Thursday, May 5, 2011

ब्रांड लादेन का नुकसान


दस सालों से पूरी दुनिया को चकमा देने वाला ओसामा बिन लादेन आखिरकार मारा गया। दुनिया के दुश्मन नंबर वन को पकड़ने में इतनी देरी क्यों हुई? वो भी तब जबकि उसे पकड़वाने में मदद करने वाले को ढाई करोड़ डॉलर देने की बहुत पहले घोषणा हो चुकी थी। इतनी बड़ी रकम का लालच भी उसके समर्थकों को हिला नहीं सका। किसी ने उसके बारे में टिप ऑफ नहीं की। और अब तो लग रहा है कि पिछले दस साल उसने किसी जंगल या किसी पहाड़ में छुप कर नहीं बिताए होंगे। वह तो बड़े शहर में सारी सुख-सुविधाओं को
भोगते हुए सबको चकमा दे रहा था। इतने दिनों तक पूरी दुनिया के सबसे ताकतवर खुफिया तंत्रों से छिपना आसान नहीं है। इसकी दो ही वजह हो सकती हैं। या तो लादेन को पाकिस्तान सरकार का पूरा समर्थन था या फिर उसे भारी जन समर्थन था। बिन लादेन को पाकिस्तान सरकार से लगातार मदद मिलती रही और साथ ही उसके पास जुनूनी लोगों की एक ऐसी फौज थी जो उसे हर हाल में बचाने के लिए कुछ भी कर सकती थी। आखिर क्या था ब्रांड लादेन में कि उसे सरकार के साथ-साथ भारी जन समर्थन भी था। ब्रांड लादेन की सबसे बड़ी यूएसपी थी उसमें निहित घोर अमेरिका विरोध। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी ऐसी थी (यह आबादी अब भी काफी बड़ी है) जो अमेरिका की दादागिरी से गुस्से में थी। उसे लगता था कि इराक की बर्बादी कच्चे तेल पर कब्जा करने के अलावा कुछ नहीं है। इस आबादी को इस्रइल से बैर था जो अरब र्वल्ड की छाती पर मूंग दलता रहता है। इस आबादी को सुपरकॉप अमेरिका का अपने मामलों में दखल देना अच्छा नहीं लगता था। लेकिन लोकतंत्र के नाम पर अपना एजेंडा मनवाने के लिए सुपरकॉप जब तब कहीं भी सेंध मारता रहता था। इसी वजह से न चाहते हुए भी दुनिया में लाखों ऐसे लोग थे जिन्हें अमेरिका का दुश्मन पसंद आ जाता था। यह नापसंदी ब्रांड लादेन की ताकत बन गई। लादेन जैसे सरफिरे ने जब 9/11 को अंजाम दिया तो दुनिया की एक बड़ी आबादी को यह बहुत बुरा नहीं लगा। उनकी यह सोच थी कि पहली बार कुछ सरफिरों ने ही सही, अमेरिका को तबाही का मतलब समझाने की कोशिश की है। उस पर जॉर्ज बुश का यह बयान कि या तो आप मेरे साथ हैं या मेरे दुश्मन हैं, ने दुनिया में दिल बांटे। दिल बटने से भी ब्रांड लादेन को फायदा हुआ। अमेरिका पर हमले से फाइनेंशियल सिस्टम ठप हो गया। दुनिया आर्थिक मंदी की कगार पर आ गयी। 3000 निर्दोष अमेरिकियों की जानें गई- लेकिन कुछ लोगों को फिर भी दुख नहीं हुआ। लेकिन पिछले दस सालों में दुनिया ने जो खोया है उसे देखकर तो यही लगता है कि ब्रांड लादेन से किसी का भी भला नहीं हो सकता है। दुनिया को लादेन ने कई घाव दिए हैं। यहां तीन बड़े घाव उल्लेखनीय हैं। ब्रांड लादेन से सबसे बड़ा नुकसान इस्लाम का हुआ है। इस्लाम शुरुआत से ही बहिर्मुखी धर्म रहा है। इसके अनुयायी पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। कहीं वो बहुसंख्यक हैं तो कही अल्पसंख्यक। लेकिन 9/11 के बाद पूरी दुनिया में इस्लाम के मानने वालों को शक की नजर से देखा जाने लगा। इस शक की वजह से पूरे मुस्लिम समुदाय ने कई दुख झेले हैं। और ‘माई नेम इज खान एंड आई एम नॉट ए टेररिस्ट’ उसी शक के खिलाफ रिएक्शन है। फर्ज कीजिए कि मेरी वफादारी, मेरे देश प्रेम पर हर दिन, हर कोई सवाल करे तो मेरा विकास नॉर्मल नहीं हो सकता है। लादेन ने अपने फलसफे और अपने कर्मों से पूरी दुनिया में एक खास कौम को शक के दायरे में ला दिया। लादेन तो काफी लोकप्रिय हो गया और लोग उसे करिश्माई तक कहने लगे लेकिन उस कौम ने जो दुख झेले हैं, उसकी भरपाई कौन करेगा। ब्रांड लादेन की वजह से दूसरा बड़ा नुकसान रहा है हमारे अंदर का डर। 26/11 को मुंबई के ताज में जन्मदिन मनाने वाले ने कब सोचा होगा कि उसका सबसे शानदार दिन सबसे खौफनाक हो जाएगा। लादेन के सरफिरों ने पूरी दुनिया में यही खौफ फैलाया है। प्रकृति के खौफ से तो हम वाकिफ रहे हैं लेकिन सरफिरों के खौफ में हर दिन-हर पल जीना यह लादेन की ही करतूत रही है। इस खौफ के साए में जी रही पीढ़ी का मानसिक मेकअप कैसा हो रहा है, यह तो शोध का विषय है लेकिन इस खौफ ने हमारे मस्तिष्क के कई लाख मासूम सेल्स को नुकसान तो पहुंचाया ही होगा। लादेन की वजह से हमारा सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता छिन गई है। सुरक्षा के नाम पर कभी भी हमारा फोन कोई सुन लेता है। हमारे घर में कोई भी घुस जाता है। सुरक्षा के नाम पर कभी भी किसी को नंगा कर दिया जाता है। नजर रखने के लिए मानव शरीर में चिप लगाए जाने लगे हैं ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जाए। क्या इसी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पाने के लिए फ्रांस, अमेरिका और न जाने कई देशों में क्रांतियां हुई। फ्रीडम को हर संविधान का आधार बनाया गया लेकिन लादेन की करतूतों से वही स्वतंत्रता खतरे में आ गयी है। ओसामा बिन लादेन के मारे जाने से हो सकता है दुनिया में आतंकवादी हमलों में कमी आए। ग्लोबल टेरर फैक्ट्री को फाइनेंस मिलने में दिक्कत हो। सरफिरों को मासूमों की जान लेने की प्रेरणा देने वाले तत्काल न मिलें। इस तरह के फायदे तो हमें तत्काल देखने को मिलेंगे। इसके लिए हमें अमेरिकी सरकार और खास कर वहां की खुफिया एजेंसी का शुक्रगुजार होना चाहिए। लेकिन ब्रांड लादेन से हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी। क्या किसी खास कौम पर से शक के बादल छटेंगे? क्या हमारे अंदर का खौफ खत्म होगा? क्या हमें फिर से वही व्यक्तिगत स्वतंत्रता मिल पाएगी जिसके सपने फ्रेंच रिवोल्यूशन के समय में देखे गये थे? (लेखक सहारा टाइम के कार्यकारी संपादक हैं)

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