Monday, July 18, 2011

एनआइए को जांच सौंपने में देरी पर उठ रहे सवाल

मुंबई सीरियल ब्लास्ट की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को सौंपने में देरी पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इसके गठन के बाद के सबसे बड़े आतंकवादी हमले की जांच नहीं सौंपे जाने से एजेंसी के अधिकारियों में निराशा है। उनका कहना है कि इसमें ज्यादा देरी होने से जांच में मुश्किल होगी। इसके अलावा देर से सौंपी गई जांच के कारण राज्य पुलिस की क्षमता पर भी सवाल उठेगा। एनआइए के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि मुंबई पर ताजा हमले की गंभीरता को देखने के बाद भी एजेंसी को इसकी जांच सौंपने में की जा रही देरी से यह संकेत जा रहा है कि गंभीर आतंकवादी वारदात के मामले में भी इसे तब तक एनआइए को नहीं सौंपा जाएगा, जब तक कि राज्य पुलिस इसमें नाकाम न हो जाए। लेकिन इस देरी से जांच पर गंभीर असर पड़ सकता है। अधिकारी कहते हैं कि एनआइए कानून में यह प्रावधान है कि किसी भी आतंकवादी वारदात के तुरंत बाद राज्य की ओर से उपलब्ध सूचना के आधार पर केंद्र तय करे कि यह आतंकवादी वारदात है या नहीं और उसी वक्त वारदात की गंभीरता का आकलन कर यह तय हो जाना चाहिए कि उसकी जांच एनआइए को सौंपी जानी है या नहीं। कानून में यह भी कहा गया है कि यह काम जल्द से जल्द किया जाना चाहिए और 15 दिन के अंदर केंद्र सरकार यह फैसला जरूर कर ले। मगर अधिकांश मामलों में महीनों इंतजार के बाद भी फैसला नहीं हो रहा। हालांकि मुंबई सीरियल ब्लास्ट के पहले दिन से ही एनआइए राज्य पुलिस की आतंकवाद रोधी शाखा की मदद कर रही है। इस तरह यह जांच में शामिल जरूर है, मगर एक तरह से उसे एटीएस के निर्देशन में काम करना पड़ रहा है।

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