अपने सैन्य ठिकाने की नाक के नीचे ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान को दुनिया को यह यकीन दिलाना मुश्किल हो रहा है कि उसने इस मोस्ट वांटेड आतंकी को छिपाने-बचाने का काम नहीं किया। पाकिस्तान पर चौतरफा सवालों की बौछार यही बता रही है कि वह दुनिया की नजरों से गिर गया है। सोमवार को जहां अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए के निदेशक लियोन पनेटा ने बिना किसी लाग लपेट के कहा कि हमने ओसामा के खिलाफ चलाए गए अभियान के बारे में पाकिस्तानी अधिकारियों को इसलिए नहीं बताया, क्योंकि वे उसे सतर्क कर सकते थे वहीं अनेक अमेरिकी सीनेटरों ने कहा कि इस पर भरोसा करना कठिन है कि ओसामा बिना किसी मदद के बीते छह वर्षों से एबटाबाद में रह रहा था। जाने-माने लेखक सलमान रश्दी ने पाक को आतंकी देश घोषित करने की मांग की है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने कहा है कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर ओसामा अपने परिवार के साथ सुकून से एक सैन्य ठिकाने के नजदीक कैसे रह रहा था? फ्रांस के विदेश मंत्री एलन जुपे ने कहा, यह मानना थोड़ा मुश्किल है कि लादेन इतने बड़े परिसर में रह रहा था और सरकारी एजेंसियों की नजर में नहीं आया। जुपे ने यह बयान ऐसे समय दिया जब पाक प्रधानमंत्री गिलानी इस समय फ्रांस की यात्रा पर है। पाकिस्तान से जैसे सवाल दुनिया पूछ रही है वैसे ही सवाल खुद पाक के लोग और वहां का मीडिया भी उठा रहा है। क्रिकेटर और नेता इमरान खान ने लिखा है कि भ्रम के माहौल ने पाक की प्रतिष्ठा, आत्मसम्मान और संप्रभुता को गहरा धक्का पहुंचाया है। इससे भारत और पश्चिमी देशों के उन आरोपों को चुनौती नहीं दी जा सकती कि पाकिस्तान ने ओसामा और अन्य आतंकियों को पनाह दी। केवल चीन ने पाकिस्तान की तरफदारी की है। उसकी नजर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान महत्वपूर्ण स्थान पर है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने वाशिंगटन पोस्ट में एक लेख के जरिये यह सफाई दी कि रविवार की घटना संयुक्त कार्रवाई नहीं थी, लेकिन अमेरिका और पाकिस्तान के बीच एक दशक के सहयोग के परिणामस्वरूप ही लादेन का खात्मा संभव हो सका। बाद में सवालों से खीझे पाकिस्तान ने एक बयान जारी कर कहा कि ओसामा को मार गिराने का अमेरिकी अभियान अनधिकृत और एकपक्षीय था। पाकिस्तान के लिए सबसे मुश्किल यह है कि कुछ अमेरिकी सीनेटरों ने यहां तक मांग कर दी है कि इस्लामाबाद को एक फूटी कौड़ी देने से पहले मदद राशि की समीक्षा की जाए। सीनेटर फ्रेंक लाउटेनबर्ग ने पाकिस्तान को दी जा रही तीन अरब डॉलर की मदद राशि तब तक स्थगित करने की मांग की जब तक इस्लामाबाद इसका जवाब नहीं दे देता है कि ओसामा कैसे इस्लामाबाद के इतने करीब रह रहा था। उन्होंने यह मांग भी की कि पाक आतंकवाद के खिलाफ अपने रूख को भी अमेरिका के समक्ष साबित करे। सीनेट की खुफिया समिति के अध्यक्ष डिएन फेंसटीन ने कहा, हमारी सरकार वित्तीय तंगी में है। एक ऐसे देश को धन देना जो पूरी तरह सहयोगी नहीं है, कई लोगों के लिए समस्या है। राष्ट्रपति ओबामा के आतंकवाद विरोधी मामलों के सलाहकार जॉन ब्रेनन के मुताबिक अमेरिका को इसकी जांच करनी चाहिए कि क्या ओसामा को पाकिस्तान में किसी तरह का अधिकारिक समर्थन प्राप्त था? वाशिंगटन स्थित एक प्रमुख थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के सदस्य रिचर्ड हास ने कहा है कि यदि पाकिस्तान ने आतंकवाद के बारे में अपने रुख में बदलाव नहीं किया तो उसके प्रति अमेरिकी उदारता जल्द खत्म हो जाएगी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेन जेम्स जोंस ने दावा किया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और सेना को ओसामा के इस्लामाबाद के निकट छिपे होने की जानकारी शायद निश्चित तौर पर होगी। एक अन्य घटनाक्रम के तहत अमेरिका ने अगले आदेश तक पाकिस्तान में अपने समस्त दूतावास आम लोगों के लिए बंद कर दिए। कई पश्चिमी देशों ने अपने लोगों को पाकिस्तान की यात्रा टालने के निर्देश जारी किए हैं|
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