Tuesday, August 9, 2011

मच्छल में घुसपैठ के दो प्रयासश्रीनगर


उत्तरी कश्मीर में शनिवार रात को भी पाकिस्तानी सेना के सहयोग से स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों ने मच्छल सेक्टर में दो बार घुसपैठ का प्रयास किया। दोनों ही बार सेना के जवानों ने इसे नाकाम बना दिया। सीमा पार से घुसपैठ के लगातार हो रहे प्रयासों को देखते हुए एलओसी पर सेना ने चौकसी बढ़ा दी है। घुसपैठ के नजरिए से सभी संवेदनशील इलाकों में विशेष नाके लगाए जा रहे हैं और अग्रिम इलाकों में सक्रिय आतंकियों के संदिग्ध गाइडों की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। उत्तरी कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ का पहला प्रयास 27 जुलाई को हुआ था। इसे नाकाम बनाते हुए एक जेसीओ शहीद हुआ था। इसके बाद 30 जुलाई केा फिर आतंकियों ने भारतीय सीमा में दाखिल होने का प्रयास किया। इस बार उनके साथ पाकिस्तानी सेना के जवान भी पर थे। इसे नाक बनाते हुए तीन जवान शहीद हुए। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस बरार ने कहा कि मच्छल सेक्टर में दो बार घुसपैठ की कोशिश हुई है। दोनों ही बार जवानों ने घुसपैठियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। 27 जुलाई से अब तक घुसपैठियों से लड़ते हुए हमारे ां जवान शहीद हो चुके हैं।इस साल जून माह तक के बराबर सीमा पार से घुसपैठ के प्रयास हुए, जो हुए भी उन्हें पूरी तरह नाकाम बना दिया गया। इसके अलावा राज्य के अंदरूनी हिस्सों में भी कई सक्रिय आतंकी मारे गए हैं। इससे सीमा पार बैठे आतंकी सरगनाओं पर इस तरफ ज्यादा से ज्यादा आतंकियों को भेजने का दवाब बढ़ा रहा है। इसलिए जुलाई माह के अंतिम सप्ताह के बाद घुसपैठ के प्रयासों में तेजी आई है। उत्तरी कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ सैन्याधिकारी ने अपना नाम छापे जाने पर बताया कि हमारे पास अपने तंत्र से उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक, घुसपैठियों को हर बार जान बचाकर वापस भागना पड़ा है। उनमें से कुछ मारे भी गए हैं, लेकिन एलओसी पर सीधे पाकिस्तानी सेना की फायरिंग रेंज में उनके शव पडे़ होने के कारण उन्हें कब्जे में नहीं लिया जा सका है। इस बीच, राज्य पुलिस महानिदेशक कुलदीप खुड्डा ने भी आने वाले दिनों में सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों में तेजी की आशंका जताते हुए दावा किया है कि 300 से ज्यादा आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं।

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