अमेरिकी मूल के पाकिस्तानी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी ने अपने बचपन के मित्र पाकिस्तानी मूल के कनाडाइ आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा का हमेशा फायदा उठाया। राणा भी कभी अनजाने में तो कभी जानबूझकर उसकी मदद करता रहा। अब उसी मित्र ने अपनी जान बचाने के लिए राणा को फंसा दिया। करीब 25 साल पहले डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी और तहव्वुर हुसैन राणा पाकिस्तान में एक साथ सफर कर रहे थे। अंतर सिर्फ इतना था कि हेडली एक गोपनीय मिशन पर था और वह राणा को सुरक्षा छतरी के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। हेरोइन की तस्करी करते समय हेडली को पता था कि राणा के पाकिस्तानी सेना में मेडिकल के छात्र होने के नाते उसके साथ रहने पर तलाशी की आशंका कम हो जाएगी। मुंबई हमले में राणा के मुकदमे की सुनवाई कर रही शिकागो की अदालत में हेडली ने बताया भी कि राणा को इसकी भनक तक नहीं थी कि उसका साथी हेरोइन की तस्करी कर रहा है। राणा एक बार फिर अपने उसी दोस्त को सुरक्षा छतरी मुहैया कराने का आरोप झेल रहा है, लेकिन इस बार वह जानता था कि उसका दोस्त क्या करने वाला है। 2008 में मुंबई में हमले की तैयारी में उसने जानबूझकर हेडली की मदद की। सुनवाई के तीसरे दिन अमेरिकी सरकार के प्रमुख गवाह ने कबूल किया कि उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ द्वारा प्रशिक्षित किया गया। इस मामले में खुद को मौत की सजा से बचाने के लिए हेडली सरकारी गवाह बन गया है। राणा के वकीलों का कहना है कि उसे हेडली ने धोखा दिया। राणा के करीबी मित्र हेडली ने कोर्ट को बताया कि क्यों उसने शुरुआत में मुंबई हमले में जांचकर्ताओं को राणा की भूमिका के बारे में नहीं बताया था। उसने कहा कि यह जानने के बाद कि जांचकर्ताओं ने उसके बचपन के मित्र को पकड़ लिया है, उसने राणा का नाम ले लिया.
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