अमेरिका में आगामी चुनाव में राष्ट्रपति पद के दावेदार रिपब्लिकन नेता ने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने में अमेरिका खुफिया एजेंसी सीआइए को सूचना मुहैया कराने पांच मुखिबरों की पाकिस्तान में गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रतिद्वंद्वी नेवट जिंगरिच ने दावा किया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ का एक बड़ा हिस्सा आतंकी संगठन तालिबान और अलकायदा का समर्थक बन चुका है। नेवट ने फॉक्स न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, ऐसी परिस्थितियों के बाद तो पाकिस्तान के संदर्भ में अमेरिका की पूरी नीति में बदलाव की जरूरत है। वह 2012 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति बराक ओबामा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें पाकिस्तान में अपनी प्रत्येक रणनीति की पुन: समीक्षा करनी चाहिए। खासकर खुफिया आदान-प्रदान को लेकर। 9/11 हमलों के बाद से हम पाकिस्तान को आतंकवाद से लड़ने के लिए 20 अरब डॉलर (करीब 897 अरब रुपये) की मदद कर चुके हैं। यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका विरोधी है। उन्होंने कहा, हमें इस बात पर क्रोधित होना चाहिए कि पाकिस्तानी अधिकारी ओसामा की रक्षा कर रहे थे। अब जब पाकिस्तान उन लोगों को सजा दे रहा है जो अमेरिका की सहायता कर रहे हैं, मुझे लगता है कि हमें अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।
Wednesday, June 29, 2011
आतंकियों की समर्थक बन चुकी है आइएसआइ
अमेरिका में आगामी चुनाव में राष्ट्रपति पद के दावेदार रिपब्लिकन नेता ने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने में अमेरिका खुफिया एजेंसी सीआइए को सूचना मुहैया कराने पांच मुखिबरों की पाकिस्तान में गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रतिद्वंद्वी नेवट जिंगरिच ने दावा किया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ का एक बड़ा हिस्सा आतंकी संगठन तालिबान और अलकायदा का समर्थक बन चुका है। नेवट ने फॉक्स न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, ऐसी परिस्थितियों के बाद तो पाकिस्तान के संदर्भ में अमेरिका की पूरी नीति में बदलाव की जरूरत है। वह 2012 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति बराक ओबामा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें पाकिस्तान में अपनी प्रत्येक रणनीति की पुन: समीक्षा करनी चाहिए। खासकर खुफिया आदान-प्रदान को लेकर। 9/11 हमलों के बाद से हम पाकिस्तान को आतंकवाद से लड़ने के लिए 20 अरब डॉलर (करीब 897 अरब रुपये) की मदद कर चुके हैं। यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका विरोधी है। उन्होंने कहा, हमें इस बात पर क्रोधित होना चाहिए कि पाकिस्तानी अधिकारी ओसामा की रक्षा कर रहे थे। अब जब पाकिस्तान उन लोगों को सजा दे रहा है जो अमेरिका की सहायता कर रहे हैं, मुझे लगता है कि हमें अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।
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