Wednesday, June 1, 2011

मुंबई के हमलावरों को पाक का सर्वोच्च सम्मान दिलाना चाहता था राणा


मुंबई हमलों के सहआरोपीर् आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा की ख्वाहिश थी कि 26/11 के हमलावरों को पाकिस्तान के सर्वोच्च सैन्य सम्मान निशान-ए-हैदर से नवाजा जाए। शिकागो की अदालत में राणा के खिलाफ चल रही सुनवाई में मुख्य आरोपी डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी ने अपनी गवाही में यह बात कही। पाकिस्तान का यह सबसे बड़ा सैन्य सम्मान सैनिकों और अधिकारियों को बहादुरी के लिए दिया जाता है। हेडली ने बताया कि राणा ने कहा कि मुंबई हमले में मारे गए नौ लड़ाकों को निशान-ए-हैदर दिया जाना चाहिए। हमले के दौरान एकमात्र आतंकी अजमल कसाब को भारतीय अधिकारियों ने जिंदा पकड़ लिया था। लश्कर आतंकी साजिद मीर की मुंबई के चाबाद हाउस पर हमले के लिए बनाई गई रणनीति की भी राणा ने जमकर तारीफ की थी थी। राणा ने मीर को इस्लामी इतिहास के सबसे बड़े युद्ध रणनीतिकार खालिद बिन वलीद के बराबर करार दिया था। उसने यह भी कहा कि लश्कर के आका पाकिस्तान में बैठकर मंुबई में कत्ल-ए-आम मचाने वाले हमलावरों को फोन पर निर्देश दे रहे थे। इन खतरनाक हमलों को अंजाम देने वाला लश्कर का साजिशकर्ता साजिद मीर उस वक्त कराची में था। वह टीवी पर इस खून-खराबे को देख रहा था और फोन पर आतंकियों के संपर्क में था। हेडली ने खरीदे थे 15 कलावा शिकागो : 26/11 हमलों से पहले अपने पाकिस्तानी आका मेजर इकबाल के कहने पर अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी ने मुंबई हमलावरों के लिए 15 कलावा खरीदे थे। ताकि इसे पहनकर वह हिंदू दिख सके। अदालत द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में यह बात सामने आई है। जुलाई, 2008 में हेडली ताज होटल, ओबराय होटल, रेलवे स्टेशन, लियोपोल्ड कैफे सहित कई आतंकी निशानों की टोह लेने पांचवीं बार मुंबई पहुंचा था। वह एक मंदिर भी गया था, जहां से उसने 15 कलावे खरीदे। भारत में अपने काम को अंजाम देने के बाद हेडली पाकिस्तान वापस लौटा और लश्कर संचालक साजिद मीर को खुफिया वीडियो सौंपे। दोनों ने साथ ही इस वीडियो को देखा और इस पर चर्चा की.


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