9/11 के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के तत्कालीन प्रमुख जनरल महमूद अहमद तालिबान से ओसामा बिन लादेन को अमेरिका के हवाले सौंपने का संदेश लेकर अफगानिस्तान गए थे, लेकिन वहां जाकर तालिबान प्रमुख मुल्ला उमर से उन्होंने कुछ और ही कहा। जनरल अहमद ने कहा, ओसामा बिन लादेन की जान को खतरा है। उसकी बचाओ, उसकी रक्षा के लिए जो हो सके करो। पाकिस्तान आपकी मदद करेगा। दो मई को एबटाबाद में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान लादेन की मौत के बाद पूरी दुनिया के सामने कलई खुलने वाले पाकिस्तान की इस करतूत का खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि पूर्व तालिबान कमांडर मोहम्मद खाकसार ने किया है। ध्यान रहे कि जब 9/11 हुआ था तब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार थी और मोहम्मद खाकसार उस सरकार में गृह मंत्री के थे। खाकसार के इस खुलासे पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी के कई एजेंटों ने भी मुहर लगाई है। सीआइए के जासूसों ने भी अपने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया था कि तत्कालीन आइएसआइ प्रमुख ने मुल्ला उमर से लादेन की रक्षा करने की बात कही थी। विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय ऐसी सूचना होने के बाद भी अमेरिका ने आइएसआइ पर दबाव इसलिए नहीं डाला, क्योंकि उसके पास कोई विकल्प नहीं था, लेकिन एक दशक बाद एबटाबाद में लादेन को ढेर करने के बाद अमेरिका जोरदार तरीके से इन सवालों का जवाब मांग रहा है। वह लगातार पाकिस्तान से चुभते हुए सवाल पूछ रहा है। इसमें शक नहीं कि अमेरिका और पूरी दुनिया यह जान गई है कि लादेन को आइएसआइ ने मदद थी, लेकिन इस समय बड़ा सवाल यह है कि उसे किस पद पर बैठे व्यक्ति छिपाया और किस हद तक मदद की। बिन लादेन लगभग पांच साल से सेना के प्रशिक्षण संस्थान के नजदीक एबटाबाद में किन लोगों की मेहरबानी से रह रहा था। लादेन की मौजूदगी से जुड़ी जांच महज दिखावा आइएसआइ के एक अधिकारी के हवाले से खबर आ रही है कि पाकिस्तान में लादेन की मौजूदगी और उस पर अमेरिकी कार्रवाई से जुड़े मामले के लिए जो जांच कराई जा रहा है वह महज दिखावा है। पाक सेना या आइएसआइ में किसी को यह जानने की फिक्र नहीं है कि लादेन को छिपाने वाला कौन था?
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