डेविड हेडली पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के शिविरों में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद चाहता था कि उसे कश्मीर में कोई कार्य सौंपा जाए। संघीय दस्तावेज में यह बात सामने आई कि हेडली को उसका मनपसंद कार्य नहीं सौंपा गया क्योंकि लश्कर कमांडर उसका इस्तेमाल अन्य किसी कार्य में करना चाहते थे। नए दस्तावेज के अनुसार, फरवरी 2002 में हेडली ने लश्कर-ए-तैयबा के लिए प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। दिसंबर 2003 तक हेडली ने पांच अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया था। इनमें हथियारों और ग्रेनेडों के इस्तेमाल, युद्ध रणनीति, बचने और टोह लेने के तरीके शामिल थे। हेडली कई शिविरों में प्रशिक्षण के बाद लश्कर ए तैयबा सदस्य जकीउर उर्फ जकी रहमान लखवी से परिचित हुआ जो संगठन के सैन्य अभियानों के लिए जिम्मेदार था। दस्तावेज में कहा गया है कि कि हेडली चाहता था कि उसे कश्मीर में कोई परिचालन कार्य सौंपा जाए लेकिन जकी ने उससे (हेडली से) कहा कि उसने उसके लिए कोई और काम सोच रखा है। जुलाई 2004 में हेडली ने लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ और कनिष्ठ नेतृत्व के साथ लीडरशीप कोर्स किया। इस कोर्स के दौरान जकी ने हेडली को एक प्रस्तुति दी जिसमें उसने एक कंप्यूटर एनीमेशन के जरिए यह दिखाया कि लश्कर से धन लेने वाले एक भारतीय नागरिक को कैसे मारा गया, जिसके बारे में यह माना गया कि उसने संगठन के बारे में भारतीय सेना को सूचना मुहैया कराई थीं। कोर्स के दौरान हेडली ने लश्कर ए तैयबा के हाफिज सईद, जकी और अन्य के साथ बैठकें की। बैठक के दौरान हेडली ने लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के खिलाफ मुकदमा दायर करने की सलाह दी। जकी ने उसे बताया कि मुकदमा दायर करना सही विचार नहीं है क्योंकि इससे लश्कर की गतिविधियां सार्वजनिक हो जाएंगी। अदालत में खोले गए दस्तावेज के अनुसार हेडली के सभी प्रशिक्षण पूरे करने के बाद उसके कई परामर्शदाता नियुक्त किए गए। शुरू में याकूब को हेडली का परामर्शदाता नियुक्त किया गया था। हेडली ने जकी और अन्य से शिकायत की कि याकूब उसे अधिक कार्य नहीं सौंपता। उसके बाद हेडली को मुज्जम्मिल बट को सौंपा गया जो आतंकवादी संगठन में एक अन्य वरिष्ठ नेता है। मुज्जम्मिल बट के लिए साजिद मीर नाम का व्यक्ति काम करता था। दस्तावेज के अनुसार अंतत: साजिद हेडली का हैंडलर बन गया.
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