Wednesday, May 4, 2011

दिग्विजय की ओसामा से हमदर्दी पर कांग्रेस खफा


 बटला हाउस मुठभेड़ पर सवाल उठाने और मुंबई हमले की साजिश के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हाथ बताने वाली किताब का विमोचन कर चुके कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के उस बयान से पार्टी ने किनारा कर लिया है जिसमें उन्होंने ओसामा बिन लादेन को समुद्र में दफनाने पर एतराज जताया था। दिग्विजय ने कहा था कि कोई कितना भी बड़ा आतंकी क्यों न हो, लेकिन उसके अंतिम संस्कार में धार्मिक मान्यताओं का ध्यान जरूर रखा जाना चाहिए। पार्टी ने दिग्विजय के बयान से दूरी बनाते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी मान रही है कि दिग्विजय का बयान अल्पसंख्यक समुदाय का भरोसा तो जीतेगा नहीं, बल्कि उल्टे उसे बहुसंख्यकों के बीच में कठघरे में खड़ा कर देगा। सोमवार को ओसामा की मौत के बाद दिग्विजय की ओर से दिए गए इस बयान के बाद से ही कांग्रेस थिंकटैंक के कई सदस्य असहज थे। मंगलवार को जब दिग्विजय ने इसी बयान को दोहराया तो कांग्रेस आलाकमान हस्तक्षेप के लिए मजबूर हुआ। सूत्रों के अनुसार, उन्हें खुद सोनिया गांधी ने तलब किया। पार्टी की नजर में दिग्विजय ने ओसामा को दफनाए जाने पर जो कहा वह सांप्रदायिक है। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की दिग्विजय सिंह समेत पार्टी के अन्य नेताओं से बैठक के बाद हम उनके बयान को पूरी तरह खारिज करते हैं। आधिकारिक तौर पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी दिग्विजय के रुख से पल्ला झाड़ते हुए कहा, जो कांटे बोएगा, उसे शूल ही मिलेंगे। मप्र भाजपा के सह प्रवक्ता उमेश शर्मा ने भी दिग्विजय सिंह के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ओसामा के बारे में कांग्रेस महासचिव का सहानुभूतिपूर्णबयान उनकी वोटपरस्त मानसिकता का परिचायक है। सोशल साइटों पर दिग्विजय के इस बयान की जमकर खबर ली गई है। लोगों ने लिखा है कि आतंकवादियों का कोई मजहब न होने का उपदेश देने वाले दिग्विजय को ओसामा का मजहब क्यों नजर आ रहा है? हाल के समय में यह दूसरी बार है जब दिग्जिवय ने पार्टी को असहज किया है। इसके पहले उन्होंने लोकपाल मसौदा समिति में दलित सदस्य होने की मायावती की मांग का समर्थन किया था, जिससे कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया था|

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