: दूसरे विश्व युद्ध के बाद नॉर्वे में सबसे बड़ी हिंसा की घटना को अंजाम देने वाले नॉर्वियन नागरिक आंद्रे बेहरिंग ब्रिविक ने रविवार को अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। ओस्लो में बम धमाके और उटोइया द्वीप पर किए जनसंहार को ब्रिविक ने बर्बर लेकिन जरूरी धर्मयुद्ध बताया। पुलिस को 1500 पेजों का एक घोषणापत्र भी मिला है जिसे ब्रिविक ने खुद इस कांड को अंजाम देने से पहले लिखा था। इसमें उसने मुस्लिमों के प्रति घृणा की बात को विस्तार से बताया है। इसके अलावा उसने दोनों घटनाओं को अकेले ही अंजाम देने का दावा भी किया। हालांकि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसमें एक और हमलावर भी शामिल था। हमले में करीब सौ लोग घायल हैं। कई अब भी लापता हैं। इस बीच मरने वालों की संख्या 93 हो गई है। रविवार को राजधानी ओस्लो में मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि उटोइया द्वीप पर गोलीबारी के दौरान बहुत से लोगों ने जान बचाने के लिए समुद्र में छलांग लगा दी थी। माना जा रहा है कि इनमें से कई किनारे पर पहुंचने से पहले रास्ते में ही डूब गए। गिरफ्तारी के बाद पहली बार 32 वर्षीय ब्रिविक ने अपने वकील के जरिए एक संदेश दिया। उसने कहा, मैं अपने कृत्य के बारे में विस्तार से बताना चाहता हूं। मैं सोमवार को अदालत में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखूंगा। ब्रिविक ने अपनी इस हरकत को बर्बर तो कहा, लेकिन इसे बेहद जरूरी कदम भी करार दिया। ओस्लो के पुलिस कमिश्नर ने इस बात की पुष्टि की है कि ब्रिविक सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखेगा। पुलिस को अभी तक इस घटना में किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन की संलिप्तता के सबूत नहीं मिले हैं। आंखें खोलने वाली घटना : इस घटना ने नॉर्वे को अपनी अंतरआत्मा में झांकने का मजबूर कर दिया है। ओस्लो के चर्च की एक 42 वर्षीय पादरी ब्रिट एन्स ने कहा, यह सच्चाई है कि ब्रिविक नॉर्वियन है और इस बात ने देश के लोगों पर बहुत असर डाला है। एक तरह से यह अच्छा भी हुआ की इन घटनाओं के पीछे किसी मुस्लिम आतंकी गुट का हाथ नहीं निकला। एन्स ने आगे कहा, यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अप्रवासी और अन्य धर्मो के लोगों से असंवाद कितनी बड़ी समस्या पैदा कर सकता है। हमें अपनी आंखों को अब खोलना ही पड़ेगा। सरकार पर हमला : अमेरिका के पूर्व खुफिया अधिकारी रिचर्ड आयर्स के मुताबिक यह हमला सरकार पर किया गया है। ब्रिव्रिक अपनी सरकार की उस नीति से घृणा करता था जिसमें मुस्लिम अप्रवासियों को देश में ज्यादा से ज्यादा स्थान दिया जा रहा था। उसने इस नीति पर हमला किया, यानी यह सरकार पर हमला था। लंदन के थिंक टैंक के सदस्य जेम्स ब्रैंडन ने कहा कि ऐसे में जब हर देश मुस्लिम चरमपंथियों को सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है, नॉर्वे की इस घटना ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि गोरे दक्षिणपंथी चरमपंथी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनकर पैदा हो रहे हैं। खेती की आड़ में : उसने दस्तावेजों में बताया है कि किस प्रकार हमलों की तैयारी के लिए खनन और खेती का व्यवयास शुरू किया। ब्रिविक ने लिखा है, इसका मकसद यह था कि यदि मैं विस्फोटक सामग्री की खरीद या तस्करी के लिए गिरफ्तार कर लिया जाता हूं तो मैं खनन और खेती के बिजनेस की आड़ लेकर खुद का बचाव कर सकता हूं। पूरा नॉर्वे इस घटना से सकते में है और यह समझ पाने में विफल है कि शांति के दूत के नाम से मशहूर यह देश कैसे इस प्रकार की हिंसा का शिकार हो सकता है। रविवार को नॉर्वे के किंग हेराल्ड पंचम, प्रधानमंत्री जेंस स्टोलटेनबर्ग और अन्य मंत्री ओस्लो कैथड्रेल में आयोजित एक प्रार्थना सभा में शामिल हुए। शुक्रवार को हुए हमले कार बम से शुरू हुए थे जिनमें स्टोलटेनबर्ग के कार्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया था। ऐसा समझा जाता है कि हमलावर ने ओस्लो में कार बम विस्फोटों को अंजाम देने के बाद उटोइया द्वीप जाने के लिए नौका पकड़ी। उसने पुलिसवर्दी से मिलता जुलता स्वेटर पहन रखा था। द्वीप पर पहुंचने के बाद उसने खुद को बम हमले का जंाचकर्ता बताया और आटोमैटिक गन से गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। हमलावर के पिता सकते में : ब्रिविक के पिता को जब से बेटे की करतूत की खबर मिली वह सकते में हैं। उसके पिता जेंस ब्रिविक ने नॉर्वे के अखबार वेरडेंस गेंग से कहा, मैं इंटरनेट पर खबरें पढ़ रहा था और तभी मैंने उसका नाम और तस्वीर देखी। मैं सकते में आ गया। जेंस फ्रांस में रहते हैं। जेंस ने बताया कि वह बेटे के बारे में ज्यादा नहीं जानते क्योंकि जब वह 16 साल का था, तबसे दोनों के बीच संपर्क नहीं हुआ।
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