मुंबई पर नवंबर, 2008 में हमला करने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हमलावरों को पाकिस्तान में बैठे उनके आका फोन पर निर्देश दे रहे थे। अभी तक मीडिया में आती रही इन खबरों पर पाकिस्तानी अदालत में भी मुहर लग गई है। यहां की अदालत में मंुबई हमले को लेकर सात संदिग्धों के खिलाफ चल रही सुनवाई में एक गवाह ने अदालत को यह सच्चाई बताई है। फोरेंसिक विशेषज्ञ नौमान अशरफ बोडला ने अदालत से कहा कि हमलावरों के आकाओं ने तीन नंबरों से कॉल करके निर्देश दिए थे। नौमान को अभियोजन पक्ष, पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफआइए के गवाह के तौर पर पेश किया गया था। उन्होंने बताया कि ये तीनों नंबर खड़क सिंह नामक एक व्यक्ति के फर्जी पहचान पत्र के आधार पर जारी किए गए थे। अभियोजन पक्ष के वकील चौधरी जुल्फिकार ने बताया कि नौमान ने इस संबंध में अदालत को सात पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष ने भी अपनी दलीलें पेश कर दी हैं। बचाव पक्ष के वकील ख्वाजा सुल्तान अहमद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन आकाओं की बात की गई है, उनका आरोपियों से कोई लेना-देना नहीं है। सुनवाई के बाद सुल्तान ने मीडिया को बताया कि अदालत को यह भी सूचित किया गया कि हमले के दौरान दो महिलाओं समेत तीन भारतीयों ने कराची, गुलाम कश्मीर और नेपाल में लोगों को फोन किया था। सुनवाई 10 सितंबर तक स्थगित कर दी गई। हालांकि अदालत द्वारा अभियोजन पक्ष के उस आवेदन पर शीघ्र फैसला करने की उम्मीद है जिसमें भारत भेजने के लिए एक आयोग के गठन की मांग की गई है।
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