नई दिल्ली आइएसआइ के इशारे पर अमेरिका में भारत विरोधी जहर उगलते रहे गुलाम नबी फई की गिरफ्तारी के बाद नई दिल्ली ने फई-नेटवर्क के बिखरे तारों को टटोलने की कवायद तेज कर दी है। भारत की कोशिश है कि ब्रिटेन और बेल्जियम में भी फई जैसे पाक समर्थित कश्मीरी हमदर्दो की असली कारगुजारियां बेनकाब हों। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत अपने तरीके से इस मामले पर काम कर रहा है और भारतीय एजेंसियां ब्रिटेन और बेल्जियम की जांच एजेंसियों के साथ संपर्क में हैं। साथ ही नई दिल्ली ने वाशिंगटन स्थित अपने दूतावास को फई नेटवर्क की पड़ताल में जारी एफबीआइ जांच पर भी पूरी नजर रखने की हिदायत दी है। सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान से हासिल धन से अमेरिका में जनमत प्रभावित करने में लगे फई के आर्थिक तार भारत से जुड़े हैं या नहीं इसकी भी पड़ताल होगी। हालांकि इसके पहले नई दिल्ली अमेरिका में इसकी जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। इस संबंध में अमेरिका के विधि विभाग के साथ भी भारत संपर्क में है। उल्लेखनीय है कि फई के कश्मीर एक्शन काउंसिल की ही तर्ज पर ब्रिटेन में नजीर शॉल और ब्रुसेल्स में अब्दुल मजीद ट्रांबू भी कश्मीर पर पाकिस्तानी रुख के खुले हिमायती हैं। इतना ही नहीं, फई के साथ दोनों का न केवल तालमेल है बल्कि कश्मीर एक्शन काउंसिल की ही तर्ज पर शॉल का जस्टिस फाउंडेशन एंड कश्मीर काउंसिल और ट्रांबू का कश्मीर सेंटर सेमीनार आयोजित करता रहा है। ऐसे में भारतीय खेमे को उम्मीद है कि करीब दो दशक से सक्रिय फई की गतिविधियों की परत उधड़ने के बाद ब्रिटेन और बेल्जियम में भी पर्दे के पीछे पाकिस्तान और खासकर आइएसआइ की आर्थिक मदद से चलने वाले कारगुजारियां भी जांच के घेरे में आएगी। फई की गिरफ्तारी के बाद भारतीय खेमा इस बात से खासा उत्साहित है कि पाकिस्तान की आर्थिक शह पर कश्मीर के अलगाववाद की खातिर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की दशकों से जारी साजिश बेपर्दा हुई है। सूत्र बताते हैं कि फई को लेकर भारत ने कई बार अमेरिका को आगाह किया था। सूत्र इस बात से भी इंकार नहीं करते कि लंबे समय से सक्रिय फई की गिरफ्तारी पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में आई खटास का नया नमूना है।
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