोट का आरोपी माना जा रहा है, लेकिन एनआइए या गृह मंत्रालय का कोई भी अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। मुंबई में हिरासत में लिए गए इंडियन मुजाहिद्दीन के संदिग्ध आतंकी का संबंध जुलाई में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से बताया जा रहा है। इसके साथ ही देश के विभिन्न जेलों में बंद आतंकियों से पिछले दो-तीन सालों में मिलने वालों की सूची भी खंगाली जा रही है। इन सभी की विश्वसनीयता की नए सिरे से पड़ताल का काम शुरू कर दिया है और संदिग्ध विश्वसनीयता वालों से पूछताछ की जा है। एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इससे आइएम आतंकियों और उनके संपर्को का डाटा तैयार करने में मदद मिलेगी। हमले की जिम्मेदारी लेने वाले पहले और तीसरे ईमेल भेजने वालों को किश्तवाड़ और अहमदाबाद से हिरासत में लेने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने दूसरे और चौथे ईमेल भेजने वाले छोटू मियां की खोज तेज कर दी है। इस सिलसिले में कोलकाता से सन्नी शर्मा नाम के युवक को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है। दरअसल छोटू मियां ने इसी सन्नी शर्मा के ईमेल आइडी से आइएम का मेल भेजा था। पर गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि उसके आइपी एड्रेस को मास्क कर आतंकी मेल भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया है। (पेज-5 भी दे
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