Tuesday, August 16, 2011

पाकिस्तान ने अब तक पूरा नहीं किया वादा


अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत पाकिस्तान ने भारत को अब तक यह नहीं बताया कि मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब का बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट का वक्तव्य लेने उसका न्यायिक आयोग कब देश आएगा। मार्च में यहां गृह सचिव स्तर की वार्ता के दौरान पाक के इस प्रस्ताव पर भारत सहमत हो गया था कि वह पड़ोसी देश से एक न्यायिक आयोग को आने की इजाजत देगा ताकि इस्लामी राष्ट्र के अधिकारी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आर वी. सावंत वाघुले और जांच अधिकारी रमेश महाले के बयान दर्ज किए जा सकें। वाघुले और महाले ने ही 26/11 हमलों के दौरान गिरफ्त में आए और फिर दोषी करार दिए गए एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब का बयान दर्ज किया था। हमलों के दौरान मारे गए आतंकवादियों का पोस्टमार्टम कर चुके चिकित्सक का भी पाकिस्तान बयान दर्ज करना चाहता है। इस्लामाबाद यह कहता आया है कि पाकिस्तान में चल रहे मुंबई हमला मामले की न्यायिक प्रक्रिया के तहत भारत में आयोग भेजना जरूरी है। उसने गृह सचिव स्तर की वार्ता के दौरान वादा किया था कि वह 15 मई तक आयोग भेज देगा। पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने भी पिछले महीने थिंपू में दक्षेस बैठक के इतर गृह मंत्री पी. चिदंबरम के साथ मुलाकात के दौरान कहा था कि उनका मंत्रालय पाकिस्तान से न्यायिक आयोग जल्द भारत भेजने की दिशा में कम कर रहा है। बहरहाल, अब तक पाकिस्तान ने न्यायिक आयोग के प्रस्तावित भारत दौरे के बारे में कुछ नहीं बताया है। पाकिस्तान का दावा है कि लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकी उर रहमान लखवी सहित उसके सात आतंकवादियों पर लगे आरोप कसाब के मुंबई में दिए बयान पर आधारित हैं। लिहाजा, कसाब का इकबालिया बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट के वक्तव्य को पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत के समक्ष पेश करना जरूरी है। रावलपिंडी की अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन भारतीय अधिकारियों को जल्द ही किसी को सजा सुनाए जाने की ज्यादा उम्मीद नहीं है। वर्ष 2009 की शुरुआत के बाद से अदालत के चार न्यायाधीशों को अब तक बदला जा चुका है।


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