पाकिस्तानी मीडिया ने आतंकवाद के मसले पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। स्थानीय समाचार पत्र द डेली टाइम्स ने संपादकीय में सोमवार को लिखा कि अन्य देशों में जिहाद का निर्यात करना पाकिस्तान को महंगा पड़ रहा है। खासकर दक्षिण एशिया में। इसी का नतीजा है कि आज पाकिस्तान खुद आंतरिक युद्ध का दंश झेल रहा है। अखबार ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके देश में जितने भी आतंकी संगठन सक्रिय हैं उनको सरकार ही पालपोस रही है। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया है कि कुछ आतंकी संगठनों को सेना का भी समर्थन प्राप्त है। लेख में सरकार से उसका दोहरा रवैया छोड़ने की अपील की गई है। पाकिस्तान में आतंकवाद के चलते पिछले कुछ वर्षो में 35 हजार लोगों की जानें जा चुकी हैं। संपादकीय के मुताबिक अगर अब भी सरकारी सुरक्षा संस्थाओं की नींद नहीं खुली तो फिर पाकिस्तान को कोई नहीं बचा सकता। पिछले शनिवार को डेरा इस्माइल खान में एक पुलिस स्टेशन पर दो तालिबान आतंकियों द्वारा किए गए हमले में 12 पुलिसकर्मी मारे गए थे। हमलावरों में एक महिला भी शामिल थी। अखबार ने लिखा है कि तालिबान के लिए यह कोई नई बात नहीं है। चिंता की बात सुरक्षाबलों पर बढ़ते हमले हैं। पिछले महीने कराची में नौसैन्य ठिकाने पर हुए हमले से एक बात तो साफ हो गई है कि मुट्ठी भर आतंकी सैन्य अड्डों तक को दहलाने का दम रखते हैं। संपादकीय में जोर देकर कहा गया है कि लगातार हो रहे हमलों के बावजूद सरकार की ओर से आतंकवाद को खत्म करने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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