पाकिस्तान ने कहा है कि उनके देश का संविधान किसी आरोपी की आवाज के नमूने लेने की अनुमति नहीं देता है लेकिन वह फिर भी भारत को मुंबई हमले के संदिग्धों की आवाज के नमूने देने के सभी संभावित तरीके खोजेगा। साथ ही पाकिस्तान ने कहा कि रावलपिंडी की एक अदालत में मुंबई हमले के आरोपी की सुनवाई में हो रही देरी के लिए केवल उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और पाकिस्तानी न्यायिक आयोग को भारत को दौरा करने देने की अनुमति देने में करीब एक साल लगाने के लिए भारत को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान दंड संहिता और साक्ष्य अधिनियम के अनुसार, आरोपी की पहचान के लिए केवल अंगूठे का निशान मान्य होता है और आधिकारिक रूप से किसी आरोपी का फोटोग्राफ या उसकी आवाज नहीं ली जाती। मलिक ने एक साक्षात्कार में कहा, अगर मैं उनकी आवाज रिकार्ड करके किसी अन्य तरीके से नमूना लेकर इसे भारत को सौंपता हूं, तो इसे पाकिस्तान की अदालत में चुनौती दी जाएगी और जांचकर्ताओं तथा अभियोजकों पर अदालत की मानहानि का मामला बनेगा। मलिक ने कहा कि पाकिस्तान सरकार की आरोपियों के आवाज के नमूने लेने की अनुमति संबंधी अपील को एक निचली अदालत ने खारिज कर दिया था और उन्होंने इस बारे में अपने भारतीय समकक्ष पी. चिदंबरम से बात की थी। इसके बाद हमने अगले स्तर पर ऊपरी अदालत की शरण ली है। उन्होंने साफ किया कि 26/11 हमले के गुनहगारों को न्याय के घेरे में लाने को लेकर उनकी सरकार की नीयत बिल्कुल साफ है। उनकी सरकार भारत को आवाज के नमूने देने के लिए सभी संभावित तरीके खोजेगी। उन्होंने कहा, जैसे ही अदालत हमें अनुमति देती है, हम (भारत को आवाज के नमूने) निश्चित रूप से भेजेंगे। अगर उच्च न्यायालय (अपील को) खारिज करती है तो हम उच्चतम न्यायालय में जाएंगे। हम हर संभव स्तर पर जाएंगे। हम (इसे) निष्पक्ष तौर पर कर रहे हैं और आप कानून के बारे में पता कर सकते हैं। मलिक ने पाकिस्तान की एक अदालत में 2008 मुंबई हमले के सात आरोपियों की सुनवाई के संदर्भ में कहा, देरी हो रही है और देरी केवल पाकिस्तान की वजह से नहीं है। यह इसलिए है क्योंकि घटना दूसरे देश में घटी है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस मामले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है और जांचकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ काफी सबूत जुटा लिए हैं। मुंबई हमले की जांच के संबंध में पाकिस्तान में एक आयोग भेजने के भारत के आग्रह पर मलिक ने कहा कि उनका देश आयोग को लेकर सहमत है, जब इस तरह का आग्रह आएगा, संबंधित विधि विभाग द्वारा इसकी जांच की जाएगी और अगर यह विभाग सहमत होता है तो इस दौरे को अनुमति दी जाएगी।
No comments:
Post a Comment