पाकिस्तान में दुर्दात आतंकी ओसामा बिन लादेन और मंुबई हमलों के मास्टरमाइंड इलियास कश्मीरी की मौत से कराची में रह रहा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भयभीत है। आइएसआइ की शह पर वहां छिपे दाऊद को अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी पर भरोसा नहीं रहा और अब वह अपना ठिकाना बदलने की जुगत में है। अंडरवर्ल्ड सूत्रों से मिली खुफिया सूचना के मुताबिक, 15 साल से यहां रह रहे दाऊद को पहली बार अपने मारे जाने का भय सता रहा है। आइएसआइ ने उसे दस साल से यहां पनाह दे रखी है, लेकिन अब उसे लग रहा है कि वह सुरक्षित नहीं है। मंुबई पुलिस की अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त हिमांशु रॉय ने बताया है कि ओसामा और कश्मीरी के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद आइएसआइ का असली चेहरा सामने आ चुका है। अब वह भी दाऊद को शरण देने से कतरा रही है। अगर आइएसआइ द्वारा डॉन को खुलकर मदद करने की बात सामने आ गई, तो उसके लिए स्थिति और ज्यादा शर्मनाक हो जाएगी। आइएसआइ और पाकिस्तानी सेना में करीबी दोस्त और रिश्तेदार होने के बावजूद डॉन को अपनी और परिवार की जान खतरे में दिख रही है। उल्लेखनीय है कि आइएसआइ पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने डॉन के साथ मिलकर 1993 में मंुबई में सीरियल बम ब्लास्ट कराए थे। अब दाऊद को आइएसआइ पर भरोसा नहीं रहा और वह अपने गुर्गो छोटा शकील और आफताब भटकी के साथ किसी दूसरे देश में जाकर बसना चाहता है। सूत्रों की मानें तो डॉन ने अपने कुछ आदमियों को भेजकर भारतीय खुफिया एजेंसियों से पूछा है कि यदि वह भारत में आत्मसर्मपण करे तो क्या उसे उचित सुरक्षा दी जाएगी? पाकिस्तानी सरकार और आइएसआइ अपने फायदे के लिए दूसरे देशों के वांछित आतंकी और माफियाओं को शरण देती हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मंुबई में दाऊद की मजबूत पकड़ के चलते आइएसआइ अधिकारी उसकी खिदमत करते हैं। इतना ही नहीं अपने काम करवाने के लिए खुफिया एजेंसी डॉन को उसकी कीमत भी देती है।
कास्कर हमले के आरोपियों की हिरासत बढ़ी : दाऊद इब्राहिम के छोटे भाई इकबाल कास्कर के वाहन चालक की हत्या मामले में अदालत ने दो आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि 13 जून तक के लिए बढ़ा दी।
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