ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद सैफ अल अदल को अलकायदा का अंतरिम चीफ बनाए जाने की खबर चौंकाने वाली है। खासतौर पर इसलिए कि लादेन के बाद दूसरे नंबर की हैसियत वाले अल जवाहिरी की उपेक्षा करके अदल को प्रमुख बनाया गया है। इससे इस आतंकी संगठन में अंदरूनी खींचतान का संकेत मिलता है। मिश्च के पूर्व सैनिक 50 वर्षीय सैफ की 1998 में कीनिया और तंजानिया की राजधानियों में अमेरिकी दूतावास पर बम हमलों के लिए तलाश है। 90 के दशक की शुरुआत में वह अलकायदा में भरती हुआ और 1981 में मिश्च छोड़कर अफगानिस्तान में मुजाहिद्दीन बन गया। जल्दी ही वह अलकायदा का एक शीर्ष कमांडर और ओसामा बिन लादेन का विश्वासपात्र बन गया। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर जब हमला हुआ तब वह अफगानिस्तान में था। अमेरिका द्वारा अलकायदा और तालिबान के ठिकानों पर हमले शुरू करने के बाद वह ईरान भाग गया। अक्टूबर 2010 में वह पाकिस्तान के उत्तर वजीरिस्तान में देखा गया। अल जवाहिरी ने सैफ को उत्तर वजीरिस्तान में कमांडर के रूप में काम करने को कहा। सैफ अलकायदा के एक और कमांडर इलियास कश्मीरी के साथ काम करता है, जो पाकिस्तान स्पेशल फोर्सेज का एक पूर्व सैनिक है और हरकत-उल जिहाद अल-इस्लामी (हूजी) तथा लश्करे तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर काम करता है। सैफ अलकायदा के कई ऑपरेशनों और गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है, लेकिन फिलहाल उसने अपनी गतिविधियां सीमित कर रखी थीं। उसकी सोच और कार्यक्रम के बारे में उसके ससुर मुस्तफा हामिद द्वारा चलाई जा रही एक वेबसाइट माफा अल-सियासी पर प्रकाशित लेखों से ही पता चलता है। इन लेखों में वह अलकायदा द्वारा की गई गलतियों को स्वीकार करता है, लेकिन उसका मानना है कि दुनिया भर में इस्लाम की श्रेष्ठता कायम करने का एक मात्र रास्ता जिहाद ही है। उसने अमेरिका के खिलाफ पूरी तरह से लड़ाई छेड़ने का प्रचार किया और अलकायदा को इस्लाम का रक्षक बताया, जिसके बारे में उसका मानना था कि उसने पश्चिमी देशों के घुटने टिका दिए थे। उसने अरब और दूसरे मुस्लिम नेताओं के असली रूप को उजागर करने का श्रेय भी अलकायदा को दिया, जिन्हें अब लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। पहली बार कराची में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के सिलसिले में सैफ का नाम 2002 में अखबारों में उछला था। सैफ ने कराची में रहने वाले अलकायदा के एक अन्य सीनियर कमांडर खालिद मोहम्मद शेख से पर्ल मामले से निपटने को कहा था। शेख ने पूछताछ के दौरान बताया कि सैफ ने ही जूते में बम विस्फोट की साजिश रची थी। रिचर्ड रीड ने दिसंबर 2001 में एक ट्रांस-अटलांटिक विमान में बम विस्फोट के लिए अपने जूतों में बम छिपा लिए थे। पर्ल पाकिस्तान में रीड की यात्रा की और विभिन्न देशों में फैले आतंकवादी नेटवर्क और सरकारी एजेंसियों से उसे मिल रहे समर्थन की जांच करना चाहता था। सैफ पर्ल को मारने के पक्ष में नहीं था, लेकिन खालिद शेख ने एक अन्य अलकायदा नेता शरीफ अल-मसरी की सलाह पर उसे मारने का फैसला किया। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार के अनुसार सैफ ने अलकायदा की मौजूदगी और क्षमता की ताकत जाहिर करने के लिए आतंकी हमलों के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेष ऑपरेशन काउंसिल बनाई है। सैफ के अलावा इस काउंसिल के दो अन्य सदस्य इलियास कश्मीरी और अदनान गुलशेर अल शुक्रीजुमाह हैं। शुक्रीजुमाह एक सऊदी है, जो अमेरिका में पला-बढ़ा और अब पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में रह रहा है। यह फैसला 10 मई को हुई काउंसिल की बैठक में लिया गया। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
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