मुंबई में १३ जुलाई को हुए सीरियल ब्लास्ट मामले में पुलिस ने ओपेरा हाउस के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध युवक की पहचान की है। उसने जींस और टी-शर्ट पहनी थी और नीले रंग की टोपी लगाई थी। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) तीन स्थानों के सीसीटीवी में रिकार्ड तस्वीरों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विदेशी कंपनी की मदद ले रहा है।
एटीएस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध युवक को हीरा व्यापारियों ने पहचानने से इनकार किया है। यह युवक कौन है, कहां से आया था और विस्फोट के बाद कहां गया? पुलिस इस बात की जांच कर रही है। एटीएस और मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी तीनों स्थानों से बरामद ११ सीडी में दर्ज सीसीटीवी फुटेज की फ्रेम-टू-फ्रेम बारीकी से जांच कर रहे हैं। वरिष्ठ जांच अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह से सीसीटीवी फुटेज पर केंद्रित हो गई है। जो फुटेज सीडी में उपलब्ध हैं, उनकी गुणवत्ता बहुत अच्छी नहीं है। गुणवत्ता सुधारने एवं तस्वीरों की साइज बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनी की मदद ली जा रही है। जिस व्यक्ति पर संदेह किया जा रहा है, उसका चेहरा इमेज की साइज बढऩे के साथ ही और स्पष्ट हो जाएगा।
पुणे की जांच टीम मुंबई में
मुंबई धमाकों की जांच में मदद देने के लिए पुणे एटीसी की टीम भी मुंबई पहुंच गई है। 13 फरवरी 2010 को पुणे के जर्मन बैकरी ब्लास्ट के बाद एटीसी का गठन किया गया था। इस मामले में इंडियन मुजाहिदीन का संदिग्ध आतंकी मोहसिन चौधरी फरार है। जर्मन बैकरी के साथ ही कुछ अन्य मामलों में भी उसकी तलाश है।
मानवाधिकार आयोग में गुहार
पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र राज्य मानव अधिकार आयोग से 13 जुलाई के बम कांड के पीडि़तों को राहत मुहैया कराने में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
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