Wednesday, May 25, 2011

हेडली की डायरी में पाक अफसर


मंुबई हमलों के मुख्य आरोपी डेविड कोलमैन हेडली की डायरी से पाकिस्तानी सेना के उच्चाधिकारियों और आतंकियों के कई अन्य मददगारों के फोन नंबर मिले हैं। ये सबूत हमलों की साजिश में पाक सेना, आइएसआइ और आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) की संलिप्तता को पुख्ता करते हैं। हेडली और सह आरोपी तहव्वुर राणा के बयानों और उनसे मिले दस्तावेजों के बाद अब अमेरिका को आइएसआइ का आतंकी चेहरा नजर आने लगा है। इसी का नतीजा है कि अमेरिका जांच और खुफिया एजेंसियां हेडली-राणा के मुकदमे के एक- एक बिंदु पर नजर रख रही हैं। आइएसआइ पर शिकंजा कसने में अमेरिका को राणा हेडली के बयानों से बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी अदालत में 26/11 के सह-आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने हेडली की हस्तलिखित डायरी के दो पेज पेश किए। इनमें आइएसआइ के अधिकारी मेजर इकबाल और एक अन्य मेजर एसएम के नाम और फोन नंबर भी लिखे थे। सबूत के तौर पर पेश डायरी के इस भाग को गवर्नमेंट एक्जीबिट डीसीएच-5 नाम दिया गया है। इसमें जेयूडी के आतंकी अब्दुर रहमान मक्की का भी नाम है, जो कि जेयूडी प्रमुख हाफिज सईद का मुख्य सहयोगी माना जाता है। डायरी में वासी का भी नाम और नंबर लिखा है। माना जाता है कि मंुबई हमलों को अंजाम देने वाले दस पाकिस्तानी आतंकियों को वासी ने ही निर्देश दिए थे। डायरी में लिखे अन्य नाम और नंबरों में जहांगीर इनाम, तहसीन, इजाज एम, ताहिर, मंजूर और खालिद का भी नाम है। कुछ संक्षिप्त नामों के तौर पर एआर, एमएच, एमबी और सीबी भी लिखे हैं। डायरी में पाकिस्तानी लोगों के नंबरों के अलावा दुबई के भी दो नंबर हैं। डायरी में फिल्मकार महेश भट्ट के पुत्र राहुल का भी फोन नंबर राहुल बी के नाम से है। इस पर राहुल से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, हां, नंबर तीन माह पहले तक मेरा था लेकिन व्यक्तिगत कारणों से मैंने इसे वापस कर दिया। हेडली की डायरी में दर्ज उस नंबर पर जब फोन लगाया गया तो अक्षय नाम के किसी व्यक्ति ने फोन उठाया और कहा कि उसे यह नंबर 20 दिन पहले ही मिला है। हेडली और राणा द्वारा 26/11 कांड में संलिप्तता की स्वीकारोक्ति और उनसे मिले दस्तावेजों के बाद अमेरिका की आइएसआइ के प्रति सोच बदलने लगी है। हेडली-राणा के खुलासे के बाद अमेरिका को पहली बार आइएसआइ का आतंकी चेहरा भी नजर आया है। केंद्र सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, हेडली-राणा से भारतीय दल को खुलकर पूछताछ करने तक में शर्ते और नियम लगाते रहे अमेरिका के रुख में बदलाव नजर आ रहा है। पहले लादेन का इस्लामाबाद में होना, फिर आइएसआइ की गीदड़ भभकी और अब अमेरिकी अदालत में हेडली के कुबूलनामे के बाद अमेरिका की चिंताएं आतंक के दूसरे स्वरूपों पर जा टिकी हैं। खासतौर से लादेन की मौत का बदला लेने के लिए जिस तरह से इस्लामी आतकंी जगत में हलचल हुई है, उसके बाद अमेरिका की चिंताएं और बढ़ी हैं। पाक के साथ अपने रिश्तों के मद्देनजर आइएसआइ की करतूतों पर परदा डालने के अपने रवैये में बदलाव लाना उसकी मजबूरी हो गया है। वास्तव में आतंकवाद के प्रमुख स्त्रोत के रूप में उभरी आइएसआइ पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिका अब मुंबई हमले में उसकी भूमिका के बहाने आगे बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका के न्याय विभाग और एफबीआइ ने हेडली के इकबालिया बयान के बाद 26/11 मामले में कार्रवाई तेज कर अपनी इस रणनीति के संकेत भी दे दिए हैं। भारत दौरे पर आने से पहले अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा मंत्री जेनेट नैपोलिटानो का बयान भी अमेरिकी रवैये में आए इस बदलाव को दर्शाता है। जेनेट ने कहा, भारत-अमेरिका मिलकर आंतकवाद के स्रोतों को नष्ट करेंगे। आइएसआइ पर जिन अपराधों के लिए भारत लंबे अरसे से दुनिया का ध्यान चेताता रहा है, वही मुद्दे जेनेट के एजेंडे में हैं। 26 मई को भारत आ रहीं जेनेट ने कहा, आतंकी संगठनों की जीवन रेखा खत्म करने के साथ-साथ धन की तस्करी और नकली नोट भेजने जैसे मामलों पर मैं चर्चा करूंगी। सूत्र कह रहे हैं कि जिस तरह लश्कर, जैश या पाक की जमीन पर पल रहे आतंकी संगठन एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं, वे अकेले भारत नहीं, बल्कि दूसरे देशों के लिए भी खतरा बन सकते हैं। यह चिंता अब अमेरिका को भारत के दावे और रवैये पर मुहर लगाने के लिए मजबूर करेगी।


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