Wednesday, May 25, 2011

साजिशकर्ताओं ने बड़े हमले में छोटी-छोटी बातों का रखा ख्याल


अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने अपनी गवाही में कहा है कि मुंबई पर आतंकी हमले की साजिश रचते समय पाकिस्तानी साजिशकर्ताओं ने छोटी से छोटी बातों का ख्याल रखा। उसने सोमवार को अदालत में हमले की असाधारण तस्वीर पेश की, जिसके कारण तीन दिन तक भारत असहाय सा नजर आया था। 50 वर्षीय हेडली ने 26/11 हमले की साजिश से संबंधित सभी 12 आरोपों में अपना दोष स्वीकार लिया है। उसने प्ली बार्गेन के तहत अभियोजन पक्ष के साथ समझौता किया है। इसके तहत उसे संघीय अभियोजकों के साथ पूरा सहयोग करना है। अमेरिका के सहायक अटार्नी डेनियल कोलिंस ने साजिश के सभी प्रमुख एवं मामूली विवरणों को उससे जानने की कोशिश की। हेडली ने लश्कर के संचालक मेजर साजिद मीर के साथ हुई बातचीत का रहस्योद्घाटन करते हुए बताया कि उसे यह तक बताया गया था कि माथे पर मिहराब से बचने के लिए नमाज कैसे अदा की जाए। लगातार नमाज अदा करते समय सिर झुकाने से माथे पर निशान बन जाता है, जिसे मिहराब कहते हैं। यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि हेडली को अमेरिकी पासपोर्ट पर मंुबई की यात्रा करनी थी। लिहाजा माथे पर काले निशान से उस पर संदेह पैदा हो सकता था। उसे जमीन पर माथा टिकाए बगैर नमाज अदा करने की सलाह दी गई। चार घंटे की गवाही के दौरान हेडली ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी दी। उसने साजिद मीर और मेजर इकबाल को बताया था कि मुंबई के विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन पर गाडि़यों के आगमन-प्रस्थान की घोषणाएं अंग्रेजी और मराठी में होती हैं। अगर हमलावरों को अंग्रेजी नहीं आती होगी तो वे संकट में फंस सकते हैं। उसने वर्ष 2002 में गुजरात में हुए गोधरा दंगों का भी जिक्र किया। हेडली ने बताया कि वर्ष 2002-07 के दौरान लश्कर को गुजरात के मुसलमानों के सैकड़ों पत्र मिले थे, जिसमें उन्होंने मदद की गुहार लगाई थी। हेडली की गवाही कुछ दिनों तक जारी रह सकती है।


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