Saturday, July 30, 2011

स्वामी पर लटकी कार्रवाई की तलवार


: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग विवादित लेख के मामले में जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी को नोटिस भेजने पर कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि मामले में कानूनी सलाह ली जा रही है कि आइपीसी के किस प्रावधान का उल्लंघन हुआ है। इस्लामी आतंकवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताने वाले स्वामी के लेख की तीखी आलोचना करते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। दिग्विजय ने कहा, मैं सुब्रमण्यम स्वामी के सर्वाधिक सांप्रदायिक विचारों की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग करता हूं। एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित लेख में स्वामी ने 13 जुलाई 2011 को मुंबई में सिलसिलेवार बम विस्फोट के बाद भारत में हिंदुओं को आत्मचिंतन करने की जरूरत बताते हुए कहा कि हिंदू हलाल किया जाना कबूल नहीं कर सकते। अपने लेख में उन्होंने कथित तौर पर कहा है, कट्टरपंथी मुसलमान हिंदू बहुल भारत पर विजय को अपना ऐसा एजेंडा मानते हैं, जिसे पूरा किया जाना अभी बाकी है। मैं मुस्लिम कट्टरपंथियों को हिंदुओं को निशाना बनाए जाने के लिए दोषी नहीं मानता बल्कि हिंदुओं को दोषी मानता हूं। उन्होंने कहा कि एक ऐसा व्यक्ति जो खुद को वन मैन आर्मी के रूप में पेश करता है, बेहद सांप्रदायिक बातें करता है और उसे अखबार में प्रकाशित किया जाता है। मुस्लिमों को मतदान के अधिकार से वंचित करने के सुझाव देने वाले सुब्रमण्यम स्वामी के एक लेख को हबीबुल्ला ने बेहद ठेस पहुंचाने वाला करार दिया है। स्वामी ने लिखा था, हमें समग्र दृष्टिकोण की जरूरत है क्योंकि हिंदुओं को इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना है। अगर कोई मुस्लिम अपनी हिंदू विरासत को स्वीकार करता है तो हम हिंदू उसे वृहद हिंदू समाज के हिस्से के रूप में स्वीकार कर सकते हैं, जो कि हिंदुस्तान है। अन्य लोग, जो इसे स्वीकार करने से इनकार करते हैं, या जो विदेशी पंजीयन के जरिए भारतीय नागरिक बने हैं, वे भारत में तो रह सकते हैं लेकिन उन्हें मतदान के अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।

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