Tuesday, August 30, 2011

राजीव के हत्यारों को बचाने के लिए हाय-तौबाचेन्नई


: राजीव गांधी के कातिलों को 11 दिन बाद दी जाने वाली फांसी रद कराने को लेकर तमिलनाडु में सियासी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही प्रदर्शन तेज हो गए हैं। विपक्षी दल द्रमुक,पीएमके, एमडीएमके के साथ ही सरकार समर्थन डीएमडीके ने दया याचिका पर पुनर्विचार की मांग की है। श्रीलंकाई तमिल सांसद सुरेश प्रेमचंद्रन ने भी राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखा है। राजनीतिक प्रयासों के बीच पुलिस ने सोमवार को ट्रेन रोकने और प्रदर्शन करने के आरोप में 350 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं,मुख्यमंत्री जयललिता ने यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप से इंकार किया है कि उनके पास राष्ट्रपति के आदेश को बदलने की शक्ति नहीं है। जनता पार्टी के मुखिया सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी कहा है कि फांसी केमामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 में श्रीपेरंबदूर में हत्या के मामले के दोषियों मुरुगन, पेरारिवलन व संतन की फांसी रुकवाने के लिए कोयंबटूर में सोमवार को एमडीएम, पीएमके,वीसीके, एनटीके समेत विभिन्न दलों के कार्यकर्ता व छात्र शहर के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकने की कोशिश की। विधि महाविद्यालय के छात्रों ने पासपोर्ट व आयकर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। त्रिरुपुर में भी ट्रेन रोकने का प्रयास हुआ। हत्यारों की ओर से राष्ट्रपति के आदेश की पुनरीक्षा के लिए मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। प्रख्यात अधिवक्ता और सांसद रामजेठमलानी ने सजा कम करने के प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा, किसी भी व्यक्ति को तब तक दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कानून उसे इसकी इजाजत देता है। वहीं, मुख्यमंत्री जयललिता ने विस में कहा, विपक्षी दल उसने इस मामले में दखल की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने के बाद मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर सकता। गृह मंत्रालय 1991 में स्पष्ट कर चुका है कि दया याचिका खारिज किए जाने के बाद राज्य सरकारें सजा घटाने के लिए धारा 161 का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए पीएमके संस्थापक एस रामदास ने कहा अगर वह इच्छा शक्ति दिखाएं तो तीन जिंदगियां बच सकती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कहा, कातिलों ने 20 साल जेल में काट लिए हैं। इसलिए उनकी फांसी रद होनी चाहिए। ऐसा हुआ तो पूरी तमिल जाति इस मानवीय कृत्य की सराहना करेगी व खुश होगी। यदि राजीव जीवित होते तो वह तीनों दोषियों की जान बचाने को निश्चित तौर पर आगे आते।


मालेगांव आरोपियों का पालीग्राफ टेस्ट हुआ मुंबई


वर्ष 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले के संबंध में गिरफ्तार संदिग्धों का ब्रेन मैपिंग और पालीग्राफ टेस्ट किया जा रहा है। बचाव पक्ष के वकील खालिद आजमी ने कहा कि मोहम्मद अली और आसिफ खान का लाई डिटेक्टर टेस्ट पूरे हो गए हैं और शबीर अहमद पर ये परीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डाक्टरों ने गुजरात के फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय में मोहम्मद अली की ब्रेन मैपिंग शुरू की है

कराची से ही आतंकियों को दिए जा रहे थे निर्देशलाहौर


मुंबई पर नवंबर, 2008 में हमला करने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हमलावरों को पाकिस्तान में बैठे उनके आका फोन पर निर्देश दे रहे थे। अभी तक मीडिया में आती रही इन खबरों पर पाकिस्तानी अदालत में भी मुहर लग गई है। यहां की अदालत में मंुबई हमले को लेकर सात संदिग्धों के खिलाफ चल रही सुनवाई में एक गवाह ने अदालत को यह सच्चाई बताई है। फोरेंसिक विशेषज्ञ नौमान अशरफ बोडला ने अदालत से कहा कि हमलावरों के आकाओं ने तीन नंबरों से कॉल करके निर्देश दिए थे। नौमान को अभियोजन पक्ष, पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफआइए के गवाह के तौर पर पेश किया गया था। उन्होंने बताया कि ये तीनों नंबर खड़क सिंह नामक एक व्यक्ति के फर्जी पहचान पत्र के आधार पर जारी किए गए थे। अभियोजन पक्ष के वकील चौधरी जुल्फिकार ने बताया कि नौमान ने इस संबंध में अदालत को सात पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष ने भी अपनी दलीलें पेश कर दी हैं। बचाव पक्ष के वकील ख्वाजा सुल्तान अहमद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन आकाओं की बात की गई है, उनका आरोपियों से कोई लेना-देना नहीं है। सुनवाई के बाद सुल्तान ने मीडिया को बताया कि अदालत को यह भी सूचित किया गया कि हमले के दौरान दो महिलाओं समेत तीन भारतीयों ने कराची, गुलाम कश्मीर और नेपाल में लोगों को फोन किया था। सुनवाई 10 सितंबर तक स्थगित कर दी गई। हालांकि अदालत द्वारा अभियोजन पक्ष के उस आवेदन पर शीघ्र फैसला करने की उम्मीद है जिसमें भारत भेजने के लिए एक आयोग के गठन की मांग की गई है।

Sunday, August 28, 2011

भारत ने सात पाकिस्तानी कैदी रिहा किए अटारी


: भारत की अलग-अलग जेलों में सजा काट चुके सात पाकिस्तानी कैदियों को गुरुवार अंतर्राष्ट्रीय सड़क सीमा के रास्ते वतन भेज दिया गया। इन कैदियों को अटारी बार्डर पर सख्त सुरक्षा प्रबंधों के बीच लाया गया। इमीग्रेशन पर कागजी कार्रवाई करने के बाद इन कैदियों को बीएसएफ के इंस्पेक्टर हेमराज ने पाकिस्तान रेंजर के डिप्टी कमांडेंट मोहम्मद रसीन के हवाले किया। बीएसएफ सहित दूसरे विभागों के अधिकारी भी अटारी सीमा पर मौजूद थे।


कश्मीर में ग्रेनेड हमले में दो की मौत, 14 घायल


श्रीनगर, जागरण ब्यूरो : आतंकियों ने गुरुवार को तीन घंटे के अंतराल पर कश्मीर के बारामूला व बटमालू में ग्रेनेड हमले किये। इन हमलों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कर्मी समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य जख्मी हुए हैं। इन धमाकों के बाद पूरी घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। आतंकियों ने पहला हमला दोपहर करीब 12:30 बजे बारामूला कस्बे की झेलम मार्केट में किया। मार्केट में खरीदारी कर रहे बीएसएफ की नौंवी वाहिनी के जवानों पर ग्रेनेड फेंका गया। इसमें एक स्थानीय नागरिक और जवान यू. हालदार की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल जवान नरेश कुमार को श्रीनगर के 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूसरा हमला ठीक तीन घंटे बाद 3:30 बजे बटमालू बस स्टैंड पर सीआरपीएफ के बंकर के पास हुआ। आतंकियों ने ग्रेनेड फेंका जो वहां खड़े लोगों के पास फटा। इस हमले में 12 लोग जख्मी हो गए। सभी घायलों को श्रीनगर के विभिन्न अस्पतालों में दाखिल कराया गया है। फिलहाल, किसी भी आतंकी संगठन ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। पाकिस्तानी सेना ने दागे रॉकेट पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार की देर शाम जम्मू के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में पांच भारतीय पोस्टों पर जमकर गोलीबारी की। इस दौरान करीब दो दर्जन रॉकेट भी दागे। हमले में कोई नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन बताया कि गया है कि गोलीबारी घुसपैठ करवाने के लिए की गई थी। इस घटना के बाद सीमा पर चौकसी और बढ़ा दी गई है।

Wednesday, August 24, 2011

घुसपैठ पर अमेरिकी चेतावनी बेमतलब


श्रीनगर सेना की 15 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने अमेरिकी चेतावनी को बेमानी बताया है। उन्होंने रविवार को अमेरिका द्वारा लश्कर व जैश के अगले कुछ दिनों में अपनी गतिविधियों में तेजी लाने की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए कहा कि न तो यह हमारे लिए नई बात है और न ही इसके कोई मायने हैं। हसनैन ने कहा कि जैश वर्ष 2000 से और लश्कर उससे पहले से ही जम्मू कश्मीर में सक्रिय है। ये दोनों आतंकियों के बड़े संगठन हैं। इसलिए हमारे लिए यह सूचना कोई बहुत बड़ी या नई नहीं है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण तो यह है कि आतंकी क्या कर ने जा रहे हैं और हम उन्हें मार गिराने के लिए क्या तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी सिनेटर जॉन मैकेन के हालिया दौरे के बारे में उन्होंने कहा कि यह एक गुडविल मीटिंग थी। इस बीच, बांडीपोरा जिले के तहत गुरेज सेक्टर में शनिवार को शुरू हुआ तलाशी अभियान रविवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। सेना के जवान मुठभेड़ में घायल होने के बावजूद बच निकलने में कामयाब रहे चार-पांच आतंकियों को तलाश रहे हैं। शनिवार को गुरेज सेक्टर के बग्तूर इलाके में सीमा पार से लगभग 17 आतंकियों के दो गुटों ने दो रबर किश्तियों की मदद से भारतीय इलाके में घुसपैठ का प्रयास किया था। इस घुसपैठ को नाकाम बनाते हुए एक लेफ्टिनेंट शहीद और दो अन्य जवान जख्मी हुए, जबकि 12 घुसपैठिए मारे गए हैं। हसनैन ने बताया कि सूत्रों ने नजदीकी जंगल में एक ठिकाने का पता दिया है। वहां से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ है। वहां ताजा खून के धब्बे भी पाए गए हैं। हमारे जवान उन धब्बों के आधार पर आतंकियों का पीछा कर रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि वहां दो-तीन आतंकी और हो सकते हैं। मुठभेड़ के दौरान पांच आतंकी बच निकलने में कामयाब रहे हैं। ये आतंकी एलओसी के इस तरफ जंगल में छिपने में कामयाब रहे हैं। शनिवार देर रात भी उनकी जवानों के साथ गोलीबारी हुई है। घुसपैठ की पहले से थी सूचना कश्मीर स्थित सेना की 15वीं कोर के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने रविवार को अक्टूबर माह तक सीमा पार से घुसपैठ की विभिन्न कोशिशों की आशंका जताते हुए कहा कि हमें गुरेज घुसपैठ की पहले से ही सूचना थी। आतंकी इस समय पूरी तरह हताश हैं। आतंकी कोई भी बड़ी गलती कर सकते हैं, जिसका हम पूरा फायदा उठाएंगे। हसनैन ने कहा कि इस साल हमने घुसपैठ के सभी परंपरागत रास्तों को करीब-करीब बंद कर दिया था। उसके बाद हमें इस बात की पहले से ही आशंका थी कि आतंकी कोई नया रास्ता या कम से कम इस्तेमाल किए गए इलाकों को चुन सकते हैं। जीओसी ने कहा कि किशनगंगा दरिया कई जगह नियंत्रणण् रेखा के दोनों तरफ है। इसके किनारे पर कई लांचिंग पैड भी हैं। हमें अपने विभिन्न स्रोतों और नेटवर्क से पहले ही इस बात की भनक लग चुकी थी कि घुसपैठिए इस रास्ते से घुसपैठ करेंगे। अलबत्ता, हसनैन ने इस बात से साफ इंकार किया कि घुसपैठ के बारे में पाकिस्तानी सेना से उन्हें किसी तरह की कोई भी सूचना मिली थी। उन्होंने कहा कि जहां तक मेरी जानकारी है, हमारा उनके साथ आतंकवाद के मुद्दे पर कोई साझा तंत्र या सहयोग नहीं है। अगर होता तो मैं सबसे पहले इसका खुलासा करता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना तो यहां छद्म युद्ध जारी रखे हुए हैं। घुसपैठ की नाकाम कोशिश जम्मू, एजेंसी : सेना ने पुंछ में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी है। घटना में एक आतंकवादी मारा गया, जबकि एक घायल है। 16 कॉ‌र्प्स के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि शनिवार-रविवार की रात लगभग एक बजे जिले के कृष्णागति उपसेक्टर के बाल्नोई में चार सशस्त्र आतंकवादियों की गतिविधियों की जानकारी मिली। अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को चुनौती दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हुई मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया, जबकि एक घायल हो गया। अधिकारी के मुताबिक अन्य दो आतंकवादी भाग गए। रात में आतंकवादी मृत आतंकवादी का शव अपने साथ पाकिस्तान ले गए। सुरक्षा बलों ने शनिवार को घाटी के गुरेज में 12 आतंकवादियों को मार गिराकर इस साल की सबसे बड़ी घुसपैठ साजिश विफल कर दी थी। इस अभियान में एक अधिकारी की मौत हो गई थी।


डॉन ने फोन पर सुनी पिता के जनाजे की नमाज


अंडरव‌र्ल्ड सरगना छोटा शकील अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं हो सका। हालांकि, इस दौरान वह फोन के जरिये अपने परिवार के संपर्क में रहा। उसने जनाजे की नमाज भी फोन पर ही सुनी। कराची में रह रहे अंडरव‌र्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के दाहिने हाथ के तौर पर पहचाना रखने वाले छोटा शकील के पिता बाबू मिस्त्री शेख (85) का शुक्रवार की शाम देहांत हो गया था। औरंगाबाद से कुछ रिश्तेदारों के मुंबई पहुंचने के बाद शनिवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया। भारत में कई गंभीर मामलों में वांछित होने के कारण छोटा शकील अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। हां, दाऊद परिवार के प्रतिनिधि के रूप में दाऊद का छोटा भाई इकबाल कास्कर अंतिम संस्कार में शामिल हुआ। कुछ दिन पहले बाबू भाई को चर्नी रोड स्थित सैफी अस्पताल में भर्ती किया गया था। हालांकि, मौत के समय वह अपने दक्षिण मुंबई के टेमकर रोड स्थित घर पर ही थे। बाबू भाई की मौत के बाद समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आसिम आजमी उनके घर गए थे। शनिवार सुबह तड़के उनकी शवयात्रा निकाली गई। वर्दी और सादे कपड़ों में पुलिस व खुफिया एजेंसियों के लोग भी शवयात्रा के आसपास देखे गए। शवयात्रा की शुरुआत उनके घर के पास की एक मस्जिद में जनाजे की नमाज से हुई। फिर मरीन लाइंस के बड़ा कब्रिस्तान में फजल की नमाज के बाद उन्हें दफनाया गया। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान छोटा शकील फोन से लगातार अपने निकटस्थ लोगों के संपर्क में रहा। उसने अपने पिता के जनाजे और फजल की नमाज को फोन पर ही सुनकर तसल्ली की।

गुरेज घुसपैठ की पहले से थी सूचना


: कश्मीर स्थित सेना की 15वीं कोर के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने रविवार को अक्टूबर माह तक सीमा पार से घुसपैठ की विभिन्न कोशिशों की आशंका जताते हुए कहा कि हमें गुरेज घुसपैठ की पहले से ही सूचना थी। आतंकी इस समय पूरी तरह हताश हैं और वह कोई भी बड़ी गलती कर सकते हैं, जिसका हम पूरा फायदा उठाएंगे। वह यहां गुरेज मुठभेड़ में शनिवार को शहीद हुए लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह को सैन्य सम्मान के साथ उसके घर भेजने के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने गुरेज में दरिया के रास्ते किश्ती में बैठ घुसपैठियों की आमद पर कहा कि इस साल हमने घुसपैठ के परंपरागत रास्तों को लगभग बंद कर दिया था। उसके बाद हमें इस बात की पहले से ही आशंका थी कि आतंकी कोई नया रास्ता या वह इलाका चुन सकते हैं, जिसका उन्होंने कम से कम इस्तेमाल किया है। जीओसी ने कहा कि किशनगंगा दरिया कई जगह एलओसी के दोनों तरफ है। इसके किनारे पर कई लांचिंग पैड भी हैं। हमें अपने विभिन्न स्रोतों और नेटवर्क से पहले ही इस बात की भनक लग चुकी थी कि घुसपैठिए इस रास्ते से घुसपैठ करेंगे। अलबत्ता, उन्होंने इस बात से इंकार किया कि घुसपैठ के बारे में पाकिस्तानी सेना से उन्हें कोई सूचना थी। उन्होंने कहा कि जहां तक मेरी जानकारी है, हमारा उनके साथ आतंकवाद के मुद्दे पर कोई साझा तंत्र या सहयोग नहीं है। अगर होता तो मैं सबसे पहले इसका खुलासा करता। वह तो यहां छद्म युद्ध जारी रखे हुए हैं।

मुठभेड़ में बच निकले आतंकियों की तलाशश्रीनगर


बांडीपोरा जिले के अंतर्गत गुरेज सेक्टर में गत शनिवार को शुरू हुआ घुसपैठियों के खिलाफ तलाशी अभियान रविवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। सेना के जवान मुठभेड़ में घायल होने के बावजूद बच निकले में कामयाब रहे चार से पांच आतंकियों को तलाश रहे हैं। गौरतलब है कि गत शनिवार को गुरेज सेक्टर के बग्तूर इलाके में सीमा पार से लगभग 17 आतंकियों के दो गुटों ने दो रबर किश्तियों में भारतीय इलाके में घुसपैठ का प्रयास किया था। इस घुसपैठ को नाकाम बनाते हुए एक लेफ्टिनेंट शहीद व दो अन्य जवान जख्मी हुए जबकि 12 घुसपैठिए मारे गए हैं। सेना की 15 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने गुरेज में तलाशी अभियान के जारी रहने की पुष्टि करते हुए बताया कि हमारे सूत्रों ने निकटवर्ती जंगल में एक ठिकाने का पता दिया है। वहां से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ है। वहां ताजा खून के धब्बे भी पाए गए हैं। हमारे जवान उन धब्बों के आधार पर वहां छिपे आतंकियों का पीछा कर रहे हैं। आशंका है कि वहां दो से तीन आतंकी और हो सकते हैं जो वापस जाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान पांच आतंकी बच निकलने में कामयाब रहे हैं। ये आतंकी एलओसी के इस तरफ जंगल में छिपने में कामयाब रहे हैं और उनकी जवानों के साथ गत देर रात गए भी गोलीबारी हुई है। उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है।



घुसपैठ का प्रयास विफल, आतंकी ढेर


: पुंछ जिले की मेंढर तहसील के बलनोई सेक्टर में रविवार को आतंकवादियों द्वारा किए गए घुसपैठ के प्रयास को सेना ने विफल करते हुए एक आतंकी को ढेर कर दिया, जबकि अन्य भागने में सफल हो गए। आतंकी मारे गए आतंकी का शव भी अपने साथ सीमा पार ले जाने में सफल हो गए। घुसपैठ का प्रयास कर रहे आतंकवादियों की संख्या सात के करीब बताई जा रही है। इस घटना के बाद से ही सीमा के आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान को तेज कर दिया गया है।




पंचों को उठा ले गए आतंकीश्रीनगर


: पंचायत चुनाव प्रक्रिया की सफलता से हताश आतंकियों ने सोमवार रात पुलवामा जिले में मस्जिद से दो पंचों को अगवा कर लिया। पुलिस ने पंचों का पता लगाने के लिए अभियान छेड़ दिया है। जानकारी के अनुसार पुलवामा के अबहामा गांव के दो पंच गुलाम मोहम्मद वग्गे और कासिम घोरसी स्थानीय मस्जिद में देर शाम नमाज अता कर रहे थे। उसी समय गांव में स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों का एक दल आया। आतंकियों ने वग्गे और कासिम के बारे में पूछताछ की। इसके बाद आतंकी मस्जिद में पहुंचे और दोनों को जान से मारने की धमकी देते हुए अपने साथ जंगल में ले गए। उसके बाद से ही दोनों पंच लापता हैं। एसएसपी पुलवामा अमित कुमार ने कहा कि हम दोनों अगवा पंचों की तलाश में जुटे हैं। स्थानीय लोगों से मिले सुरागों के आधार पर तलाशी अभियान छेड़ा हुआ है। उम्मीद है कि हम उन्हें जल्द मुक्त करा लेंगे। जून में संपन्न हुए पंचायती चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकियों ने छह पंच-सरपंच उम्मीदवारों पर जानलेवा हमला करने के अलावा एक महिला पंच समेत दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।


उल्फा प्रमुख ने पाकिस्तान दौरा कबूला


उल्फा के प्रमुख अरविंद राजखोवा ने मंगलवार को माना कि असम में 1990 में ऑपरेशन बजरंग के समय वह पाकिस्तान चले गए थे। हालांकि इस बात से इंकार किया कि उनके संगठन को पड़ोसी देश के इस्लामिक कट्टरपंथियों का समर्थन प्राप्त था। साथ ही उन्होंने चीन से मदद मिलने की बात को भी नकार दिया। उनका कहना है कि अगर ऐसा सशक्त देश हमें मदद कर रहा होता तो हम बहुत पहले ही असम को आजाद कर लेते। राजखोवा ने कहा, ऑपरेशन बजरंग के दौरान हम पाकिस्तान अवश्य गए थे। क्योंकि उस समय हालात अलग थे। दुश्मन का दुश्मन हमारा दोस्त होता है। तब असम-भारत विवाद था। उन्होंने कहा कि यात्रा का यह अर्थ नहीं है कि पाकिस्तान ने हमें सारे हथियार दिए थे। संगठन के लिए हमने विभिन्न स्रोतों से हथियार हासिल किए, जिनमें हथियारों के सौदागर और अन्य संगठन शामिल हैं। पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठनों द्वारा समर्थन को लेकर आई खबरों के संबंध में उल्फा प्रमुख ने कहा, हमारा संगठन सांप्रदायिकतावाद और कट्टरपंथ के खिलाफ है। इसलिए कट्टरपंथी संगठनों के साथ हमारे खड़े होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। राजखोवा ने कहा, हम न केवल पाकिस्तान गए, बल्कि हम बांग्लादेश, भूटान और म्यामां भी गए। हम यूरोप और अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक भी गए ताकि हम अपने लिए समर्थन जुटा सकें। किसी देश में रहने का यह अर्थ नहीं है कि उस देश ने हमारी मदद की। ऑपरेशन बजरंग को सेना ने 28 नवंबर 1990 में असम में उल्फा उग्रवादियों को निकाल बाहर करने के लिए शुरू किया था। परेश बरुआ समाधान के पक्ष में अरविंद राजखोवा ने संगठन में किसी तरह की टूट से इंकार किया है और यह दावा किया है कि कमांडर इन चीफ परेश बरूआ भी तीन दशक से चले आ रहे संघर्ष का समाधान चाहते हैं। एक साक्षात्कार में राजखोवा ने कहा, उल्फा में किसी तरह का विरोध है। यह सिर्फ मीडिया ही है जो कहती है कि संगठन के एक धड़े का नेतृत्व परेश बरुआ कर रहे हैं और दूसरे धड़े का नेतृत्व अरविंद राजखोवा। राजखोवा ने कहा कि हमारे संगठन का प्रधान सेनापति होने के नाते बरुआ संभवत: सैन्य समाधान चाहते हैं और अध्यक्ष होने के नाते मैं राजनीतिक समाधान चाहता हूं लेकिन हम दोनों इस संघर्ष का समाधान चाहते हैं। मैं बरूआ के संपर्क में हूं।




सात महीने की जांच के बाद पाक नागरिक गिरफ्तार


मेरठ पाकिस्तानी नागरिक कामिल उर्फ कमर मोहम्मद को मंगलवार को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। सात महीने चली लंबी जांच के बाद पुलिस ने उसे पाकिस्तानी ही माना। वह पिछले 18 सालों से अवैध तरीके से मेरठ समेत देश के कई हिस्सों में रह रहा था। फिंगर प्रिंट रिपोर्ट आने के बाद मंगलवार को आर्मी इंटेलीजेंस के सहयोग से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब उसके आइएसआइ और अल कायदा कनेक्शन तलाशने में जुट गई हैं। खैरनगर की डॉक्टर सेन वाली गली में रहने वाले कामिल उर्फ कमर को इससे पहले सेना और पुलिस की खुफिया टीम ने 26 दिसंबर 2010 को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। तब उसे बेकसूर बताते हुए छोड़ दिया गया था। हालांकि 31 दिसंबर 2010 को दैनिक जागरण ने पुख्ता सबूतों के आधार पर दावा किया था कि कामिल पाकिस्तानी नागरिक है और पाक के लिए खुफिया सूचनाएं इकठ्ठी करता है। समय लगा, लेकिन यह दावा सच निकाला। मंगलवार को डीआइजी प्रेम प्रकाश ने माना कि कामिल पाकिस्तान का ही रहने वाला है। वह अवैध रूप से मेरठ में रह रहा था। वह मूलरूप से पाकिस्तान के लाहौर शहर स्थित मकान नंबर 95 एफ चौक रंगमहल का बाशिंदा है। वर्ष 1990 में कमर 15 दिन के वीजा पर अटारी रेलवे स्टेशन के रास्ते भारत आया। दूसरी बार वह 17 जनवरी 1991 को तीन महीने के वीजा पर भारत आया और लौट गया। हालांकि खुफिया सूत्रों के अनुसार वह तीसरी बार 1993 में भारत आया। इस बार उसने अपने ठहरने के स्थानों में दिल्ली व मुंबई के पते दिए। खुफिया सूत्रों के अनुसार इसके बाद कमर मेरठ आ गया


Saturday, August 20, 2011

समझौता विस्फोट के नमूनों की फिर से होगी जांच


पंचकुला की एक विशेष अदालत ने बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को समझौता एक्सप्रेस विस्फोट के नमूनों की जांच फिर से करने की इजाजत दी। एनआइए ने मांग की थी कि वह इन नमूनों की मिलान मालेगांव, हैदराबाद और अजमेर आदि अन्य जगहों पर हुए विस्फोट से करना चाहती है। अदालत ने वर्ष 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद तथा चार अन्य के खिलाफ आरोपों में सुनवाई करते हुए यह इजाजत दी। बचाव पक्ष के वकील मनवीर राठी ने बाद में अदालत के बाहर संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने एनआइए की अर्जी का विरोध किया था। एनआइए ने चार साल लंबी जांच के बाद 20 जून को असीमानंद, सुनील जोशी (दिवंगत), लोकेश शर्मा, संदीप डांगे और रामचंद्र कालसांगरा उर्फ रामजी पर समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट करने का आरोप लगाया था, जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी।

जाली नोटों की कमाई पर पल रहे आतंकी


कोलकाता भारत में जाली नोटों को बेचकर होने वाली कमाई से पाकिस्तान में आतंकी पाले जा रहे हैं। पाकिस्तान से बांग्लादेश के जरिए भारतीय सीमा पार करके पहले जाली नोटों को बंगाल लाया जाता है, फिर बाद में महानगर के रास्ते देश के विभिन्न हिस्सों में इसे फैला दिया जाता है। इस कारोबार के जरिए भारत से मोटी रकम पड़ोसी देश के सौदागर बटोर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों को चलाने में किया जाता है। इस तरह के चौंकाने वाले तथ्य मंगलवार की रात महानगर से गिरफ्तार जाली नोटों के तस्करी गिरोह के सरगना रिआजुल शेख उर्फ करीम से पूछताछ में एसटीएफ अधिकारियों के हाथ लगे हैं। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक महानगर में जनवरी से अब तक 40 लाख रुपये के जाली नोट पुलिस ने जब्त किए हैं, जिसमें 15 से ज्यादा आरोपी को दबोच पाना संभव हो सका है। अधिकारी बताते हैं कि पूछताछ में सामने आया है कि पहले भारतीय जाली नोट बनाने के कारोबार से पाकिस्तानी खुफिया संगठन आईएसआई जुड़ा हुआ था, लेकिन इन दिनों पाकिस्तान में एकाधिक आतंकी संगठन नोट छापने के धंधे से जुड़ गए हैं। लिहाजा पहले की तुलना में अब पाकिस्तान में सौ से ज्यादा नोट छापने की मशीन चल रही है, जिससे छपकर तीन क्वालिटी का जाली नोट भारतीय बाजारों में आ रहा है। विभिन्न आतंकी संगठन इन दिनों अलग-अलग किस्म के नोट छापने के धंधे में लगे हैं और इससे होने वाले मुनाफे से पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को मजबूती मिल रही है। बेहतर क्वालिटी के नकली नोटों से चिंतित अधिकारी जानकारी के मुताबिक पहले की तुलना में अब 500 और 1000 रुपये के नोट की नकल करने में कई हद तक धंधेबाजों को सफलता मिली है। इसमें मंगलवार को जब्त नोट के बेहतर क्वालिटी ने अधिकारियों को अधिक चिंतित कर दिया है। एसटीएफ के इंस्पेक्टर बरिंदर सिंह कबरिवाल ने बताया कि मौजूदा समय में भारतीय बाजार में तीन किस्म के नोटों का धंधा चल रहा है, जो क्वालिटी के हिसाब बाजार में बेचे जा रहे हैं।



Unsealing of Samjhauta material before Aseemanand lawyer: Court


Aseemanand on Wednesday “strongly opposed” the National Investigation Agency’s application to unseal the seized material found at Samjhauta blasts site for comparison with that recovered from blasts sites at Ajmer, Modasa, Malegaon and Hyderabad. Special Judge (NIA) Subhas Mehla allowed the application but with conditions. As per the order, Assemanand’s lawyer will be allowed to be present during the visit of forensic experts from Central Forensic Science Laboratory, Hyderabad, for examination of seized material, from 8 am to 5 pm on August 21 and August 22, at NIA camp office in Panchkula.
The material recovered during the investigations in Samjhauta blasts case was submitted with chargesheet on June 20 and is presently kept in malkhana of the NIA camp office.
Aseemanand, through his lawyers, submitted that the opinion of experts from Forensic Science Laboratory, Madhuban, had already been given at an initial stage of investigation in 2007, but the agency was trying to re-investigate the case after four years. He said there was no need for unsealing the seized material as the comparisons could be made by forensic reports of the investigation agencies which were earlier entrusted with the job of probe into these blasts.
The NIA maintained that to unearth larger conspiracy of blast cases, the comparison of improvised explosive devices (IED) and other material object of Samjhauta case with the IEDs and other exhibits of other cases is required to be done by a team of experts from CFSL, Hyderabad.
Aseemanand said as he had retracted from his confessional statement, which was “put in his mouth by the prosecution agency under compelling circumstances”, the unsealing of seized material was an attempt to further implicate him and other accused in cases, which had been taken over by the NIA.
The NIA wants to examine 33 items, which include match box containing plastic envelop having yellow coloured mixture — taken out from the pipe bomb — burnt metal strips of suitcase, burnt debris recovered from burnt compartments of Samjhauta, one metallic luggage carrier (exploded) with damage in central region recovered from one of the compartments, 9 mm pistol, a burnt walky talky set, two empty cartridges and one bullet, Indian and Pakistani currency notes and plastic bottles containing chemicals. There is also a broken dark grey coloured suitcase containing battery, electric circuit, clock and dried metal pieces.
The next date for the case is September 13 and supplementary chargesheet is expected to be filed



गोरखधंधे की जड़ पकड़ नहीं पा रहा एटीएस


आनन्द राय, लखनऊ फर्जी सिम हासिल कर आइएसडी कॉल का गोरखधंधा कराने वाले कुछ मोहरे भले ही आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की गिरफ्त में आ गए हों, लेकिन जड़ तक पहंुच नहीं बन पा रही है। सूबे में बहुत पहले से चल रहा यह गोरखधंधा अब परवान चढ़ने लगा है। अलबत्ता धंधे में चेहरे, ठिकाने और तौर-तरीके बदलने लगे हैं। एटीएस को सिर्फ इतनी खबर है कि सऊदी अरब में बैठे मुंबई निवासी हामिद बख्श और मोहम्मद नूर इस कारोबार को संचालित कर रहे हैं। गोरखधंधे की पहली आहट गोरखपुर में 2006 में मिली, जब झंगहा थाना क्षेत्र के बरही में मुंबई और आजमगढ़ निवासी दो युवकों ने एक पीसीओ के जरिए खाड़ी देशों में कान्फ्रेंसिंग का कारोबार शुरू किया। पीसीओ चलाने के बावजूद लग्जरी गाडि़यों से घूमने की वजह से पुलिस की उन पर निगाह गई और जब कॉल डिटेल निकाली गई तो पता चला कि मद्रास और विभिन्न शहरों से खाड़ी देशों में लोग पीसीओ के जरिए कान्फ्रेंस कर बातचीत करते थे। लेकिन पुलिस इस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर भूल गई। फिर इस तरह के कुछ और मामले सामने आए। इस साल 19 जनवरी को एटीएस ने आजमगढ़ और लखनऊ निवासी चार लोगों को गोमतीनगर के मिठाईवाला चौराहे से पकड़ा। ये चारों बीएसएनएल के सिमकार्ड से सेटेलाइट फोन पर 44 लाख रुपये की आइएसडी कॉल करा चुके थे। इनमें लखनऊ के गोमतीनगर का मुकेश कुमार और आजमगढ़ के अबू सहमा, सैयद जफर अब्बास तथा बबलू प्रमुख थे। एटीएस को बबलू के पासपोर्ट से पता चला कि उसने 80 बार विदेश यात्रा की है। तब यह बात सामने आई थी इस धंधे में बीएसएनएल के कर्मचारियों की भी संदिग्ध भूमिका है। पुलिस ने दो-तीन और लोगों पर कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया, लेकिन अभी तक बीएसएनएल के किसी संदिग्ध कर्मचारी के चेहरे से पर्दा नहीं उठ सका। तफ्तीश में यह भी जानकारी मिली कि इस धंधे के मोहरे प्रदेश के विभिन्न शहरों में जाल बिछा रहे हैं। ये वास्तविक पहचान छिपाते हुए विभिन्न कंपनियों का पोस्टपेड सिमकार्ड हासिल करते हैं और कई बार सीधे-सादे लोगों को भी अपने भरोसे में लेकर, कुछ पैसे देते हुए उनके नाम व पते पर सिम लेकर अंतरराष्ट्रीय नंबरों और सेटेलाइट मोबाइल फोनों पर लंबी बातचीत करते हैं और हवाला के जरिए लाखों में कमीशन लेते हैं। इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि एटीएस द्वारा मंगलवार को लखनऊ में हसनगंज थाना क्षेत्र के खदरा से गिरफ्तार सफात सिद्दीकी और ताविस मसूर के पास से 65.87 लाख रुपये बरामद हुए। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सभी मामलों की सघनता से जांच चल रही है। अब एटीएस इस बात की पड़ताल में भी जुटी है कि अंडरव‌र्ल्ड और आतंकियों से इस धंधे का तार कहां तक जुड़ा है।


4 top Hizbul militants surrender Tribune News Service



Srinagar/Jammu, August 18
Four top militants of the Hizbul Mujahideen, including a divisional commander, surrendered to the police in Kulgam district today. “The police achieved a major success by forcing the longest surviving and the only active militant group of the Hizbul Mujahideen Pir Panjal Regiment to surrender in the DH Pora area in Kulgam,” a police spokesman said.

He said the militants surrendered following joint operations by the police, the Army and the CRPF in Kulgam and Reasi districts on either side of the Pir Panjal range.
The surrendered militants were identified as Mohammad Rafiq Sheikh, alias Basharat, Bashir Ahmad, alias Rashid, Mohammad Maqbool, alias Majid, and Mohammad Shafi, alias Haroon Rashid.
“All the four militants hail from Reasi district in the Jammu region and Sheikh was the divisional commander of the group,” the spokesman said.
The surrendered militants handed over two AK-47 rifles, seven magazines, one grenade launcher, five under-barrelled grenades, 118 AK rounds, one wireless set, one mobile phone, one battery and three pouches. The spokesman said at least five cases had already been registered against the militant group.
“They are also involved in a number of cases in Reasi and Ramban districts. They are being questioned to know about the details of the network in the Pir Panjal range,” he added.
In Jammu, IGP, Jammu zone, Dilbagh Singh said 36 militants, including nine foreigners, were still active in the region.
The IGP said, “Militancy has been wiped out from Kathua, Samba, Jammu, Udhampur and Reasi districts while it has ebbed in Poonch, Rajouri, Doda, Khistwar and Ramban districts.” Talking to reporters here this evening, he said “With the surrender of four hardcore militants of Hizbul Mujahideen Pir Panjal Regiment in Kulgam yesterday, Reasi district has also been cleansed of militancy,” he said.
Self-styled divisional commander of the Hizbul Mujahideen Mohammed Rafiq Sheikh, alias Basharat, a resident of Neoch in the Gulabgarh area of Reasi district, along with three other militants surrendered before the security forces in Kulgam yesterday. Sheikh had been active since 1997 and was an “A” category militant.
Besides Rafiq Sheikh, Basharar Ahmed Sheikh, also a resident of Neoch in Reasi, Mohammed Shafi Sheikh, a resident of Dewal in Mahore, and Mohammed Maqbool Sheikh, a resident of Lar in Mahore, also surrendered before the security forces only after we persuaded them via a mediator to return to the mainstream, said the IGP.
They also handed over two AK-47 rifles, one UBGL, five grenades, one wireless set and a huge quantity of arms and ammunition, he added.
The IGP informed that five cases in Kulgam and 10 in Reasi alone were registered against Rafiq Sheikh.
However, talking to the mediapersons, Rafiq Sheikh claimed that he had neither killed anyone nor had confronted the security forces in any encounter. “After I realised that I am treading a wrong path of death and destruction, I decided to surrender before the security forces,” he said.
On the rehabilitation policy of misguided youth, the IGP said the police had so far received 153 applications. “After scrutinising the applications, we have recommended the deserving cases to the government,” he said.

ट्रिब्यून, 19-08-2011
ROYAL FAMILY TO LEAD RITES OF PENITENCE 

THIRUVANANTHAPURAM
DC CORRESPONDENT 
The Travancore Royal family will lead the `vilichu cholli prayaschittham,' a rite of penitence, at the Sree Padmanabha Swamy temple on Friday.
As part of this, members of the royal family, along with devotees will openly seek Lord Padmanabha's forgiveness on the laxity that had crept into the performance of various rituals in the temple over the years.

After the `prayaschittam' the royalty as well as the commoners will also make offering to the deity. The penitence rite is being held in the wake of the devaprasnam conducted in the temple warning of danger to the Travancore royal family, the custodian of the Sree Padmanabha Swamy temple.

The seers had expressed unhappiness at many rituals not being performed properly, The series of pujas prescribed by the seers who conducted the devaprasnam have already started in the temple.

The Trikala puja meant to gain the Lord's favour has commenced in the temple. Vishnu and Bhagavathy poojas were also held in the temple. The head p r i e s t , Tharananalloor Parameswaran Namboodiri, is leading the rituals.

According to palace officials, steps are also being taken to improve the state of affairs in affiliated temples including the one at Ananthankadu and the Adi Kesava temple in Thiruvattar. Top



Wednesday, August 17, 2011

‘I asked Afzal Guru what if he dies. He said book will tell how I lived’


As a child, he never read the Quran. He has read it now in the years spent inside Tihar Jail, following his arrest in the December 2001 terror attack on Parliament.
On death row — with the Union Home Ministry recently telling the President to reject his mercy petition — Afzal Guru has revealed this and other details to Superintendent of Tihar Jail No. 3 Manoj Dwivedi. The officer heading the jail where Guru is imprisoned has written a 180-page manuscript in Hindi on the terror convict, which Tihar has denied him permission to publish.
The two first met when Guru complained to Dwivedi that he wasn’t getting his evening tea. The Superintendent intervened and, intrigued by a man who many want hanged without any delay, started having conversations with him on life and religion. Dwivedi, 36, joined as Jail No. 3 Superintendent in 2009.
“I asked him why he used Guru as surname, and he explained that his family had converted to Islam but retained their Brahmin surname. That must have been a few generations before him,” Dwivedi told The Indian Express.

Guru, who has been reading extensively on world religions, wanted to know why young children were buried in Hinduism while adults were cremated.
At another point, Dwivedi writes that Guru went to a missionary school in Sopore and wanted to become a doctor. His uncle, a cardiologist, was his ideal. The manuscript talks of his life at Delhi University, where he studied briefly.
However, Dwivedi falls short of his claim that the book seeks to answer why Guru participated in the terror attack.
Explaining his interest in a prisoner in his charge — frowned upon by the Tihar authorities — Dwivedi says: “I figured I could write because I am also an observer. I interact with prisoners a lot.” DIG, Tihar Prisons, R N Sharma, confirmed that they had denied Dwivedi permission for publication.
Dwivedi, who remains hopeful of publishing the book once he has retired, says Guru himself has given a written go-ahead to him. “He spoke about his fears; he knew he had no chance. That’s why he perhaps said yes to me when I asked him if I could write about him.”
The Superintendent adds: “I asked him what if he dies. He said the book will tell the world how I lived.” Guru has another wish, says the manuscript: When his son Ghalib grows up, he wants him to be a nice man and to be good to people.



Tuesday, August 16, 2011

Muivah praises PM’s peace efforts


The NSCN(IM) and government of India would work out an ‘honourable political settlement’ for the Naga issue in the shortest possible time, NSCN(IM) general secretary Thuingaleng Muivah said on Sunday.
Muivah also appreciated Prime Minister Manmohan Singh for going the extra mile to seek a solution ‘outside the box’, but not before slamming Jawaharlal Nehru for taking a stand of ‘crushing the Nagas within a week’.
He was delivering a speech at the 65th ‘Naga Independence Day’ at Hebron, the general headquarters of the NSCN(IM). It was on August 14, 1947 that the Naga National Council, headed by AZ Phizo, had declared the Naga Hills as independent.
Muivah recalled how the Naga political issue had been treated by India beginning from Mahatma Gandhi. “The political right of the Nagas was fully acknowledged by Gandhi. Things however changed during Nehru, who crushed the Nagas by force,” the NSCN(IM) leader said.
Of the understanding with the Centre, Muviah said, “We appreciate the earnest efforts of the Government, and the Nagas believe that the leadership of the GoI too understands the steps taken by the Nagas.”
On the GoI’s recognition of the Naga’s unique history in 2002, Muviah said, “The Nagas also highly appreciate Manmohan Singh, who stated he would go the extra-mile and seek a solution outside the box. We consider his statement a genuine commitment towards settlement.”



बातचीत के लिए आगे आएं अलगाववादी


श्रीनगर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को फिर अलगाववादियों से बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए बातचीत की प्रक्रिया को मजबूत बनाने में सहयोग का यकीन दिलाते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच अच्छे संबंध ही दोनों मुल्कों के बीच सभी राजनीतिक मुद्दों के सर्वमान्य हल का रास्ता बनाएंगे। उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए कहा कि मानवाधिकारों का संरक्षण हर कीमत पर होगा। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राज्य के लोगों के नाम अपने संदेश में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। राज्य के अंदर भी संबंधित पक्षों से बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने अलगाववादियों से कहा कि उन्हें जम्मू-कश्मीर की सियासी समस्याओं के समाधान का हिस्सा बनना चाहिए। पूरे उपमहाद्वीप में बदलते राजनीतिक परिवेश में आप लोगों को सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में अपना सकारात्मक योगदान देना होगा। हमारी सरकार जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित सभी सीबीएम को लागू कराने व उन्हें मजबूत बनाने के लिए प्रयास करेगी। मौजूदा क्रॉस एलओसी ट्रेड जो अभी बार्डर है, को नकद लेन-देन के जरिये निपटाने और इसके लिए बैंकिंग व संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने सरकार संभालते हुए सभी राजनीतिक और विकास संबंधी मामलों पर काम करने का यकीन दिलाया था। कई बार कहा है कि विकास किसी भी राजनीतिक समस्या का हल नहीं हो सकता। राजनीतिक मुद्दों का राजनीतिक हल ही तलाशा जाना चाहिए। हम कश्मीर समस्या के सियासी हल के लिए काम कर रहे हैं। यह लंबी प्रक्रिया है, जिसके पूरा होने तक विकास की उपेक्षा नहीं कर सकते। मानवाधिकार हनन के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।


पाकिस्तान ने अब तक पूरा नहीं किया वादा


अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत पाकिस्तान ने भारत को अब तक यह नहीं बताया कि मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब का बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट का वक्तव्य लेने उसका न्यायिक आयोग कब देश आएगा। मार्च में यहां गृह सचिव स्तर की वार्ता के दौरान पाक के इस प्रस्ताव पर भारत सहमत हो गया था कि वह पड़ोसी देश से एक न्यायिक आयोग को आने की इजाजत देगा ताकि इस्लामी राष्ट्र के अधिकारी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आर वी. सावंत वाघुले और जांच अधिकारी रमेश महाले के बयान दर्ज किए जा सकें। वाघुले और महाले ने ही 26/11 हमलों के दौरान गिरफ्त में आए और फिर दोषी करार दिए गए एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब का बयान दर्ज किया था। हमलों के दौरान मारे गए आतंकवादियों का पोस्टमार्टम कर चुके चिकित्सक का भी पाकिस्तान बयान दर्ज करना चाहता है। इस्लामाबाद यह कहता आया है कि पाकिस्तान में चल रहे मुंबई हमला मामले की न्यायिक प्रक्रिया के तहत भारत में आयोग भेजना जरूरी है। उसने गृह सचिव स्तर की वार्ता के दौरान वादा किया था कि वह 15 मई तक आयोग भेज देगा। पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने भी पिछले महीने थिंपू में दक्षेस बैठक के इतर गृह मंत्री पी. चिदंबरम के साथ मुलाकात के दौरान कहा था कि उनका मंत्रालय पाकिस्तान से न्यायिक आयोग जल्द भारत भेजने की दिशा में कम कर रहा है। बहरहाल, अब तक पाकिस्तान ने न्यायिक आयोग के प्रस्तावित भारत दौरे के बारे में कुछ नहीं बताया है। पाकिस्तान का दावा है कि लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकी उर रहमान लखवी सहित उसके सात आतंकवादियों पर लगे आरोप कसाब के मुंबई में दिए बयान पर आधारित हैं। लिहाजा, कसाब का इकबालिया बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट के वक्तव्य को पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत के समक्ष पेश करना जरूरी है। रावलपिंडी की अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन भारतीय अधिकारियों को जल्द ही किसी को सजा सुनाए जाने की ज्यादा उम्मीद नहीं है। वर्ष 2009 की शुरुआत के बाद से अदालत के चार न्यायाधीशों को अब तक बदला जा चुका है।


उल्फा ने केसीपी से मिलाया हाथ


असम में स्वतंत्रता दिवस के दौरान तबाही मचाने के लिए उल्फा के वार्ता विरोधी गुट ने मणिपुर के उग्रवादी संगठन कांग्लाईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) के साथ हाथ मिला लिया है। उल्फा के अधिकांश नेताओं और कैडरों के वार्ता के पक्ष में आने के बाद से परेश बरुवा गुट कैडरों की कमी से जूझ रहा है। बरुआ ने अपनी ताकत दिखाने के लिए पूर्वोत्तर के दूसरे उग्रवादी संगठनों की मदद ले रहा है। असम में उग्रवादी कार्रवाई की आशंका के बाद रात में रेल सेवा बंद कर दी गई है और दिन में भी पायलट इंजन को आगे भेजकर ट्रेन चलाई जा रही है। पूरे राज्य में सुरक्षाबलों को सतर्क कर दिया गया है और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी है। इसकी जानकारी पुलिस द्वारा गुवाहाटी में पकड़े गए केसीपी के नयन गुट के तीन कट्टर उग्रवादियों के गिरफ्तारी के बाद हुई।


बड़ी वारदात की साजिश नाकाम


: सेना रविवार को कुपवाड़ा और त्राल से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद कर आतंकियों की स्वतंत्रता दिवस पर बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश नाकाम कर दी। सुरक्षाबलों ने दोनों जगहों से 12 आइईडी, 24 ग्रेनेड, दो यूबीजीएल ग्रेनेड, 33 इलेक्टि्रक डेटोनेटर सहित काफी मात्रा में अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि जिले के रेंज टॉप जंगल में आतंकियों के एक दल को देखे जाने की सूचना मिलते ही पुलिस और 41 आरआर के जवानों ने आज सुबह एक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान आतंकी उन्हें देखते ही पेड़ों की ओट लेते हुए भाग निकले। जवानों ने ठिकाने की तलाशी ली तो उन्हें वहां से एक एसाल्ट राइफल, पांच मैगजीन, दो यूबीजीएल, एक हथगोला, 11 आईईडी, 33 इलेक्टि्रक डेटोनेटर, एसाल्ट राइफल के 60 कारतूस, एक इलेक्टि्रक तार और एक पाउच मिला। वहीं, कश्मीर स्थित त्राल के शिकारगढ़ क्षेत्र में सेना और पुलिस के संयुक्त दल ने तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान आतंकी ठिकाने से एक आइईडी, 24 ग्रेनेड, दो यूबीजीएल, चार पिस्टल, चार मैग्जीन व अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की।

: सेना रविवार को कुपवाड़ा और त्राल से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद कर आतंकियों की स्वतंत्रता दिवस पर बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश नाकाम कर दी। सुरक्षाबलों ने दोनों जगहों से 12 आइईडी, 24 ग्रेनेड, दो यूबीजीएल ग्रेनेड, 33 इलेक्टि्रक डेटोनेटर सहित काफी मात्रा में अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि जिले के रेंज टॉप जंगल में आतंकियों के एक दल को देखे जाने की सूचना मिलते ही पुलिस और 41 आरआर के जवानों ने आज सुबह एक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान आतंकी उन्हें देखते ही पेड़ों की ओट लेते हुए भाग निकले। जवानों ने ठिकाने की तलाशी ली तो उन्हें वहां से एक एसाल्ट राइफल, पांच मैगजीन, दो यूबीजीएल, एक हथगोला, 11 आईईडी, 33 इलेक्टि्रक डेटोनेटर, एसाल्ट राइफल के 60 कारतूस, एक इलेक्टि्रक तार और एक पाउच मिला। वहीं, कश्मीर स्थित त्राल के शिकारगढ़ क्षेत्र में सेना और पुलिस के संयुक्त दल ने तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान आतंकी ठिकाने से एक आइईडी, 24 ग्रेनेड, दो यूबीजीएल, चार पिस्टल, चार मैग्जीन व अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की।





किथर में पुरानी ढोक से मिले दो आतंकियों के शवकिश्तवाड़


किथर इलाके की बड़ी ढोक के पास दो सड़े गले शव बरामद हुए। सुरक्षाबलों के मुताबिक बरामद डेढ़ वर्ष पूर्व मुठभेड़ में मारे गए हिजबुल आतंकियों के हैं। 26 राष्ट्रीय राइफल के जवानों शनिवार देर रात को पहुंच कर शवों को कब्जे में लिया। पुलिस की मदद से शवों को जावड़ गांव में लाया गया। वहां रविवार को उनकी पहचान हिजबुल मुजाहिदीन के डिवीजनल कमांडर शब्बीर शाह उर्फ शाहदीन खांडे व उसके साथी मुश्ताक अहमद उर्फ अब्बुतला के रूप में की गई है। शवों के पास एक एके-47, दो मैगजीन, चार गोलियां, एक पाउच, एक छड़ी बरामद की गई। गौरतलब है कि पांच फरवरी 2010 को 26 राष्ट्रीय राइफल ने एक बड़ा अभियान छेड़ा था, जिसमें दो आतंकी फरार हो गए थे। इस इलाके में आठ से दस फिट बर्फ थी। सेना तब से दावा कर रही थी खांडे तथा उसका साथी मारा गया है। परंतु दोनों का शव का कुछ भी पता नहीं चल पाया था।


Friday, August 12, 2011

फाँसी के फंदे में अफजल


कुपवाड़ा में एक आतंकी ढेर


कुपवाड़ा जिले में वीरवार को सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराने का दावा किया है। मारे गए आतंकी के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी मिली है। अलबत्ता, अन्य आतंकियों की धरपकड़ के लिए सेना का तलाशी अभियान जारी है। कुपवाड़ा जिले में करालपोरा के पास टेंगवारी-वारसन में आतंकियों का एक दल दोपहर को देखा गया। पुलिस और सेना की 18 जीआर के जवानों का एक संयुक्त दल आतंकियों के ठिकाने की घेराबंदी करते हुए जैसे ही उन्हें आत्मसमर्पण के लिए ललकारा, उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने भी अपनी पोजीशन ली और जवाबी फायर किया। शाम पांच शुरू हुई मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया है। उसकी पहचान नहीं हो पाई है। अन्य साथी घेराबंदी में फंसे हुए हैं और उनकी संख्या तीन से चार हो सकती है।



ओसामा को पनाह के बदले सऊदी अरब ने पाकिस्तान को दी थी मोटी रकम


पाकिस्तान ने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को पनाह देने के बदले सऊदी अरब से बड़ी रकम ली थी। उसके सुरक्षाबल और खुफिया एजेंसी में शामिल कुछ नापाक तत्वों ने अमेरिका की आंखों में धूल झोंकते हुए हजारों मासूमों की हत्या के लिए जिम्मेदार ओसामा को छिपाकर रखा था। ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ के अनुसार, अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञ रेलेन हिलहाउस ने सूत्रों से प्राप्त कई साक्ष्यों के आधार पर तैयार रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है। पूर्व प्राध्यापक हिलहाउस स्मगलर भी रह चुकी हैं। उन्होंने अपने ब्लॉग पर लिखा है, मेरे सूत्रों ने बताया है कि मुखबिर ने अमेरिकी अधिकारियों को जानकारी दी थी कि सऊदी सरकार ओसामा को छिपाने के लिए पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ को भुगतान करती थी। इसके एवज में लादेन को एबटाबाद में सुरक्षित नजरबंद रखा गया था। जहां आइएसआइ व उच्च सैन्य अधिकारियों के सरकारी आवास हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि एबटाबाद में पाकिस्तान की उपस्थिति सुनिश्चित करने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों को भी सहयोग के बदले धन देने का प्रस्ताव दिया था। हिलहाउस को उनके सैन्य सूत्रों से संबंधों के लिए जाना जाता है। ऐसे सूत्र जिनके पास अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए की भी सूचनाएं रहती हैं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान ने ओसामा को मारने के लिए अमेरिका को अपने देश में गुप्त मिशन की इजाजत दे दी थी। जिसे बाद में यह कहकर दबा दिए जाने की योजना थी कि ओसामा अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया। मगर अमेरिका की योजना तब पलट गई जब सील कमांडो के एकहेलीकॉप्टर में खराबी आने के कारण उसे नष्ट कर दिया गया। इनामी राशि की वजह से पता चला ओसामा का ठिकाना उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ने आनन-फानन में ओसामा की हत्या इसलिए करवाई क्योंकि उसे डर था कि कहीं अलकायदा प्रमुख के सिर पर रखा गया ढाई करोड़ डॉलर (करीब 113 करोड़ रुपये) का ईनाम किसी को देना न पड़ जाए। आइएसआइ के एक खुफिया अधिकारी को ओसामा के ठिकाने के बारे में पता चल गया था और उसने यह खबर अमेरिकी अधिकारियों को दी भी। इसके बाद उसे 113 करोड़ रुपये देने पड़ते। अधिकारी ने अमेरिकी नागरिकता की भी मांग की थी।

कोझीकोड दोहरे विस्फोट में आतंकी सहित दो लोग दोषी


: केरल में एनआइए द्वारा जांच किए गए आतंकवाद से जुड़े मामले के पहले फैसले में अदालत ने लश्कर ए-तैयबा के संदिग्ध आतंकवादी टी नसीर और एक अन्य व्यक्ति को कोझीकोड में 3 मार्च, 2006 को हुए दोहरे विस्फोट मामले में दोषी ठहराया। एनआइए के मामलों की सुनवाई कर रही विशेष सीबीआइ अदालत ने हालांकि दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायाधीश एस. विजय कुमार ने कहा कि अब्दुल हलीम को जहां संदेह का लाभ मिला, वहीं सी यूसुफ के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। दोषियों की सजा की घोषणा शुक्रवार को की जाएगी। अदालत ने कहा कि नसीर और शफास के खिलाफ पर्याप्त सबूत थे और वे कोझीकोड विस्फोटों के मामले में दोषी पाए गए हैं। इस घटना में दो पुलिसकर्मी और एक पोर्टर घायल हो गए थे। नसीर साल 2008 में बेंगलूर में हुए विस्फोटों के मामले में भी आरोपी है।



अफजल की फांसी से सुलगेगी घाटी


: संसद पर हमले के आरोपी अफजल को फांसी की सजा देने पर जहां कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी ने पूरे कश्मीर में बगावत की धमकी दी है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल पीडीपी ने कहा कि इसका कश्मीर के हालात पर बुरा असर पड़ेगा। गिलानी ने कहा कि फांसी देने के घातक परिणाम होंगे। यहां हरेक आदमी बगावत पर उतर आएगा और उसे दुनिया की कोई भी सैन्य ताकत दबा नहीं सकेगी। अफजल हरेक कश्मीरी का हीरो है। पीडीपी के महासचिव दिलावर मीर ने भी अफजल को फांसी दिए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा, हालांकि हम किसी भी तरह के आतंकवाद का विरोध करते हैं, लेकिन अफजल को फांसी देने से कश्मीर में बहाल हो रहे अमन और कश्मीर समस्या के समाधान पर विपरीत असर होगा। हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति अफजल को फांसी की सजा पर सहृदय से फैसला लेते हुए उसे माफ करेंगी।


राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी पर राष्ट्रपति की मुहर


राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के तीन हत्यारों की दया याचिकाओं को खारिज कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2000 में तीनों कातिलों को मौत की सजा दिए जाने की पुष्टि की थी। राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद संसद हमले के आरोंपी अफजल को जल्द फांसी की उम्मीद बढ़ गई है। गौरतलब है कि 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। निचली अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद 1999 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के सदस्यों मुरुगन, संथान, पेरारिवलन और नलिनी को फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने नलिनी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता ने कहा, महामहिम (प्रतिभा पाटिल) ने पिछले हफ्ते राजीव गांधी के हत्यारों मुरुगन, संथान, पेरारिवलन की दया याचिका को खारिज कर दिया है। इन तीनों को आपराधिक साजिश रचने और आत्मघाती हमले की साजिश को अंजाम देने का दोष सिद्ध हुआ है। इन तीनों ने उच्चतम न्यायालय की पुष्टि के बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की थी। गृह मंत्रालय ने 21 जून 2005 को अपनी राय भेजी थी जिसे 23 फरवरी 2011 को समीक्षा के लिए भेजा गया और मंत्रालय ने अपनी राय आठ मार्च 2011 को फिर से राष्ट्रपति को सौंप दी। इससे पहले राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय की सिफारिश पर पंजाब के देविंदर पाल सिंह भुल्लर और असम के महेंद्र नाथ दास की दया याचिका को खारिज कर दिया था।

Naseer, Shafaz found guilty KOCHI DC CORRESPONDENT


The NIA court found that Naseer placed a bomb at the KSRTC bus stand. KOZHIKODE TWIN BLASTS CASE

The Ernakulam NIA court on Thursday convicted Lashkar-e-Toiba activist Thadiyantavide Naseer and his accomplice Shafaz, the first and fourth accused in the Kozhikode twin blasts case.
The court acquitted third accused Abdul Haleem on the ground of want of evidence and ninth accused Chettipadi Yousuf giving him the benefit of doubt.

The second accused Muhammed Ashar and eighth accused P.P. Yousaf are absconding while sixth accused Fayiz died in an encounter at Kashmir. The court will pronounce the sentence on Friday.

Recording the submissions made by Shammi Firoz, the seventh accused who turned approver, during the course of trial, NIA Special Court judge, Mr S. Vijayakumar, observed “it has got the glow of truth glittering behind the twin blasts.“ He further observed that Naseer placed a bomb at the KSRTC bus stand and it was at his instance and instigation that a bomb was placed at mofussil stand, both of which exploded.

“The motive was promoting enmity between groups of different castes and community,” said the court.

“The entire act has been a result of criminal conspiracy.” “It is significant to note that the accused chose a Friday at the time fixed for the Juma prayer for exploding the bomb so that all believers will be at the mosques leaving the rest to the rules of chances,” the court held.
During the court proceedings Naseer and other accused were unmoved and impassive. Relatives of the accused were also present.







अशफाक की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर


नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने भारत की शान, स्वाधीनता और संप्रभुता के प्रतीक लालकिले पर हमले के दोषी पाकिस्तानी नागरिक लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक की फांसी पर बुधवार को अपनी मुहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने अशफाक की अपील खारिज करते हुए सत्र अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। 22 दिसंबर 2000 को रात करीब 9:00 बजे लालकिला परिसर में गोलीबारी हुई थी, जिसमें सेना के तीन जवान शहीद हुए थे। इस मामले में सत्र अदालत व दिल्ली हाईकोर्ट ने अशफाक को फांसी की सजा सुनाई थी। न्यायमूर्ति वीएस सिरपुरकर व न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की पीठ ने अशफाक के अपराध को जघन्य करार देते हुए कहा कि यह वह मामला है जिसमें विदेशियों ने भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर सीधा हमला किया है। यह भारत माता पर हमला है। पीठ ने कहा कि भारत में षड्यंत्रकारियों के लिए कोई जगह नहीं है। विदेशी नागरिक अशफाक गैरकानूनी तरीके से भारत में घुसा और उसने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए षड्यंत्र रचा। भारतीय सेना के तीन जवानों की हत्या की और विभिन्न अन्य अपराधों को अंजाम दिया। इस मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दोषी को सिर्फ मौत की सजा ही दी जा सकती है। पीठ ने कहा कि लालकिला भारत की स्वाधीनता और संप्रभुता का प्रतीक है। प्रत्येक भारतीय की भावनाएं इससे जुड़ी हैं। यही वह जगह है, जहां से भारत के पहले प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को देश को संबोधित किया था और तब से आजतक यह परंपरा कायम है। सुप्रीम कोर्ट ने सजा के खिलाफ अशफाक की ओर से दी गई सारी दलीलें खारिज कर दीं। अशफाक की ओर से दलील दी गई थी कि विदेशी, विशेषकर पाकिस्तानी नागरिक होने के कारण जांच एजेंसी और अदालतें उसके प्रति दुर्भावना से ग्रसित थीं। सुप्रीम कोर्ट ने ये दलीलें खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन अपना मामला साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है। कोर्ट ने मामले के जांच अधिकारी और जांच टीम की तारीफ करते हुए कहा कि यह अपनी तरह का एक ऐसा उलझा केस था, जिसमें कोई सुराग नहीं था। जांच टीम ने सिर्फ एक पर्ची के सहारे जांच की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष स्वतंत्र और वैज्ञानिक है। अशफाक को प्रताडि़त करने का न तो कोई आरोप है और न ही सबूत। इसके अलावा निचली अदालत के दुर्भावनाग्रस्त होने के भी कोई प्रमाण नहीं हैं। अभियुक्त को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था।





कश्मीर में 35 सिखों की हत्या में दो पाक नागरिक बरी


: जम्मू-कश्मीर के छत्तीससिंह पुरा इलाके में हुए 35 सिखों के कत्लेआम मामले में राजधानी की तीस हजारी कोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा के दो कथित आतंकियों को बरी कर दिया है। 11 साल पहले छत्तीससिंह पुरा में सिख समुदाय के 35 लोगों की हत्या कर दी गई थी। नवंबर 2008 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुकदमा जम्मू-कश्मीर से राजधानी दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। तीस हजारी कोर्ट की अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश काबेरी बावेजा ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद सुहैल और वसीम अहमद को बरी कर दिया। ये दोनों पाकिस्तान के सियालकोट और गुजरांवाला टाउन के रहने वाले हैं।


ऑपरेशन ब्लू स्टार के नायक का श्रद्धांजलि समारोह रोका


पटियाला पंजाब पुलिस ने शिव सेना कार्यकर्ताओं को बुधवार को आपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम देने वाले जनरल अरुण श्रीधर वैद्य का शहीदी दिवस नहीं मनाने दिया। पुलिस का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है। श्रद्धांजलि समारोह रोकने के लिए पुलिस ने सुबह पांच बजे ही पूरे क्षेत्र को सील कर दिया। इसके अलावा दर्जनों शिव सैनिकों को हिरासत में लिया गया है। शिव सेना ने बुधवार को जनरल वैद्य को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम रखा था। इसके लिए लगभग तैयारियां पूरी थीं, लेकिन पुलिस ने एसजीपीसी चुनाव और स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर शांति व्यवस्था बरकरार रखने की दलील देकर मंगलवार रात को शिवसेना के राज्य उपाध्यक्ष हरीश सिंगला पर समारोह रद करने दबाव बनाया, पर सिंगला ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद पुलिस ने देर रात शिव सैनिकों के घरों पर दबिश देकर उनको हिरासत में ले लिया। साथ ही आयोजन स्थल पर ताला लगाकर फोर्स तैनात कर दी। इसके विरोध में बुधवार सुबह शिवसेना के राज्य उपाध्यक्ष हरीश सिंगला ने अपने दो दर्जन समर्थकों के साथ सरहंदी गेट पर गिरफ्तारी दी। पुलिस ने समारोह में हिस्सा लेने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए कार्यकर्ताओं को शहर में घुसने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया। हालांकि इस संबंध में किसी भी कार्यकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया है। 1984 में जनरल वैद्य ने ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार की पूरी रणनीति तैयार की थी। रिटायरमेंट के बाद वह परिवार सहित पुणे में रहने लगे थे। यहीं 10 अगस्त 1986 को मार्केट जाते वक्त उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में खालिस्तान कमांडो फोर्स ने हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए इसे ऑपरेशन ब्लू स्टार के बदले में की गई कार्रवाई बताया था।



फिरौती लेकर छोड़ दिए पंचश्रीनगर


आतंकियों ने मंगलवार आधी रात के बाद फिरौती की रकम देने के बाद अगवा किए पंचों को छोड़ दिया है। वहीं, हथियारों संग आतंकियों से जा मिले दो एसपीओ और दो इख्वानियों का बुधवार शाम तक सुराग नहीं मिला था। गौरतलब है कि आतंकियों ने पुलवामा जिले के अबहामा गांव में सोमवार रात को मस्जिद में नमाज अता कर रहे दो पंचों गुलाम मोहम्मद वग्गे और कासिम घोरसी को अगवा कर लिया था। पुलिस ने तलाश में सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। कहा जाता है आतंकियों ने पंचायत चुनाव में भाग लेने पर पंच-सरपंचों पर भारी जुर्माने का एलान किया है। न देने वाले को जान से मारने की धमकी दी है। दोनों पंच फिलहाल, सदमे में हैं। आतंकियों ने उनसे मारपीट की है। एसएसपी पुलवामा ने दोनों पंचों के घर लौट आने की पुष्टि तो की है, लेकिन उनके द्वार फिरौती अदा किए जाने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि हमने अभी इनसे पूछताछ नहीं की है, क्योंकि वे सदमे में हैं। इस समय दोनों परिजनों के संग हैं। हम कल या परसों उनसे बात करेंगे। इस बीच, कुलगाम जिला पुलिस लाइन से सोमवार शाम को इफ्तार के वक्त हथियारों संग फरार हुए दो एसपीओ और दो इख्वानी आज भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जिन हालात में ये चारों गायब हुए हैं और जिस तरह से उन्होंने हथियार लूटे, उससे साफ होता है कि वे आतंकियों से संपर्क में थे। इन चारों के आतंकियों के साथ जा मिलने की आशंका है। एसपी कुलगाम ने कहा कि हमने इन चारों के बारे में कुछ सुराग जुटाए हैं। जल्द ही हम इन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ लेंगे।


INTEL INFORMER - Pakistan showed Laden for American dream London,


The Pakistani mili- tary and the ISI, not only knew about the American raid, but also cooperated with the forces, says the report.

A Pakistani intelligence officer, who wished to secure American citizenship for his family, gave details of Osama bin-Laden's whereabouts to the US, in a deal worth $25 million which was a reward from the State Department's Rewards for Justice program.
The Pakistani officer also informed the US officials that the Saudis were paying off Pakistan and the ISI to keep Osama hidden in the Abbottabad compound, the Daily Mail reported.

The paper said this account disputes widely published reports that a courier working for Osama was the catalyst for the famous Navy SEAL Team Six mission.

The deal, the Mail said, included the roughly $25 million reward offered by the State Department for information leading to the capture dead or alive of the al Qaeda leader, who was billed as the world’s most wanted terrorist.

The State Department said it would not comment on the report.
It has been reported that the US President, Mr Barack Obama, sought four helicopters to cover the SEALs as they headed out of Pakistan, but they were not needed because the Pakistani authorities were unaware that the Americans had even entered their airspace.

But the report, based on a a blog, claimed that the Pakistani military, as well as the spy agency ISI, not only knew about the American raid, but they also cooperated with the US

special forces in the special operation.
Osama bin Laden, mastermind of the 11 September 2001 attacks and the world's most wanted terrorist, was killed in the US operation on May 2, 2011, as the special forces launched a helicopter-borne assault on a closely guarded compound in Abbottabad.
40 minutes later they left, taking with them Osama's body and a hoard of computer data devices and other information. -PTI


Tuesday, August 9, 2011

हथियार संग फरार चार एसपीओ बने आतंकी


कुलगाम के चार एसपीओ (विशेष पुलिस अधिकारी) अपने हथियार लेकर आतंकियों से जा मिले हैं। उन्होंने फरार होने से पहले हथियारों का एक ट्रंक तोड़ उसमें से राइफलों के अलावा कारतूस व हथगोले भी चुराए। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने सेना के साथ मिलकर तलाशी अभियान छेड़ दिया है। पुलिस का कहना है कि दो एसपीओ ही भागे हैं, अन्य दो एसपीओ नहीं थे। जानकारी के अनुसार कुलगाम जिला पुलिस लाइन में तैनात चार एसपीओ- गुलाम मोहिउददीन, गुल मुहम्मद उर्फ राही, शकील अहमद और बशीर अहमद अपने हथियारों के साथ सोमवार शाम रोजा-ए-इफ्तार के समय बाहर गए। इसके बाद वे नहीं लौटे। चारों एसपीओ के वापस नहीं आने पर सुबह पुलिस लाइन में चर्चाएं और शंकाएं पैदा हो गईं। पुलिस के आला अधिकारी सूचना मिलने पर पुलिस लाइन पहुंचे और लापता एसपीओ के बारे में छानबीन शुरू हुई। डीआइजी दक्षिण कश्मीर रेंज, शफाकत बटाली ने एसपीओ के लापता होने की पुष्टि करते हुए बताया कि वे चार नहीं सिर्फ दो ही हैं। उनके नाम गुलाम मोहिउद्दीन व गुल मोहम्मद राही हैं। अन्य दो उनके साथी हैं, जो पहले कभी पुलिस में एसपीओ थे, लेकिन उनकी सेवाएं कई माह पहले ही समाप्त की जा चुकी थीं।

पंचों को उठा ले गए आतंकी


: पंचायत चुनाव प्रक्रिया की सफलता से हताश आतंकियों ने सोमवार रात पुलवामा जिले में मस्जिद से दो पंचों को अगवा कर लिया। पुलिस ने पंचों का पता लगाने के लिए अभियान छेड़ दिया है। जानकारी के अनुसार पुलवामा के अबहामा गांव के दो पंच गुलाम मोहम्मद वग्गे और कासिम घोरसी स्थानीय मस्जिद में देर शाम नमाज अता कर रहे थे। उसी समय गांव में स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों का एक दल आया। आतंकियों ने वग्गे और कासिम के बारे में पूछताछ की। इसके बाद आतंकी मस्जिद में पहुंचे और दोनों को जान से मारने की धमकी देते हुए अपने साथ जंगल में ले गए। उसके बाद से ही दोनों पंच लापता हैं। एसएसपी पुलवामा अमित कुमार ने कहा कि हम दोनों अगवा पंचों की तलाश में जुटे हैं। स्थानीय लोगों से मिले सुरागों के आधार पर तलाशी अभियान छेड़ा हुआ है। उम्मीद है कि हम उन्हें जल्द मुक्त करा लेंगे। जून में संपन्न हुए पंचायती चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकियों ने छह पंच-सरपंच उम्मीदवारों पर जानलेवा हमला करने के अलावा एक महिला पंच समेत दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

दैनिक जागरण, जम्मू  संस्करण, 10-08-2011
��%� ��P�y��y��ा। हालांकि खुफिया सूत्रों के अनुसार वह तीसरी बार 1993 में भारत आया। इस बार उसने अपने ठहरने के स्थानों में दिल्ली व मुंबई के पते दिए। खुफिया सूत्रों के अनुसार इसके बाद कमर मेरठ आ गया

दैनिक जागरण, राष्ट्रीय़ संस्करण, 10-8-2011


��ह �w ��P�y��yिया है कि कमांडर इन चीफ परेश बरूआ भी तीन दशक से चले आ रहे संघर्ष का समाधान चाहते हैं। एक साक्षात्कार में राजखोवा ने कहा, उल्फा में किसी तरह का विरोध है। यह सिर्फ मीडिया ही है जो कहती है कि संगठन के एक धड़े का नेतृत्व परेश बरुआ कर रहे हैं और दूसरे धड़े का नेतृत्व अरविंद राजखोवा। राजखोवा ने कहा कि हमारे संगठन का प्रधान सेनापति होने के नाते बरुआ संभवत: सैन्य समाधान चाहते हैं और अध्यक्ष होने के नाते मैं राजनीतिक समाधान चाहता हूं लेकिन हम दोनों इस संघर्ष का समाधान चाहते हैं। मैं बरूआ के संपर्क में हूं।



सात महीने की जांच के बाद पाक नागरिक गिरफ्तार


मेरठ पाकिस्तानी नागरिक कामिल उर्फ कमर मोहम्मद को मंगलवार को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। सात महीने चली लंबी जांच के बाद पुलिस ने उसे पाकिस्तानी ही माना। वह पिछले 18 सालों से अवैध तरीके से मेरठ समेत देश के कई हिस्सों में रह रहा था। फिंगर प्रिंट रिपोर्ट आने के बाद मंगलवार को आर्मी इंटेलीजेंस के सहयोग से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब उसके आइएसआइ और अल कायदा कनेक्शन तलाशने में जुट गई हैं। खैरनगर की डॉक्टर सेन वाली गली में रहने वाले कामिल उर्फ कमर को इससे पहले सेना और पुलिस की खुफिया टीम ने 26 दिसंबर 2010 को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। तब उसे बेकसूर बताते हुए छोड़ दिया गया था। हालांकि 31 दिसंबर 2010 को दैनिक जागरण ने पुख्ता सबूतों के आधार पर दावा किया था कि कामिल पाकिस्तानी नागरिक है और पाक के लिए खुफिया सूचनाएं इकठ्ठी करता है। समय लगा, लेकिन यह दावा सच निकाला। मंगलवार को डीआइजी प्रेम प्रकाश ने माना कि कामिल पाकिस्तान का ही रहने वाला है। वह अवैध रूप से मेरठ में रह रहा था। वह मूलरूप से पाकिस्तान के लाहौर शहर स्थित मकान नंबर 95 एफ चौक रंगमहल का बाशिंदा है। वर्ष 1990 में कमर 15 दिन के वीजा पर अटारी रेलवे स्टेशन के रास्ते भारत आया। दूसरी बार वह 17 जनवरी 1991 को तीन महीने के वीजा पर भारत आया और लौट गया। हालांकि खुफिया सूत्रों के अनुसार वह तीसरी बार 1993 में भारत आया। इस बार उसने अपने ठहरने के स्थानों में दिल्ली व मुंबई के पते दिए। खुफिया सूत्रों के अनुसार इसके बाद कमर मेरठ आ गया

दैनिक जागरण, राष्ट्रीय़ संस्करण, 10-8-2011


या है कि कमांडर इन चीफ परेश बरूआ भी तीन दशक से चले आ रहे संघर्ष का समाधान चाहते हैं। एक साक्षात्कार में राजखोवा ने कहा, उल्फा में किसी तरह का विरोध है। यह सिर्फ मीडिया ही है जो कहती है कि संगठन के एक धड़े का नेतृत्व परेश बरुआ कर रहे हैं और दूसरे धड़े का नेतृत्व अरविंद राजखोवा। राजखोवा ने कहा कि हमारे संगठन का प्रधान सेनापति होने के नाते बरुआ संभवत: सैन्य समाधान चाहते हैं और अध्यक्ष होने के नाते मैं राजनीतिक समाधान चाहता हूं लेकिन हम दोनों इस संघर्ष का समाधान चाहते हैं। मैं बरूआ के संपर्क में हूं।



उल्फा प्रमुख ने पाकिस्तान दौरा कबूला


उल्फा के प्रमुख अरविंद राजखोवा ने मंगलवार को माना कि असम में 1990 में ऑपरेशन बजरंग के समय वह पाकिस्तान चले गए थे। हालांकि इस बात से इंकार किया कि उनके संगठन को पड़ोसी देश के इस्लामिक कट्टरपंथियों का समर्थन प्राप्त था। साथ ही उन्होंने चीन से मदद मिलने की बात को भी नकार दिया। उनका कहना है कि अगर ऐसा सशक्त देश हमें मदद कर रहा होता तो हम बहुत पहले ही असम को आजाद कर लेते। राजखोवा ने कहा, ऑपरेशन बजरंग के दौरान हम पाकिस्तान अवश्य गए थे। क्योंकि उस समय हालात अलग थे। दुश्मन का दुश्मन हमारा दोस्त होता है। तब असम-भारत विवाद था। उन्होंने कहा कि यात्रा का यह अर्थ नहीं है कि पाकिस्तान ने हमें सारे हथियार दिए थे। संगठन के लिए हमने विभिन्न स्रोतों से हथियार हासिल किए, जिनमें हथियारों के सौदागर और अन्य संगठन शामिल हैं। पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठनों द्वारा समर्थन को लेकर आई खबरों के संबंध में उल्फा प्रमुख ने कहा, हमारा संगठन सांप्रदायिकतावाद और कट्टरपंथ के खिलाफ है। इसलिए कट्टरपंथी संगठनों के साथ हमारे खड़े होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। राजखोवा ने कहा, हम न केवल पाकिस्तान गए, बल्कि हम बांग्लादेश, भूटान और म्यामां भी गए। हम यूरोप और अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक भी गए ताकि हम अपने लिए समर्थन जुटा सकें। किसी देश में रहने का यह अर्थ नहीं है कि उस देश ने हमारी मदद की। ऑपरेशन बजरंग को सेना ने 28 नवंबर 1990 में असम में उल्फा उग्रवादियों को निकाल बाहर करने के लिए शुरू किया था। परेश बरुआ समाधान के पक्ष में अरविंद राजखोवा ने संगठन में किसी तरह की टूट से इंकार किया है और यह दावा किया है कि कमांडर इन चीफ परेश बरूआ भी तीन दशक से चले आ रहे संघर्ष का समाधान चाहते हैं। एक साक्षात्कार में राजखोवा ने कहा, उल्फा में किसी तरह का विरोध है। यह सिर्फ मीडिया ही है जो कहती है कि संगठन के एक धड़े का नेतृत्व परेश बरुआ कर रहे हैं और दूसरे धड़े का नेतृत्व अरविंद राजखोवा। राजखोवा ने कहा कि हमारे संगठन का प्रधान सेनापति होने के नाते बरुआ संभवत: सैन्य समाधान चाहते हैं और अध्यक्ष होने के नाते मैं राजनीतिक समाधान चाहता हूं लेकिन हम दोनों इस संघर्ष का समाधान चाहते हैं। मैं बरूआ के संपर्क में हूं।