अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत से पूरे विश्व के सामने पाकिस्तान बेनकाब हो गया है। इससे सिद्ध हो गया है कि पाकिस्तान को संरक्षण देता है। अब चाहे संयुक्त राष्ट्र संघ हो अथवा अमेरिका, किसी को भी यह बताने की जरूरत नहीं कि पाकिस्तान और उससे संबद्ध कुछ चरमपंथी संगठन न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों को तबाह करने के लिए जिहाद के नाम पर आतंकवाद को पालते-पोसते रहे हैं। निश्चित रूप से अब पाकिस्तान को भी कड़े शब्दों में यह समझा दिया जाना चाहिए कि यदि उसकी आदतों में सुधार नहीं हुआ तो अंजाम क्या होगा। अमेरिकी ख़ुफिया एजेंसी सीआइए के निदेशक लिओन पनेटा ने तो बहुत पहले स्पष्ट कर दिया था कि कि अलकायदा नेता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में ही छिपा हुआ है। दरअसल, अमेरिकी अधिकारी वजीरिस्तान को सबसे खतरनाक जगह मानते थे। कहा जाता है कि यह इलाका ओसामा बिन लादेन जैसे लोगों की शरणस्थली है। अमेरिका और अफगानिस्तान लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि अलकायदा और तालिबान का पूरा नेतृत्व पाकिस्तान के किसी कबायली इलाके में ही छिपा है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भी कहा था कि प्रमुख चरमंपथी नेता पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमायी इलाके में ही कहीं छिपे हो सकते हैं। लेकिन पाकिस्तान हमेशा इस तरह की आरोपों का खंडन करता रहा है। लादेन की मौत से यह स्पष्ट हो गया है कि वह पाकिस्तान में ही छिपा हुआ था। यह कार्रवाई पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के करीब एबटाबाद में हुई। दिलचस्प यह है कि अमेरिका को यह पहले ही पता चल गया था कि लादेन एबटाबाद के आसपास ही कहीं छिपा हुआ है। अमेरिका को पहला सुराग पिछले साल अगस्त में ही मिल गया था। वैसे तो ओसामा बिन लादेन को कई चरमपंथी हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है लेकिन 11 सितंबर, 2001 को न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में हुए हमलों के कारण वह पूरे विश्व में सबसे वांछित आतंकवादी बन गया। अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 को हुए आतंकी हमले में तीन हजार से अधिक लोग मारे गए थे। इन हमलों के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान सहित कई जगह सैन्य कार्रवाई की लेकिन करीब एक दशक तक लादेन अमेरिका और गठबंधन सेना को चकमा देता रहा। अमेरिका ने लादेन के सिर पर 25 करोड़ डॉलर का इनाम भी रखा था। ओबामा के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ 40 मिनट में पूरी हो गई। इस दौरान ओबामा के अलावा तीन और लोग मारे गए, जिनमें एक उसका बेटा भी था। कार्रवाई में एक महिला भी मारी गई, क्योंकि उसे सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एबटाबाद के जिस इमारत में लादेन पर कार्रवाई हुई, उसके आकार और जटिलता ने उन्हें चकित कर दिया है। ओसामा बिन लादेन का जन्म 1957 में सऊदी अरब के एक संपन्न परिवार में हुआ। 1980 में उसने अफगानिस्तान में सोवियत संघ के कब्जे के खिलाफ लड़ने के लिए हथियार उठाए। ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका में हुए 9/11 हमलों की साजिश रची थी। हालांकि अमेरिकी सेनाएं 1990 से उसकी तलाश में जुटी थीं। बहरहाल, जिस तरह पाकिस्तान परस्त आतंकियों की वजह से भारत व दुनिया के अन्य देशों को दहशत में जीना पड़ा है, ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान से हिसाब चुकता करने का वक्त आ गया है। अब दुनिया के देशों को नए सिरे से पाकिस्तानी गतिविधियों पर अपनी नजर दौड़ानी चाहिए और उसे समझा देना चाहिए इस तरह की हरकत का परिणाम क्या होता है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
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