महेश परिमल मात्र छह आतंकवादी पुख्ता जानकारी और घातक शस्त्रों से लैस होकर पाकिस्तान के मुख्य शहर कराची के मेहरान नेवल बेस पर हमला करते हैं। दस सुरक्षाकर्मियों को मारते हुए पूरे 16 घंटे तक पूरी यूनिट को अपने कब्जे में रखते हैं। इसकी जानकारी पाकिस्तान की जासूसी संस्था ने पहले से ही दे दी थी, उसके बाद भी पाकिस्तान के शासक उससे बेखबर रहे। चार आतंकी मारे जाते हैं। दो भागने में सफल होते हैं। इससे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। क्या हाईअलर्ट के बाद भी पाकिस्तान इतना सजग नहीं रह सकता कि वह अपने एयरबेस की सुरक्षा कर पाता। ऐसे में यह आशंका बलवती हो जाती है कि ये आतंकवादी पाकिस्तान के परमाणु संयंत्रों पर आसानी से कब्जा कर लेंगे। वैसे भी तालिबानी आतंकवादी अमेरिका पर खार खाकर बैठे हुए हैं। वे अमेरिका को सबक सिखाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। पाकिस्तान अपने परमाणु शस्त्रों की हिफाजत कैसे कर पाएगा, यह एक ऐसा प्रश्न है, जो आज अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को मथ रहा है। पाकिस्तान अपने बल पर अपने सैन्य छावनियों की सुरक्षा कर पाने की स्थिति में नहीं है। हेडली की स्वीकारोक्ति के बाद यह सिद्ध हो गया है कि पाकिस्तानी सरकार में ऐसे बहुत से अधिकारी हैं, जो आतंकवादियों से अच्छे संबंध बनाए रखते हैं। तालिबानियों ने पहले से पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दे दी थी कि वह लादेन के मारे जाने का बदला अवश्य लेगा। इसके मद्देनजर पाकिस्तान ने अपने मुख्य ठिकानों को विशेष सुरक्षा के तहत हाईअलर्ट पर रखा था। उसके बाद भी यह हादसा हो गया। इससे उसे 50 अरब का नुकसान हुआ, सो अलग। पाकिस्तान की यह लापरवाही और तालिबान की हिम्मत से यह आशंका बढ़ जाती है कि कांडला बंदरगाह पर भी हमला हो सकता है। क्योंकि भी कराची से कांडला बंदरगाह ज्यादा दूर नहीं है। फिर क्या होगा? तालिबान यह सिद्ध करना चाहता है कि लादेन खत्म हो गया, पर उसके सिद्धांत खत्म नहीं हुए। उसकी राख से दस और ओसामा पैदा हो सकते हैं। जब आतंकवादी ताज होटल पर कब्जा कर सकते हैं तो क्या भाभा परमाणु संयंत्र पर कब्जा नहीं जमा सकते? ऐसे में यदि उनके हाथ परमाणु शस्त्र लग गए तो सोचिए, क्या-क्या नहीं हो सकता? पूरा विश्व खतरे में पड़ जाएगा। आतंकवादियों के लिए कुछ भी असंभव नहीं। इसलिए अब उनकी निगाह पाकिस्तान के परमाणु संयंत्रों पर है। पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ में आतंकवादियों का भारी प्रभाव है, इसे सभी जानते हैं। पाकिस्तानी के सत्ताधीश कितने भी गर्व से कह लें कि उनके परमाणु संयंत्र पूरी तरह से सुरक्षित हैं। पर उन पर भरोसा कतई नहीं किया जा सकता। यह गोपनीय है कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु शस्त्रों को कहां छिपा रखा है, लेकिन इसे सभी जानते हैं कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कहां हैं। क्या पाकिस्तान के परमाणु संयंत्रों में काम करने वाले कर्मचारी विश्वासपात्र हैं, क्या उन पर पूरा भरोसा किया जा सकता है? क्या उनमें से कोई आतंकवादियों से नहीं मिल सकता? खुदा ना खास्ता यदि परमाणु हथियार आतंकवादियों के हाथ लग गए तो वे दुनिया के किसी भी देश के खिलाफ अपनी दुश्मनी निकाल सकते हैं। वैसे भी अमेरिका आतंकवादियों की हिट लिस्ट में है। वैज्ञानिक कहते हैं कि केवल यूरेनियम प्राप्त कर लेना बड़ी बात नहीं, उससे परमाणु बम बनाना बहुत ही मुश्किल है। इन बमों का उपयोग ठीक से न किया जाए तो यह उल्टे आतंकवादियों पर भी भारी पड़ सकता है। यह भी तो सोचा जा सकता है कि कितनी चतुराई से लादेन ने अमेरिका पर निशाना साधा था। क्या इतनी ही चतुराई और चालाकी से पाकिस्तान के किसी परमाणु संयंत्र पर कब्जा नहीं किया जा सकता? संभव है एयरबेस उस बड़ी कार्रवाई का रिहर्सल हो। अभी पाकिस्तान ने अपने परमाणु शस्त्रों को पंजाब में कहीं रखा है, ऐसा बताया जाता है। ये स्थान अत्यंत गोपनीय होते हैं। परमाणु शस्त्रों को अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाता है। इनके स्थान बदलते रहते हैं। यदि परमाणु शस्त्रों का स्थान बदला जा रहा है, इसकी सूचना आतंकवादियों को मिल गई तो क्या उसे हथियाने में उन्हें वक्त लगेगा? स्थान परिवर्तन की सूचना प्राप्त करना आतंकियों के लिए कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
Wednesday, June 1, 2011
पाक के परमाणु शास्त्र भी असुरक्षित
महेश परिमल मात्र छह आतंकवादी पुख्ता जानकारी और घातक शस्त्रों से लैस होकर पाकिस्तान के मुख्य शहर कराची के मेहरान नेवल बेस पर हमला करते हैं। दस सुरक्षाकर्मियों को मारते हुए पूरे 16 घंटे तक पूरी यूनिट को अपने कब्जे में रखते हैं। इसकी जानकारी पाकिस्तान की जासूसी संस्था ने पहले से ही दे दी थी, उसके बाद भी पाकिस्तान के शासक उससे बेखबर रहे। चार आतंकी मारे जाते हैं। दो भागने में सफल होते हैं। इससे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। क्या हाईअलर्ट के बाद भी पाकिस्तान इतना सजग नहीं रह सकता कि वह अपने एयरबेस की सुरक्षा कर पाता। ऐसे में यह आशंका बलवती हो जाती है कि ये आतंकवादी पाकिस्तान के परमाणु संयंत्रों पर आसानी से कब्जा कर लेंगे। वैसे भी तालिबानी आतंकवादी अमेरिका पर खार खाकर बैठे हुए हैं। वे अमेरिका को सबक सिखाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। पाकिस्तान अपने परमाणु शस्त्रों की हिफाजत कैसे कर पाएगा, यह एक ऐसा प्रश्न है, जो आज अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को मथ रहा है। पाकिस्तान अपने बल पर अपने सैन्य छावनियों की सुरक्षा कर पाने की स्थिति में नहीं है। हेडली की स्वीकारोक्ति के बाद यह सिद्ध हो गया है कि पाकिस्तानी सरकार में ऐसे बहुत से अधिकारी हैं, जो आतंकवादियों से अच्छे संबंध बनाए रखते हैं। तालिबानियों ने पहले से पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दे दी थी कि वह लादेन के मारे जाने का बदला अवश्य लेगा। इसके मद्देनजर पाकिस्तान ने अपने मुख्य ठिकानों को विशेष सुरक्षा के तहत हाईअलर्ट पर रखा था। उसके बाद भी यह हादसा हो गया। इससे उसे 50 अरब का नुकसान हुआ, सो अलग। पाकिस्तान की यह लापरवाही और तालिबान की हिम्मत से यह आशंका बढ़ जाती है कि कांडला बंदरगाह पर भी हमला हो सकता है। क्योंकि भी कराची से कांडला बंदरगाह ज्यादा दूर नहीं है। फिर क्या होगा? तालिबान यह सिद्ध करना चाहता है कि लादेन खत्म हो गया, पर उसके सिद्धांत खत्म नहीं हुए। उसकी राख से दस और ओसामा पैदा हो सकते हैं। जब आतंकवादी ताज होटल पर कब्जा कर सकते हैं तो क्या भाभा परमाणु संयंत्र पर कब्जा नहीं जमा सकते? ऐसे में यदि उनके हाथ परमाणु शस्त्र लग गए तो सोचिए, क्या-क्या नहीं हो सकता? पूरा विश्व खतरे में पड़ जाएगा। आतंकवादियों के लिए कुछ भी असंभव नहीं। इसलिए अब उनकी निगाह पाकिस्तान के परमाणु संयंत्रों पर है। पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ में आतंकवादियों का भारी प्रभाव है, इसे सभी जानते हैं। पाकिस्तानी के सत्ताधीश कितने भी गर्व से कह लें कि उनके परमाणु संयंत्र पूरी तरह से सुरक्षित हैं। पर उन पर भरोसा कतई नहीं किया जा सकता। यह गोपनीय है कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु शस्त्रों को कहां छिपा रखा है, लेकिन इसे सभी जानते हैं कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कहां हैं। क्या पाकिस्तान के परमाणु संयंत्रों में काम करने वाले कर्मचारी विश्वासपात्र हैं, क्या उन पर पूरा भरोसा किया जा सकता है? क्या उनमें से कोई आतंकवादियों से नहीं मिल सकता? खुदा ना खास्ता यदि परमाणु हथियार आतंकवादियों के हाथ लग गए तो वे दुनिया के किसी भी देश के खिलाफ अपनी दुश्मनी निकाल सकते हैं। वैसे भी अमेरिका आतंकवादियों की हिट लिस्ट में है। वैज्ञानिक कहते हैं कि केवल यूरेनियम प्राप्त कर लेना बड़ी बात नहीं, उससे परमाणु बम बनाना बहुत ही मुश्किल है। इन बमों का उपयोग ठीक से न किया जाए तो यह उल्टे आतंकवादियों पर भी भारी पड़ सकता है। यह भी तो सोचा जा सकता है कि कितनी चतुराई से लादेन ने अमेरिका पर निशाना साधा था। क्या इतनी ही चतुराई और चालाकी से पाकिस्तान के किसी परमाणु संयंत्र पर कब्जा नहीं किया जा सकता? संभव है एयरबेस उस बड़ी कार्रवाई का रिहर्सल हो। अभी पाकिस्तान ने अपने परमाणु शस्त्रों को पंजाब में कहीं रखा है, ऐसा बताया जाता है। ये स्थान अत्यंत गोपनीय होते हैं। परमाणु शस्त्रों को अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाता है। इनके स्थान बदलते रहते हैं। यदि परमाणु शस्त्रों का स्थान बदला जा रहा है, इसकी सूचना आतंकवादियों को मिल गई तो क्या उसे हथियाने में उन्हें वक्त लगेगा? स्थान परिवर्तन की सूचना प्राप्त करना आतंकियों के लिए कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
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