Wednesday, June 1, 2011

आइएसआइ ने दिया था हेडली को जासूसी का प्रशिक्षण


मंुबई हमलों के मुख्यारोपी डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी ने स्वीकारा है कि उसे भारत के खिलाफ जासूसी का प्रशिक्षण पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने दिया था। लश्कर-ए-तैयबा द्वारा हेडली को दिए जा रहे जासूसी के प्रशिक्षण पर असंतुष्टि जताते हुए आइएसआइ ने मंुबई हमलों के लिए स्वयं लाहौर में उसे विशेष ट्रेनिंग दी थी। शिकागो की अदालत में मुंबई हमलों के सह-आरोपी पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा की सुनवाई के दौरान हेडली ने यह बात अभियोजक चार्ली स्विफ्ट की ओर से हो रही पूछताछ के दौरान कुबूल की। इस रहस्योद्घाटन ने भारत के इस आरोप को और मजबूती दी है कि मंुबई हमलों में आइएसआइ का हाथ था। हेडली को आइएसआइ की ओर से यह प्रशिक्षण मेजर इकबाल ने लाहौर हवाईअड्डे के पास एक दो मंजिला मकान में दिया था। आइएसआइ में मेजर इकबाल ही हेडली का आका था। ई-मेल में मेजर इकबाल चौधरी खान की आइडी प्रयोग करता है। बार-बार पूछे जाने के बाद भी हेडली ने यही कहा कि उसे मेजर इकबाल का पूरा नाम नहीं मालूम, लेकिन उसे यह पता है कि वह आइएसआइ से है। हालांकि हेडली ने इकबाल को कभी सैन्य वर्दी में नहीं देखा था, लेकिन वह कई बार उससे सेना की जीप में मिलने आता था। हेडली के मुताबिक, वह कभी भी आइएसआइ के मुख्यालय नहीं गया और सेना के एक जवान ने उसका मेजर इकबाल से परिचय कराया था। यह तथ्य सीलबंद दस्तावेजों में शामिल किया गया है। इकबाल हेडली को अपनी योजनाओं में इसलिए शामिल करना चाहता था क्योंकि वह अमेरिकी मूल का नागरिक था, इस वजह से किसी को उस पर शक नहीं होगा। वे चाहते थे कि हेडली भारत में अपना बिजनेस स्थापित करे। जिसकी आड़ में वह भारत के सभी ठिकानों की आसानी से टोह ले सके। हेडली ने कहा कि मैंने ही उन्हें बिजनेस शुरू करने में राणा की मदद लेने की सलाह दी थी। हेडली 2002 में ही पाकिस्तान में लश्कर से जुड़ गया था.


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