Saturday, July 16, 2011
सुराग मिले पर गुनहगार पकड़ से दूर
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली एक ई-मेल, कुछ फोन कॉल के रिकार्ड, एक स्कूटर और क्लोज सर्किट कैमरों की रिकार्डिग से बनी 11 सीडी। मुंबई हमले की जांच के नाम पर अब तक सुरक्षा एजेंसियों के हाथ सिर्फ इतना ही लगा है। सीरियल ब्लास्ट के 48 घंटे के अंदर इन सुरागों के हाथ लगने से जांचकर्ताओं को कुछ उम्मीद जगी है पर गुनहगार अभी पकड़ से दूर हैं। गृह सचिव आरके सिंह ने शुक्रवार को माना कि अब तक कुछ सुराग के आधार पर जरूर जांच को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। मगर अभी ये बहुत शुरुआती हैं और इनके आधार पर जांच को कोई पक्की दिशा नहीं मिल रही। उन्होंने बताया कि एक ई-मेल की भी जांच की जा रही है, जिसका संबंध सीमा पार से है। इनके आधार पर मुंबई पुलिस आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। इस सिलसिले में ऐसे बहुत से लोगों से पूछताछ की जा रही है, जिन पर पहले से संदेह रहा है। पुलिस घटनास्थल के पास लगे क्लोज सर्किट कैमरे की रिकार्डिग को खंगालने में भी जुटी है। जिनमें मौके पर विस्फोट से पहले के कुछ घंटों में पहुंचे लोगों की पहचान की जा रही है। स्थानीय लोगों से उनकी पहचान करवाई जा रही है। गृह सचिव का कहना है कि यह बहुत लंबा काम है। इसमें समय लग सकता है। समय से पहले संदिग्धों का नाम नहीं लेना चाहती पुलिस मुंबई, जासं : पिछली कई घटनाओं से सबक लेकर महाराष्ट्र सरकार एवं मुंबई पुलिस आतंकी विस्फोट से जुड़े किसी संदिग्धों का नाम तब तक नहीं लेना चाहती, जब तक कोई सफलता उसके हाथ न लग जाए। ऐसा करने के निर्देश उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से दिए गए हैं ताकि वास्तविक आरोपियों को सतर्क होने का मौका न मिले एवं पुलिस विभाग को गलत गिरफ्तारियों की किरकिरी भी न झेलनी पड़े। 26 नवंबर, 2008 मुंबई पर हुए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले के बाद महाराष्ट्र में पहला बड़ा आतंकी हमला 13 फरवरी, 2010 को पुणे की जर्मन बेकरी में हुआ था। इस हमले में 17 लोग मारे गए थे और 59 घायल हुए थे। केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने इस हमले के बाद पुणे का दौरा करते हुए ही यह नीति लागू कर दी थी कि जर्मन बेकरी विस्फोट कांड का पूरा खुलासा होने से पहले कोई कयास न लगाया जाए। इसके फलस्वरूप 9 सितंबर, 2010 को दो लोगों की गिरफ्तारी होने तक पुणे पुलिस ने किसी संदिग्ध के नाम का खुलासा नहीं किया। महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते को इससे पहले मालेगांव कांड एवं 11 जुलाई, 2006 को मुंबई की उपनगरीय ट्रेन विस्फोट कांड में भी किरकिरी झेलनी पड़ी है। कार मालिक से पुलिस ने की लंबी पूछताछ मुंबई, सौरभ कतकुरवर : दादर स्थित कबूतरखाना के पास बस स्टॉप पर हुए बम विस्फोट में क्षतिग्रस्त हुई एस्टीम कार के मालिक दीपक पटेल से मुंबई पुलिस ने बुधवार रात लंबी पूछताछ की। पुलिस ने आगे की जांच के लिए उनकी क्षतिग्रस्त कार अपने कब्जे में ले ली है। बम धमाके में बाल-बाल बचे दीपक ने कहा, मैं अपने दो सहयोगी कर्मचारियों के साथ कबूतरखाना के पास स्थित बस स्टॉप से गुजर रहा था तभी जबरदस्त बम विस्फोट की आवाज सुनाई दी। धमाके से मेरी कार बुरी तरह हिल गई। मैं और मेरे साथी कांप उठे और अपनी जिंदगी बचाने के लिए घटनास्थल पर ही कार छोड़कर भाग निकले। उन्होंने कहा कि बस स्टॉप से उनके गुजरने और बम विस्फोट के बीच दो से तीन सेकंड का ही फासला रहा होगा। धमाके के बाद दीपक खुद शिवाजी पुलिस थाने पहुंचे और वाकये की जानकारी दी। उन्होंने कहा, मुझसे कई पुलिस अधिकारियों ने देर रात तक पूछताछ की। मेरी बेगुनाही से संतुष्ट होकर ही पुलिस ने रात करीब 2:30 बजे मुझे जाने दिया
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment