Saturday, August 20, 2011

गोरखधंधे की जड़ पकड़ नहीं पा रहा एटीएस


आनन्द राय, लखनऊ फर्जी सिम हासिल कर आइएसडी कॉल का गोरखधंधा कराने वाले कुछ मोहरे भले ही आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की गिरफ्त में आ गए हों, लेकिन जड़ तक पहंुच नहीं बन पा रही है। सूबे में बहुत पहले से चल रहा यह गोरखधंधा अब परवान चढ़ने लगा है। अलबत्ता धंधे में चेहरे, ठिकाने और तौर-तरीके बदलने लगे हैं। एटीएस को सिर्फ इतनी खबर है कि सऊदी अरब में बैठे मुंबई निवासी हामिद बख्श और मोहम्मद नूर इस कारोबार को संचालित कर रहे हैं। गोरखधंधे की पहली आहट गोरखपुर में 2006 में मिली, जब झंगहा थाना क्षेत्र के बरही में मुंबई और आजमगढ़ निवासी दो युवकों ने एक पीसीओ के जरिए खाड़ी देशों में कान्फ्रेंसिंग का कारोबार शुरू किया। पीसीओ चलाने के बावजूद लग्जरी गाडि़यों से घूमने की वजह से पुलिस की उन पर निगाह गई और जब कॉल डिटेल निकाली गई तो पता चला कि मद्रास और विभिन्न शहरों से खाड़ी देशों में लोग पीसीओ के जरिए कान्फ्रेंस कर बातचीत करते थे। लेकिन पुलिस इस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर भूल गई। फिर इस तरह के कुछ और मामले सामने आए। इस साल 19 जनवरी को एटीएस ने आजमगढ़ और लखनऊ निवासी चार लोगों को गोमतीनगर के मिठाईवाला चौराहे से पकड़ा। ये चारों बीएसएनएल के सिमकार्ड से सेटेलाइट फोन पर 44 लाख रुपये की आइएसडी कॉल करा चुके थे। इनमें लखनऊ के गोमतीनगर का मुकेश कुमार और आजमगढ़ के अबू सहमा, सैयद जफर अब्बास तथा बबलू प्रमुख थे। एटीएस को बबलू के पासपोर्ट से पता चला कि उसने 80 बार विदेश यात्रा की है। तब यह बात सामने आई थी इस धंधे में बीएसएनएल के कर्मचारियों की भी संदिग्ध भूमिका है। पुलिस ने दो-तीन और लोगों पर कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया, लेकिन अभी तक बीएसएनएल के किसी संदिग्ध कर्मचारी के चेहरे से पर्दा नहीं उठ सका। तफ्तीश में यह भी जानकारी मिली कि इस धंधे के मोहरे प्रदेश के विभिन्न शहरों में जाल बिछा रहे हैं। ये वास्तविक पहचान छिपाते हुए विभिन्न कंपनियों का पोस्टपेड सिमकार्ड हासिल करते हैं और कई बार सीधे-सादे लोगों को भी अपने भरोसे में लेकर, कुछ पैसे देते हुए उनके नाम व पते पर सिम लेकर अंतरराष्ट्रीय नंबरों और सेटेलाइट मोबाइल फोनों पर लंबी बातचीत करते हैं और हवाला के जरिए लाखों में कमीशन लेते हैं। इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि एटीएस द्वारा मंगलवार को लखनऊ में हसनगंज थाना क्षेत्र के खदरा से गिरफ्तार सफात सिद्दीकी और ताविस मसूर के पास से 65.87 लाख रुपये बरामद हुए। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सभी मामलों की सघनता से जांच चल रही है। अब एटीएस इस बात की पड़ताल में भी जुटी है कि अंडरव‌र्ल्ड और आतंकियों से इस धंधे का तार कहां तक जुड़ा है।


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