Saturday, August 6, 2011

दक्षिणपंथी आतंकवाद एक नई चुनौती


, नई दिल्ली हर आतंकी घटना के बाद हम पड़ोसी मुल्कों में सूत्र तलाशते रहे, लेकिन कई मामलों की साजिश अपनी ही जमीन पर रची गई थी। दक्षिणपंथी आतंकवाद को देश के सामने नई चुनौती के रूप में पेश करते हुए गृह मंत्री पी. िदंबरम ने कुछ इस अंदाज में विपक्ष को जवाब दिया। मुंबई की हालिया आतंकी घटना को सुरक्षा व्यवस्था पर धब्बा मानने के बावजूद चिदंबरम ने राज्यसभा में चली बहस का जवाब देते हुए केंद्र में दक्षिणपंथी आतंकवाद को ही रखा। जबकि नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने आतंकी घटनाओं की जांच में सुराग न मिलने को ज्यादा गंभीर बताते हुए खुफिया एजेंसियों की क्षमता पर सवाल उठाए। अपने जवाब में चिदंबरम ने दक्षिणपंथी फासीवादी को पूरे विश्व के लिए खतरा बताया। इस मामले में भारत कोई अपवाद नहीं हैं। आतंकी घटनाओं के पूर्व की सूचनाएं इकट्ठा करने में नाकाम खुफिया एजेंसियों का बचाव करते हुए चिदंबरम में कहा कि संस्थाएं पांव पसारते दक्षिणपंथी आतंकवाद को नजरअंदाज कर रही थीं। यही वजह है कि जासूसी की दिशा बदली गई और विश्लेषण के तरीकों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। बहस में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने आतंकियों के निशाने पर मुंबई के होने की वजह बताई और सरकार की निष्कि्रयता पर गृहमंत्री को घेरा। उन्होंने सुझाव देने के अंदाज में कहा कि मजबूत खुफिया तंत्र और कठोर कानून से ही आतंक पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए सरकार की मजबूत राजनतिक इच्छा शक्ति का होना जरूरी है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा दिल्ली में अनशन करने वालों को अनुमति नहीं मिली और अलगाववादी लुटियन जोन में बैठक कर चले गए। जेटली बात-बात में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा पर व्यंग्य बाण छोड़ने से नहीं चूके। चिदंबरम ने जवाब देते हुए अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि देश गंभीर आतंक के साए में है। नई वास्तविकता यह है कि उद्गम स्थल देश के भीतर हो गया है। आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के बारे में चिदंबरम ने सरकार के प्रयासों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इसके लिए चार स्तंभों एनआइए, एनएसजी, नेटग्रिड और एनसीटीसी को मजबूत किया जा रहा है। माओवादी हिंसा से लड़ रहे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की प्रशंसा करते हुए चिदंबरम ने कहा कि कानूनी सलाह के बाद वहां एसपीओ की भर्ती के लिए अध्यादेश जारी करने की अनुमति दे दी गई है। उड़ीसा से भ इसके बारे में पूछा गया है। आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जासूसी को और कारगर बनाने और उनकी सूचनाओं के विश्लेषण के तरीके को बदलने की जरूरत बताई।

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