Saturday, July 16, 2011

उत्तराखंड में सक्रिय स्लीपर सेल


अंकुर अग्रवाल, देहरादून मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद शक की सुई एक बार फिर आतंकियों के स्लीपर सेल की तरफ घूम गई है। साइलेंट रहकर रेकी करने और गुप्त जानकारियों को आतंकी संगठनों और पाक खुफिया एजेंसी आइएसआइ तक पहुंचा रहे ये स्लीपर सेल उत्तराखंड के लिए भी खतरा माने जाते रहे हैं। खासतौर से देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड के दौरान इनकी सक्रियता खासी बढ़ जाती है। सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों की जांच में यह बात पहले भी सामने आ चुकी है। जब दिसंबर पीओपी से पूर्व हिजबुल और जून पीओपी से पूर्व आइएसआइ के स्लीपर सेल पकड़े गए। ऐसे में मुंबई हमलों के बाद खुफिया एजेंसियां एक बार फिर स्लीपर सेल गिरोह को खंगालने में जुट गई हैं। उत्तराखंड लंबे समय से आतंकियों की हिस्ट लिस्ट में शामिल माना जाता है। यहां प्रतिष्ठित सैन्य, रक्षा व केंद्रीय संस्थानों पर आतंकी संगठनों की निगाह लंबे समय से है। हालांकि, अभी तक यहां आतंकी कोई वारदात को अंजाम नहीं दे सके हैं, लेकिन खतरा कम नहीं हुआ है। गत 10 दिसंबर को इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आया, जब पीओपी से 12 घंटे पहले पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के डिवीजनल कमांडर गुलाम नबी शेख व स्लीपर सेल तनवीर को गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ कि इन्होंने आइएमए की रेकी की व उनकी गतिविधियां भी वहीं आसपास रहीं। इसके बाद जून-11 में भी पीओपी से पहले खुफिया एजेंसियों ने एक आइएसआइ एजेंट जावेद को गिरफ्तार कर लिया। इसके कब्जे से भी आइएमए का नक्शा व सैन्य ठिकानों की जानकारी मिली। पांच साल पूर्व भी दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सैन्य ठिकानों की रेकी में लश्कर-ए-तैयब्बा के एक आतंकी को गिरफ्तार किया था। वह दून में एक इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर सैन्य ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान भेजता था। उत्तराखंड में आतंकियों की गतिविधियां देहरादून, हरिद्वार व रुड़की में बडे़ पैमाने पर सामने आई हैं। यहां स्लीपर सेल कई इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। हिजबुल के आतंकियों ने इसका खुलासा किया था कि दून में उनके कई एजेंट हैं। बावजूद इसके अभी तक खुफिया एजेंसियां इनका सुराग नहीं लगा सकीं। लेकिन मुंबई धमाकों ने खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों की नींद तोड़ दी है। यही वजह है कि स्लीपर सेलों की तलाश में बड़े पैमाने पर सर्चिग ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

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