Saturday, July 16, 2011

मुंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका पर सेसिल विक्टर की टिप्पणी

इस बात की संभावना तो थी ही कि आतंकवादियों का सफाया करने के लिए पाक पर पड़ने वाले अमेरिकी दबाव का प्रभाव भारत पर भी पडे़गा। जब अमेरिका ने उत्तर और दक्षिण वजीरिस्तान की पाकिस्तानी कबाइली पट्टी में मौजूद आतंकवादियों के ठिकानों और सुरक्षित पनाहगाहों पर ड्रोन हमलों को रोकने से इनकार कर दिया तो पाकिस्तान के चहेते आतंकवादी संगठन, लश्करे-तैयबा ने इस काम को पूरा किया। पिछले एक सप्ताह में अमेरिकी ड्रोनों ने कम से कम दस ठिकानों पर हमले किए हैं और हर हमले में औसतन दर्जन भर आतंकवादियों का सफाया किया। इस्लामाबाद की इन सामरिक संपत्तियों पर हमलों में तेजी पाकिस्तान और उसके संरक्षक चीन दोनों को चुभ रही थी। इसलिए चीन ने अमेरिका को दोटूक कह दिया कि पाकिस्तान पर किसी भी हमले को चीन पर हमला माना जाएगा। यह इसलिए कि पाकिस्तान और चीन की सामरिक संपत्तियां समान और संयुक्त हैं। इस कारण अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के बाद से पोषित आतंकवादी पाकिस्तान की बलूचिस्तान तटरेखा पर ग्वादार बंदरगाह के रास्ते फारस की खाड़ी तक सीधी पहंुच हासिल करने में चीन के अग्रिम दस्ते का अंग होंगी। कुछ ही दिन पहले अपनी जमीन पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने में पाकिस्तान की मदद करने के लिए आवंटित 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मदद रोक दी। जवाब में पाकिस्तान ने कहा कि वह अफ-पाक सीमा पर सभी सैन्य ऑपरेशनों को रोक देगा और वहां से अपने सैनिकों को हटा लेगा। अपनी नियमित सेना और अफगानिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर सुरक्षित पनाहगाहों में मौजूद करीब पांच लाख प्रशिक्षित जिहादी आतंकवादियों को हटाने और उन्हें भारत के मुकाबले खड़ा करने की लंबे समय से चली आ रही धमकी पर अमल कभी भी हो सकता है। इस अमल के तहत ही बुधवार की रात को मुंबई के दादर, झावेरी बाजार और ओपेरा हाउस इलाकों में तीन धमाके हुए। आने वाले समय में देश के विभिन्न व्यापारिक और प्रौद्योगिक प्रतिष्ठानों समेत शहरी इलाकों को निशाना बनाया जा सकता है। मुंबई हमले के बाद गठित राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी एनआइए के लिए यह कड़ा इम्तिहान होगा। शहरी ठिकानों पर आतंकवादी हमलों का कारण कश्मीर को शेष भारत से अलग करने में पाक सेना और आइएसआइ की नाकामी है। दो दशक पहले पाकिस्तान ने पंजाब को भारत से अलग करने की बजाय अपना ध्यान कश्मीर पर केंद्रित किया था। उसे उम्मीद थी कि मजहब के नाम पर वह कश्मीर में बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय को पाकिस्तान में आने के लिए राजी कर लेगा लेकिन कश्मीरियों में पाकिस्तान के भीतर के हालात से वितृष्णा हो रही है। पाकिस्तान की मुराद पूरी नहीं हो पाई इसीलिए वह चीन को इसमें शामिल कर रहा है। भारत के खिलाफ आतंकवाद को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने में पाकिस्तान और चीन में सांठगांठ है। पाकिस्तान ने राष्ट्रपति हामिद करजई को चीन के निकट आने की सलाह दी थी। इसी से अमेरिका ने ड्रोन हमलों में वृद्धि कर दी। अगर पाकिस्तान सैनिकों को हटाने की धमकी पर अमल करता है तो अमेरिका ड्रोन हमले और तेज कर सकता है। जहां तक पाकिस्तान की परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी का सवाल है तो यह अमेरिकियों द्वारा भारत के खिलाफ इस्तेमाल की गई चाल से अधिक कुछ नहीं है। लगता है पाकिस्तान को यह अहसास हो रहा है कि धमकी को कार्रवाई में तब्दील करने का यही सही समय है। भारत इस क्षेत्र में चीन-पाक प्रभुत्व के रास्ते में दीवार की तरह खड़ा है। इसीलिए पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ फिर से आतंकवादी हमले शुरू करा दिए हैं। इन हमलों के माध्यम से पाकिस्तान न केवल भारत को, बल्कि अमेरिका को भी झुकाने की कोशिश कर रहा है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

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